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शीशम की लकड़ी के हैंडीक्राफ्ट आइटमों का हो सकेगा निर्यात
राकेश कुमार /अमर उजाला, संभल
Updated Sun, 29 Jan 2017 01:09 AM IST
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यह छूट ईपीसीएच की पैरवी पर मिली है। इससे निर्यातकों में खुशी है। अब नए आर्डर मिलने के साथ ही पुराने आर्डर भी आसानी से पूरे किए जा सकेंगे।
जेनेवा स्थित कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल ट्रेड इन इंडैंजर्ड स्पिशीज सीआईटीईएस ने डलबर्गा प्रजाति की लकड़ियों के उत्पाद को अपनी अनुसूची दो में डालकर एक नोटिफिकेशन जारी किया था। नोटिफिकेशन में शीशम की लकड़ी से तैयार हैंडीक्राफ्ट आइटमों के निर्यात को प्रतिबंधित किए जाने का प्रस्ताव था। यदि यह प्रतिबंध लागू होता तो भारत के तमाम हैंडीक्राफ्ट निर्यातकों को सीधा झटका लग सकता था। इसकोे लेकर एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल सतर्क हो गई।
काउंसिल ने भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के माध्यम से सीआईटीईएस जेनेवा में अपना पक्ष रखा है। भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने सीआईटीईएस में पैरवी की। इसके बाद सीआईटीईएस ने कुछ नियम और शर्तों के साथ ईपीसीएच को शीशम की लकड़ी का इस्तेमाल करके तैयार होने वाले हैंडीक्राफ्ट आइटमों के निर्यात के संबंध में सर्टिफिकेट जारी करने का अधिकार दिया है। ईपीसीएच ने इसके लिए वृक्ष नामक संस्था का गठन किया है।
यह संस्था लकड़ी के वैधानिक स्रोत प्राप्त किए जाने का प्रमाणपत्र जारी करेगी।
निर्यात होते हैं कम से कम 1000 आइटम ः फोटोफ्रेम, टी-कोस्टर, अगरबत्ती, मोमबत्ती स्टैंड, नैपकिन होल्डर, ज्वेलरी बाक्स, फर्नीचर समेत करीब एक हजार आइटम ऐसे हैं जो संसार के 50 से अधिक देशों तक निर्यात किए जाते हैं। भारतीय शीशम कुछ ऐसा है जो ग्राहकों को सहज रूप से लुभाता है।
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जेनेवा स्थित कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल ट्रेड इन इंडैंजर्ड स्पिशीज सीआईटीईएस ने डलबर्गा प्रजाति की लकड़ियों के उत्पाद को अपनी अनुसूची दो में डालकर एक नोटिफिकेशन जारी किया था। नोटिफिकेशन में शीशम की लकड़ी से तैयार हैंडीक्राफ्ट आइटमों के निर्यात को प्रतिबंधित किए जाने का प्रस्ताव था। यदि यह प्रतिबंध लागू होता तो भारत के तमाम हैंडीक्राफ्ट निर्यातकों को सीधा झटका लग सकता था। इसकोे लेकर एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल सतर्क हो गई।
काउंसिल ने भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के माध्यम से सीआईटीईएस जेनेवा में अपना पक्ष रखा है। भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने सीआईटीईएस में पैरवी की। इसके बाद सीआईटीईएस ने कुछ नियम और शर्तों के साथ ईपीसीएच को शीशम की लकड़ी का इस्तेमाल करके तैयार होने वाले हैंडीक्राफ्ट आइटमों के निर्यात के संबंध में सर्टिफिकेट जारी करने का अधिकार दिया है। ईपीसीएच ने इसके लिए वृक्ष नामक संस्था का गठन किया है।
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यह संस्था लकड़ी के वैधानिक स्रोत प्राप्त किए जाने का प्रमाणपत्र जारी करेगी।
निर्यात होते हैं कम से कम 1000 आइटम ः फोटोफ्रेम, टी-कोस्टर, अगरबत्ती, मोमबत्ती स्टैंड, नैपकिन होल्डर, ज्वेलरी बाक्स, फर्नीचर समेत करीब एक हजार आइटम ऐसे हैं जो संसार के 50 से अधिक देशों तक निर्यात किए जाते हैं। भारतीय शीशम कुछ ऐसा है जो ग्राहकों को सहज रूप से लुभाता है।
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