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यह जो आजादी है तुम्हारी है, था जो बेटा जवान मेरा था...
ब्यूरो/अमर उजाला संभल
Updated Mon, 06 Jun 2016 01:13 AM IST
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चंदौसी के बिंदल फार्म में शाम-ए-गजल में प्रस्तुति देती शायर।
- फोटो : amar ujala
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शाम-ए-गजल का रविवार को बिंदल फार्म में आयोजन हुआ। शायरों ने अपने कलामें से मथुरा कांड में शहीद हुए पुलिस अधिकारियों को श्रद्घांजलि दी।
बिंदल फार्म में कार्यक्रम की निजामत करते हुए विकास राणा ने कहा कि मुखाफित का अजब दौर आ गया, लोगो करेला नीम का कड़वा बताया गया।
यह जो आजादी है, तुम्हारी है। था जो बेटा जवान मेरा था। तालाबों के शिलापटों से पर्दा हटा गए नेता जी, प्यास लगी थी पानी देते, भाषण पिला गए नेता जी। नीना सहर ने कहा कि तुमसे जाना कि इक हूं मैं, हर्फ दर हर्फ लाजवाब हूं मैं। रश्मि शर्मा ने कहा आ ही जाएंगे आदमी के हुनर, अभी इस शहर में नई हूं ना।
मनोज अजहर ने तुमसे मिलकर इतनी तो उम्मीद हुई है, इस दुनिया में वक्त बिताया जा सकता है। सगीर आलम ने कहा तेरा धोखा ही हो गया होता, दिल को कुछ सुकूंन मिल गया होता। तरकश प्रदीप ने कहा मेरा पिंजरा खोल दिया है, तुम भी अजीब शिकारी हो। अपने ही पैर काट लिए हैं, मैं भी अजीब परिंदा हूं।
सदारत करते हुए फहमी बदायूंनी ने कहा कोई मजबूत सी जंजीर भेजो, तुम्हारी याद पागल हो गई है। नीलेंद्र ऐरन, विनय अग्रवाल, शरद अग्रवाल, डा. विनय वार्ष्णेय, सुबोध गुप्ता, राधाकृष्ण मंगलम, संजय अग्रवाल, शलभ रुस्तगी, महेंद्र कुमार मौजूद रहे।
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बिंदल फार्म में कार्यक्रम की निजामत करते हुए विकास राणा ने कहा कि मुखाफित का अजब दौर आ गया, लोगो करेला नीम का कड़वा बताया गया।
यह जो आजादी है, तुम्हारी है। था जो बेटा जवान मेरा था। तालाबों के शिलापटों से पर्दा हटा गए नेता जी, प्यास लगी थी पानी देते, भाषण पिला गए नेता जी। नीना सहर ने कहा कि तुमसे जाना कि इक हूं मैं, हर्फ दर हर्फ लाजवाब हूं मैं। रश्मि शर्मा ने कहा आ ही जाएंगे आदमी के हुनर, अभी इस शहर में नई हूं ना।
मनोज अजहर ने तुमसे मिलकर इतनी तो उम्मीद हुई है, इस दुनिया में वक्त बिताया जा सकता है। सगीर आलम ने कहा तेरा धोखा ही हो गया होता, दिल को कुछ सुकूंन मिल गया होता। तरकश प्रदीप ने कहा मेरा पिंजरा खोल दिया है, तुम भी अजीब शिकारी हो। अपने ही पैर काट लिए हैं, मैं भी अजीब परिंदा हूं।
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सदारत करते हुए फहमी बदायूंनी ने कहा कोई मजबूत सी जंजीर भेजो, तुम्हारी याद पागल हो गई है। नीलेंद्र ऐरन, विनय अग्रवाल, शरद अग्रवाल, डा. विनय वार्ष्णेय, सुबोध गुप्ता, राधाकृष्ण मंगलम, संजय अग्रवाल, शलभ रुस्तगी, महेंद्र कुमार मौजूद रहे।
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