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Sambhal News: स्कूल में पढ़ाते हैं रावण, लक्ष्मण हैं किराना व्यापारी
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चंदौसी (संभल)।
रजपुरा कस्बे में इस बार 124वां रामलीला महोत्सव चल रहा है। ये क्षेत्र की सबसे प्राचीन रामलीला में से एक है। यहां आसपास के दर्जनों गांवों से हजारों की संख्या में लोग रामलीला का मंचन देखने आते हैं। मंचन में बच्चों को शिक्षा देने वाले सत्यपाल सिंह यादव अध्यापक जहां रावण बने है। वहीं लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले गोविंद वार्ष्णेय किराना व्यापारी हैं।
अभिनय करने वाले कलाकार बड़े ही सुंदर ढंग से मंचन प्रदर्शित करते हैं। यही वजह है कि रजपुरा में बाहर की रामलीला कंपनी को कम ही बुलाया जाता है। यहां अभिनय करने वाले ये कलाकार दिनभर अपने व्यवसाय में लगे रहते हैं। इनमें कुछ नौकरीपेशा भी हैं। वहीं शाम को सभी रामलीला में अभिनय करने पहुंच जाते है। इनमें कोई मेडिकल संचालक है, तो कोई अध्यापक है। किसी का व्यापार है, तो कोई दुकान चलाता है। बड़ी बात यह है कि सभी निस्वार्थ भाव से रामलीला में अपना सहयोग करते हैं। शौक ऐसा है कई कलाकार 20-20 साल से रामलीला में अभिनय कर रहे हैं।
15 वर्ष से कर रहे है लक्ष्मण का अभिनय
गोविंद वार्ष्णेय 15 वर्ष से लक्ष्मण का अभिनय कर रहे हैं। उनकी उम्र 44 वर्ष है और पेशे से किराना व्यापारी हैं। अभिनय का शौक इस कद्र है कि वह रामलीला में जामवंत, अक्षय कुमार और राजा जनक का किरदार भी निभाते हैं। इसके अलावा रामलीला से पूर्व वह कलाकारों को मंचन का अभ्यास कराने में सहयोग करते हैं। वह बताते हैं कि रामलीला के 14 दिनों में वह नियमित सहयोग करते हैं। दुकान के लिए भी समय निकालते हैं। वह कहते हैं दोनों ही कार्य आवश्यक हैं। जिम्मेदारी तो निभानी ही पड़ेगी।
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40 वर्ष से कर रहे है अभिनय
रावण का अभिनय करने वाले सत्यपाल सिंह यादव करीब 40 वर्ष से रामलीला में विभिन्न अभिनय कर रहे हैं। उनकी उम्र करीब 56 वर्ष है और बेसिक शिक्षा विभाग में अध्यापक हैं। शुरुआती समय में उन्होंने छोटे-छोटे अभियन से मंचन की शुरुआत की। अभी तक वह मेघनाद, अंगद, बाणासुर और दशरथ का अभिनय भी कर चुके हैं। वह अपने पैतृक गांव न्यौरा में कलाकारों का निर्देशन भी करते हैं। इसके साथ ही रजपुरा की रामलीला में वह रावण के साथ ही राजा दशरथ का अभिनय करते हैं। उनके शौक ने उन्हें रामलीला का ऑल राउंडर कलाकार बना दिया। वह कहते है कि स्कूल के बाद वह रामलीला के लिए समय निकालते हैं। इसके लिए उन्हें बस थोड़ी सी दिनचर्या बदलनी पड़ती है।
अक्षय के किरदार से की अभिनय की शुरुआत
बोबेश राघव ने अभिनय की शुरुआत अक्षय कुमार के किरदार में दो साल पहले की थी। उन्हें बचपन से ही रामलीला में अभिनय करने का शौक था। बेहतर मंच प्रदर्शन करने पर कमेटी ने उन्हें मेघनाद के अभिनय की जिम्मेदारी दी। उन्होंने बखूबी अपनी जिम्मेदारी को निभाया। बोबेश अस्पताल रोड पर एक छोटी से किराना की दुकान चलाते हैं। दिनभर वह दुकान पर रहते हैं। रात को वह रामलीला में मेघनाद का अभियन करते हैं। वह कहते है कि एक बार अयोध्या और दिल्ली में होने वाली रामलीला में मेघनाद का अभियन करने की तमन्ना है।
बचपन से ही रामलीला का है शौक
पंकज गोयल रामलीला में सर्वाधिक अभिनय करने वाले कलाकार हैं। बीते 22 वर्ष से वह रामलीला में देवर्षि नारद, शरभंग ऋषि, शबरी, मामा मरीच व कालनेमि का किरदार निभा रहे हैं। वह कस्बे के बड़े दवा विक्रेता हैं। पूरे दिन वह मेडिकल स्टोर पर रहते हैं। शाम को रामलीला में अपनी सहभागिता निभाने पहुंच जाते हैं। वह कहते हैं कि बचपन से ही उन्हें रामलीला में जाने का शौक था। बड़े बुजुर्गों को देख कर उनका मन भी अभिनय करने का करता था। मौका मिला तो शुरुआत देवर्षि नारद के अभिनय से हुई। इसके बाद उन्होंने कई अभिनय किए। वह कहते है कि रामलीला में सहयोग करना सबसे बड़ी पूजा है।
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रजपुरा कस्बे में इस बार 124वां रामलीला महोत्सव चल रहा है। ये क्षेत्र की सबसे प्राचीन रामलीला में से एक है। यहां आसपास के दर्जनों गांवों से हजारों की संख्या में लोग रामलीला का मंचन देखने आते हैं। मंचन में बच्चों को शिक्षा देने वाले सत्यपाल सिंह यादव अध्यापक जहां रावण बने है। वहीं लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले गोविंद वार्ष्णेय किराना व्यापारी हैं।
अभिनय करने वाले कलाकार बड़े ही सुंदर ढंग से मंचन प्रदर्शित करते हैं। यही वजह है कि रजपुरा में बाहर की रामलीला कंपनी को कम ही बुलाया जाता है। यहां अभिनय करने वाले ये कलाकार दिनभर अपने व्यवसाय में लगे रहते हैं। इनमें कुछ नौकरीपेशा भी हैं। वहीं शाम को सभी रामलीला में अभिनय करने पहुंच जाते है। इनमें कोई मेडिकल संचालक है, तो कोई अध्यापक है। किसी का व्यापार है, तो कोई दुकान चलाता है। बड़ी बात यह है कि सभी निस्वार्थ भाव से रामलीला में अपना सहयोग करते हैं। शौक ऐसा है कई कलाकार 20-20 साल से रामलीला में अभिनय कर रहे हैं।
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15 वर्ष से कर रहे है लक्ष्मण का अभिनय
गोविंद वार्ष्णेय 15 वर्ष से लक्ष्मण का अभिनय कर रहे हैं। उनकी उम्र 44 वर्ष है और पेशे से किराना व्यापारी हैं। अभिनय का शौक इस कद्र है कि वह रामलीला में जामवंत, अक्षय कुमार और राजा जनक का किरदार भी निभाते हैं। इसके अलावा रामलीला से पूर्व वह कलाकारों को मंचन का अभ्यास कराने में सहयोग करते हैं। वह बताते हैं कि रामलीला के 14 दिनों में वह नियमित सहयोग करते हैं। दुकान के लिए भी समय निकालते हैं। वह कहते हैं दोनों ही कार्य आवश्यक हैं। जिम्मेदारी तो निभानी ही पड़ेगी।
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40 वर्ष से कर रहे है अभिनय
रावण का अभिनय करने वाले सत्यपाल सिंह यादव करीब 40 वर्ष से रामलीला में विभिन्न अभिनय कर रहे हैं। उनकी उम्र करीब 56 वर्ष है और बेसिक शिक्षा विभाग में अध्यापक हैं। शुरुआती समय में उन्होंने छोटे-छोटे अभियन से मंचन की शुरुआत की। अभी तक वह मेघनाद, अंगद, बाणासुर और दशरथ का अभिनय भी कर चुके हैं। वह अपने पैतृक गांव न्यौरा में कलाकारों का निर्देशन भी करते हैं। इसके साथ ही रजपुरा की रामलीला में वह रावण के साथ ही राजा दशरथ का अभिनय करते हैं। उनके शौक ने उन्हें रामलीला का ऑल राउंडर कलाकार बना दिया। वह कहते है कि स्कूल के बाद वह रामलीला के लिए समय निकालते हैं। इसके लिए उन्हें बस थोड़ी सी दिनचर्या बदलनी पड़ती है।
अक्षय के किरदार से की अभिनय की शुरुआत
बोबेश राघव ने अभिनय की शुरुआत अक्षय कुमार के किरदार में दो साल पहले की थी। उन्हें बचपन से ही रामलीला में अभिनय करने का शौक था। बेहतर मंच प्रदर्शन करने पर कमेटी ने उन्हें मेघनाद के अभिनय की जिम्मेदारी दी। उन्होंने बखूबी अपनी जिम्मेदारी को निभाया। बोबेश अस्पताल रोड पर एक छोटी से किराना की दुकान चलाते हैं। दिनभर वह दुकान पर रहते हैं। रात को वह रामलीला में मेघनाद का अभियन करते हैं। वह कहते है कि एक बार अयोध्या और दिल्ली में होने वाली रामलीला में मेघनाद का अभियन करने की तमन्ना है।
बचपन से ही रामलीला का है शौक
पंकज गोयल रामलीला में सर्वाधिक अभिनय करने वाले कलाकार हैं। बीते 22 वर्ष से वह रामलीला में देवर्षि नारद, शरभंग ऋषि, शबरी, मामा मरीच व कालनेमि का किरदार निभा रहे हैं। वह कस्बे के बड़े दवा विक्रेता हैं। पूरे दिन वह मेडिकल स्टोर पर रहते हैं। शाम को रामलीला में अपनी सहभागिता निभाने पहुंच जाते हैं। वह कहते हैं कि बचपन से ही उन्हें रामलीला में जाने का शौक था। बड़े बुजुर्गों को देख कर उनका मन भी अभिनय करने का करता था। मौका मिला तो शुरुआत देवर्षि नारद के अभिनय से हुई। इसके बाद उन्होंने कई अभिनय किए। वह कहते है कि रामलीला में सहयोग करना सबसे बड़ी पूजा है।