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रमजान और कुरान शाफाअत करेंगे रोजेदार की कयामत के दिन
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चंदौसी/ जनेटा। रमजान उल मुबारक का महीना तमाम महीनों में सबसे अफजल और अजमत वाला महीना है। इसकी अजमत का बयान कुरान और हदीस में कसरत से आया है। इसकी अहमियत का अंदाजा लगाना इंसानी अक्ल से बाहर है। यह मुकद्दस महीना सरासर रहमत और बरकतों से भरा हुआ है। इसका हर लम्हा अल्लाह के फजल और इनायत से मुनव्वर है। रोजेदारों पर हर घड़ी अल्लाह के इनाम की बारिश होती है।
यह कहना है ग्राम मोहम्मद गंज निवासी जनेटा की करामत वाली मस्जिद के हाफिज मोहम्मद जावेद का उन्होंने रमजान के हवाले से बताया कि हजरत सलमान फारसी रजी रिवायत करते हैं कि हमारे प्यारे नबी ने शाबान महीने के आखरी दिन ऐलान फरमाया कि ए लोगों तुम्हारे पास अजमत और बरकत वाला महीना आया है। यह वह महीना है कि जिसमें एक रात हजार महीनों से भी ज्यादा अफजल है। अल्लाह पाक ने तुम पर इस मुबारक महीने के रोजे रखना फर्ज किए हैं। इस महीने की इज्जत और ऐहतराम करना लाजमी करार दिया गया है। रोजा अल्लाह को सबसे अधिक महबूब है। अल्लाह रोजेदार को रोजे का बदला खुद अता करेगा। हदीस में आया है कि जब कयामत के दिन अल्लाह मीजान कायम करेगा और हिसाब किताब लिया जाएगा। उस दिन इंसानों को उनके किए हुए आमाल यानी जो अच्छे बुरे कर्म दुनिया में किए थे का बदला जन्नत और दोजख के रूप में अता किया जाएगा। अगर इंसान के गुनाह अधिक होंगे और वह अपने गुनाहों की वजह से दोजख में डाला जा रहा होगा तो उस वक्त रोजा और कुरान अल्लाह से रोजेदारों की सिफारिश करेंगे। रमजान कहेगा अल्लाह इसके गुनाह को बख्श दे मैंने इसे दिन में खाने से रोके रखा था। और कुरान अर्ज करेगा कि या रब्बे करीम मैंने तेरे बंदे को तिलावत और तरावीह के जरिए रात में सोने से रोके रखा था। इसने सिर्फ तेरी मोहब्बत और रजा की खातिर यह तकलीफ उठाई थी। अल्लाह इसको माफ फरमा दे और हमारी सिफारिश को कबूल फरमा ले। अल्लाह उस वक्त रमजान और कुरान की सिफारिश को कबूल फरमाकर रोजेदार की मगफिरत फरमा देगा और उसे जन्नत अता फरमायेगा।
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यह कहना है ग्राम मोहम्मद गंज निवासी जनेटा की करामत वाली मस्जिद के हाफिज मोहम्मद जावेद का उन्होंने रमजान के हवाले से बताया कि हजरत सलमान फारसी रजी रिवायत करते हैं कि हमारे प्यारे नबी ने शाबान महीने के आखरी दिन ऐलान फरमाया कि ए लोगों तुम्हारे पास अजमत और बरकत वाला महीना आया है। यह वह महीना है कि जिसमें एक रात हजार महीनों से भी ज्यादा अफजल है। अल्लाह पाक ने तुम पर इस मुबारक महीने के रोजे रखना फर्ज किए हैं। इस महीने की इज्जत और ऐहतराम करना लाजमी करार दिया गया है। रोजा अल्लाह को सबसे अधिक महबूब है। अल्लाह रोजेदार को रोजे का बदला खुद अता करेगा। हदीस में आया है कि जब कयामत के दिन अल्लाह मीजान कायम करेगा और हिसाब किताब लिया जाएगा। उस दिन इंसानों को उनके किए हुए आमाल यानी जो अच्छे बुरे कर्म दुनिया में किए थे का बदला जन्नत और दोजख के रूप में अता किया जाएगा। अगर इंसान के गुनाह अधिक होंगे और वह अपने गुनाहों की वजह से दोजख में डाला जा रहा होगा तो उस वक्त रोजा और कुरान अल्लाह से रोजेदारों की सिफारिश करेंगे। रमजान कहेगा अल्लाह इसके गुनाह को बख्श दे मैंने इसे दिन में खाने से रोके रखा था। और कुरान अर्ज करेगा कि या रब्बे करीम मैंने तेरे बंदे को तिलावत और तरावीह के जरिए रात में सोने से रोके रखा था। इसने सिर्फ तेरी मोहब्बत और रजा की खातिर यह तकलीफ उठाई थी। अल्लाह इसको माफ फरमा दे और हमारी सिफारिश को कबूल फरमा ले। अल्लाह उस वक्त रमजान और कुरान की सिफारिश को कबूल फरमाकर रोजेदार की मगफिरत फरमा देगा और उसे जन्नत अता फरमायेगा।
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