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किसानों पर आफत बनकर टूटी बारिश

Tue, 25 Sep 2018 01:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ संभल
अमर उजाला ब्यूरो/ संभल Updated Tue, 25 Sep 2018 01:33 AM IST
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rain creates broblam
ंभल के जालव सराय में धान के खेत में भरा बरसात का पानी। - फोटो : amar ujala

संभल/बबराला। जिले में दो दिन से हो रही बारिश और तेज हवाओं ने बाजरा, गन्ना और धान की फसलों को बर्बाद किया है। राहत देने वाली बारिश आफत बनकर टूटी है। किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें छाने लगी हैं। जहां जमींदोज हुई बाजरा और धान की फसल की पैदावार पर विपरीत असर पड़ेगा तो गन्ने की फसल के नुकसान का खामियाजा भी किसान को परेशान करेगा। किसानों के लिए अब सरकार की फसल बीमा योजना के लाभ ही एक मात्र सहारा बन सकती है।       

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जिले के तीनों तहसीलों में शनिवार से ही रुक-रुक कर बारिश हो रही है। कभी दिन में तो कभी रात में बारिश के बाद चल रही तेज हवाओं ने प्रमुख फसल बाजरा और गन्ना के अलावा धान को भी जमींदोज कर दिया है। बारिश की तेज बौछारों से बाजरा की फसल जमीन पर बिछ गई है। गुन्नौर तहसील के तीनों ब्लॉकों में इस दैवीय आपदा से किसान कराह उठे हैं जिनके  संपूर्ण खेत  की फसल जमींदोज हो गई है। 
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जहां सबसे अधिक नुकसान गन्ना और बाजरा की फसल को है। किसानों की मानें तो इस समय बाजरा की फसल गिरने से उस की पैदावार पर असर पड़ेगा जिसमें अनाज तो निकलेगा ही नहीं साथ ही पशुओं का चारा भी और बारिश होने के बाद सड़ जाएगा।
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 जबकि गन्ना की फसल मुड़ने के कारण शुगर मिल वाले रिजेक्ट कर देंगे। अगर बारिश का सिलसिला ऐसे ही जारी रहा तो जमींदोज हुई धान की फसल जमीन पर ही सड़ जाएगी। संभल के लखौरी क्षेत्र में 24 घंटे में रुक-रुक कर हुई बारिश के दौरान धान के कई खेत डूब गए। किसानों को भारी नुकसान हुआ है। इससे किसान निराश हैं। उधर, जुनावई प्रतिनिधि के अनुसार गुन्नौर क्षेत्र में बरसात के बीच चली आंधी से घरों में पड़ी टीन की चादरें एवं छप्पर उसके साथ पचास फीट तक ऊपर उड़ते देखे गए।  गुन्नौर क्षेत्र में रविवार को देर रात तेज आंधी चली। बरसात के बीच लोग अपने घरों में थे लेकिन आंधी इतनी तेज थी कि मेंगर गांव निवासी गुलशन सिंह ने बताया कि शाम के पांच बजे करीब आकाश और जमीन से धुंध भरी आंधी आई। जिसके साथ मथुरा प्रसाद की छत की टीन चादरें एवं छप्पर, मोहर सिंह की टीन चादरें, ओमप्रकाश टीन की चादरें एवं घर में रखा संदूक गुलशन की टीन चादरें सहित अन्य लोगों के छप्पर उड़ गए।  

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