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Sambhal News: आरटीई योजना पर सवाल, 12 गरीब बच्चों को नहीं मिला दाखिला
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रजपुरा। कस्बा स्थित कायनात ग्लोरियस पब्लिक स्कूल प्रबंधन ने आरटीई की द्वितीय चरण की सूची चयनित 12 बच्चों को दाखिला देने से इन्कार कर दिया है। शिकायत पर बीएसए ने स्कूल को अल्पसंख्यक संस्थान बताकर पल्ला झाड़ लिया और दूसरे स्कूल में पढ़ाने का दबाव बनाया।
सत्र 2026-27 के लिए आरटीई की द्वितीय चरण की सूची में रजपुरा निवासी अमन कुमार, सतेंद्र कुमार, वाहिद समेत 12 गरीब परिवारों के बच्चों का चयन हुआ था। चयन के बाद अभिभावकों ने मार्च 2026 में सभी मूल दस्तावेज स्कूल में जमा करा दिए। आरोप है कि इसके बावजूद स्कूल प्रबंधन ने तानाशाही रवैया अपनाते हुए पात्र बच्चों को दाखिला देने से साफ इन्कार कर दिया, जबकि एसडीएम व जांच समिति की प्रशासनिक जांच और बीईओ रजपुरा की रिपोर्ट में सभी 12 बच्चों को आरटीई के तहत पूरी तरह पात्र पाया गया है। इसके बावजूद स्कूल द्वारा दाखिला नहीं दिया गया।
हद तो तब हो गई जब पीड़ित अभिभावक न्याय की गुहार लेकर बीएसए कार्यालय पहुंचे। अभिभावकों का आरोप है कि बीएसए ने इस पर कार्रवाई करने के बजाय संबंधित स्कूल को अल्पसंख्यक संस्थान (माइनॉरिटी) बताकर अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश की और बच्चों को किसी अन्य स्कूल में पढ़ाई करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। बहरहाल, प्रशासनिक मिलीभगत के चलते गरीब अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला कराने के लिए अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। इस संबंध में बीएसए अलका शर्मा ने कहा कि कुछ अभिभावकों की शिकायत मिली है, उन्हें शीघ्र ही बुलाकर समस्या का समाधान कराया जाएगा।
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सत्र 2026-27 के लिए आरटीई की द्वितीय चरण की सूची में रजपुरा निवासी अमन कुमार, सतेंद्र कुमार, वाहिद समेत 12 गरीब परिवारों के बच्चों का चयन हुआ था। चयन के बाद अभिभावकों ने मार्च 2026 में सभी मूल दस्तावेज स्कूल में जमा करा दिए। आरोप है कि इसके बावजूद स्कूल प्रबंधन ने तानाशाही रवैया अपनाते हुए पात्र बच्चों को दाखिला देने से साफ इन्कार कर दिया, जबकि एसडीएम व जांच समिति की प्रशासनिक जांच और बीईओ रजपुरा की रिपोर्ट में सभी 12 बच्चों को आरटीई के तहत पूरी तरह पात्र पाया गया है। इसके बावजूद स्कूल द्वारा दाखिला नहीं दिया गया।
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हद तो तब हो गई जब पीड़ित अभिभावक न्याय की गुहार लेकर बीएसए कार्यालय पहुंचे। अभिभावकों का आरोप है कि बीएसए ने इस पर कार्रवाई करने के बजाय संबंधित स्कूल को अल्पसंख्यक संस्थान (माइनॉरिटी) बताकर अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश की और बच्चों को किसी अन्य स्कूल में पढ़ाई करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। बहरहाल, प्रशासनिक मिलीभगत के चलते गरीब अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला कराने के लिए अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। इस संबंध में बीएसए अलका शर्मा ने कहा कि कुछ अभिभावकों की शिकायत मिली है, उन्हें शीघ्र ही बुलाकर समस्या का समाधान कराया जाएगा।
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