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बिना लाइसेंस के जहरीला धुआं उगल रही ईंट भट्ठा-कोलहुओं की चिमनियां
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चंदौसी के कुढ़ फतेहगढ़ क्षेत्र में धुआं उगलती ईंट भट्ठे की चिमनी।
- फोटो : CHANDAUSI
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चंदौसी। सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार के बाद केंद्र व प्रदेश सरकार प्रदूषण पर रोक के लिए तमाम प्रयास कर रही है। लेकिन भट्ठा संचालक नियमों को ताक पर कर हवा जहर घोलने का काम कर रहे हैं। कुढ़ फतेहगढ़ क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक ईट भट्ठे हैं, जो बिना रायल्टी जमा किए ही संचालित किए जा रहे हैं। कई पर प्रतिबंध भी लगाया जा चुका है। इसके अलावा कई कोल्हू बिना लाइसेंस संचालित किए जा रहे हैं।
चंदौसी तहसील क्षेत्र के कुढ़ फतेहगढ़ क्षेत्र व बनियाठेर थाना क्षेत्रों में किसानों के पराली जलाने पर तो एफआईआर दर्ज कराई जा रही है लेकिन सरेआम बिना लाइसेंस के संचालित हो रहे कोल्हू व बिना ईंट भट्ठों पर जिला प्रशासन व पुलिस का ध्यान नहीं है। ईंट भट्ठा संचालक व कोल्हू सरेआम पर्यावरण प्रदूषण को रोकने संबंधी आदेशों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार भट्ठा चलाने का समय फरवरी से शुरू होता है तथा बिना रायल्टी जमा किए मिट्टी का खनन भी नहीं होता है। परंतु खनन अधिकारियों व पुलिस की साठगांठ से अवैध खनन का धंधा भी जोरों से फल-फूल रहा है और भट्ठों की चिमनियां हवा में जहर भी घोल रही हैं।
कुढफतेहगढ़ क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक ईट भट्ठें हैं, जिनमें से सात भट्ठों पर ईट पकाने का कार्य शुरू हो गया है। संचालकों द्वारा भट्ठों में कोयला की जगह प्लास्टिक पेंट का ई-कचरा तथा यूकेलिप्टस के पत्ते की कुट्टी जलाई जा रही है। जिससे जहरीला धुआ निकल रहा है। सराय ज्वालापुरी के ईंट भट्ठे पर खनन कर रही जेसीबी को खनन अधिकारी ने सीज किया था। संचालक के खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई भी की गई।
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मुड़िया खेड़ा में खनन अधिकारी सुरेश लाकड़ा ने 16 अक्तूबर को सात ईंट भट्ठो पर चल रहे खनन व ईंट बनाने के कार्य पर रोक लगाई गई, लेकिन एक भी भट्ठे पर कोई कार्य नहीं रुका। 22 नवंबर को एक बार फिर खनन अधिकारी ने ईट भट्ठो का निरीक्षण किया। जिनमें चार भट्ठों के खिलाफ थाना कुढ़फतेहगढ़ में मुकदमा दर्ज कराया गया। लेकिन भट्ठे फिर भी नहीं रुके। सवाल यह उठता है कि किसान अपने खेतों में धान की पराली या फसल के बचे अवशेष कूड़ा करकट को जलाता है तो उस पर सेटेलाइट के माध्यम से कार्रवाई होती है लेकिन इन ईट भट्ठों व कोल्हुओं के प्रदूषण को सेटेलाइट क्यों कबर नहीं कर रहा है। एक गांव में दर्जनों कोल्हू संचालित हैं, जिसमें कई के पास लाइसेंस नहीं हैं।
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चंदौसी तहसील क्षेत्र के कुढ़ फतेहगढ़ क्षेत्र व बनियाठेर थाना क्षेत्रों में किसानों के पराली जलाने पर तो एफआईआर दर्ज कराई जा रही है लेकिन सरेआम बिना लाइसेंस के संचालित हो रहे कोल्हू व बिना ईंट भट्ठों पर जिला प्रशासन व पुलिस का ध्यान नहीं है। ईंट भट्ठा संचालक व कोल्हू सरेआम पर्यावरण प्रदूषण को रोकने संबंधी आदेशों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार भट्ठा चलाने का समय फरवरी से शुरू होता है तथा बिना रायल्टी जमा किए मिट्टी का खनन भी नहीं होता है। परंतु खनन अधिकारियों व पुलिस की साठगांठ से अवैध खनन का धंधा भी जोरों से फल-फूल रहा है और भट्ठों की चिमनियां हवा में जहर भी घोल रही हैं।
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कुढफतेहगढ़ क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक ईट भट्ठें हैं, जिनमें से सात भट्ठों पर ईट पकाने का कार्य शुरू हो गया है। संचालकों द्वारा भट्ठों में कोयला की जगह प्लास्टिक पेंट का ई-कचरा तथा यूकेलिप्टस के पत्ते की कुट्टी जलाई जा रही है। जिससे जहरीला धुआ निकल रहा है। सराय ज्वालापुरी के ईंट भट्ठे पर खनन कर रही जेसीबी को खनन अधिकारी ने सीज किया था। संचालक के खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई भी की गई।
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मुड़िया खेड़ा में खनन अधिकारी सुरेश लाकड़ा ने 16 अक्तूबर को सात ईंट भट्ठो पर चल रहे खनन व ईंट बनाने के कार्य पर रोक लगाई गई, लेकिन एक भी भट्ठे पर कोई कार्य नहीं रुका। 22 नवंबर को एक बार फिर खनन अधिकारी ने ईट भट्ठो का निरीक्षण किया। जिनमें चार भट्ठों के खिलाफ थाना कुढ़फतेहगढ़ में मुकदमा दर्ज कराया गया। लेकिन भट्ठे फिर भी नहीं रुके। सवाल यह उठता है कि किसान अपने खेतों में धान की पराली या फसल के बचे अवशेष कूड़ा करकट को जलाता है तो उस पर सेटेलाइट के माध्यम से कार्रवाई होती है लेकिन इन ईट भट्ठों व कोल्हुओं के प्रदूषण को सेटेलाइट क्यों कबर नहीं कर रहा है। एक गांव में दर्जनों कोल्हू संचालित हैं, जिसमें कई के पास लाइसेंस नहीं हैं।