{"_id":"572ba3bc4f1c1b44735cd48a","slug":"palm-tree","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिल्ली-मुंबई में होटलों को सजा-संवार रहे संभल के खजूर के पेड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिल्ली-मुंबई में होटलों को सजा-संवार रहे संभल के खजूर के पेड़
हिमांशु शर्मा/संभल
Updated Fri, 06 May 2016 01:19 AM IST
विज्ञापन
खजूर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े महानगरों के प्रतिष्ठित होटलों में संभल के खजूर के पेड़ शोभा बढ़ा रहे हैं। यही नहीं बड़े-बड़े बंगलों और कोठियों के लिए भी इन पेड़ों की मांग आती रहती है। न पौध लगाने की झंझट न उसके बड़े होने का इंतजार। बस पेड़ मंगवाया और लगा दिया।
यही सहूलियत होेटलों और रईसों को संभल की ओर आकर्षित कर रही है। संभल जिले के बिलालपत में खजूर के पेड़ तैयार किए जा रहे हैं। नर्सरी में इन्हें तैयार किया जाता है। खजूर के पेड़ जब पांच, दस, पंद्रह और बीस फुट तक लंबे हो जाते हैं तब उनकी बिक्री की जाती है।
ऐसे पेड़ जड़ समेत उखाड़कर बड़े वाहनों से दूसरे शहरों को भेजे जाते हैं। नर्सरी में ही पांच से दस वर्ष की अवधि पेड़ 20 से 30 फुट तक लंबे हो जाते हैं। पेड़ों को सुरक्षित उखाड़ने के लिए जेसीबी और क्रेन का इस्तेमाल किया जाता है।
विज्ञापन
बिलालपत गांव में कई किसानों ने खजूर की नर्सरी तैयार कर रखी हैं। नर्सरी पेड़ों की परवरिश करने और उन्हें बेचने लायक तैयार करने में किसान बड़ा ध्यान देते हैं। पेड़ों को पानी देने के लिए बोरिंग कराए गए हैं। उनकी प्रॉपर देखरेख की जाती है। जब यह पेड़ बड़े हो जाते हैं तब इन्हें मुंबई समेत कई बड़े शहरों में भेजा जाता है। वहां पर पेड़ों को दोबारा से लगाया जाता है। हाईवे के किनारे बनने वाले नए होटलों और बैंक्वेट हालों के परिसर में भी इन पेड़ों की डिमांड है। पांच से दस फीट के पेड़ की कीमत लगभग 35 सौ रुपये आती है।
सोत नदी के किनारे सैकड़ों पेड़ हुआ करते थे। इन्हें चोरी छुपे लोगों ने बेच दिया। बड़े शहरों में यह पेड़ सबसे पहले लगे। जब इन पेड़ों की डिमांड आई तो किसी के दिमाग में पेड़ तैयार करने के लिए नर्सरी लगाए जाने का विचार आया और इसके बाद एक नए कारोबार की शुरूआत हुई। सोत नदी के किनारे लगभग सभी खजूर के पेड़ खत्म हो गए हैं लेकिन कई किसानों ने बिजनेस के लिए खजूर के पेड़ की नर्सरी तैयार कर ली है।
विज्ञापन
यही सहूलियत होेटलों और रईसों को संभल की ओर आकर्षित कर रही है। संभल जिले के बिलालपत में खजूर के पेड़ तैयार किए जा रहे हैं। नर्सरी में इन्हें तैयार किया जाता है। खजूर के पेड़ जब पांच, दस, पंद्रह और बीस फुट तक लंबे हो जाते हैं तब उनकी बिक्री की जाती है।
विज्ञापन
ऐसे पेड़ जड़ समेत उखाड़कर बड़े वाहनों से दूसरे शहरों को भेजे जाते हैं। नर्सरी में ही पांच से दस वर्ष की अवधि पेड़ 20 से 30 फुट तक लंबे हो जाते हैं। पेड़ों को सुरक्षित उखाड़ने के लिए जेसीबी और क्रेन का इस्तेमाल किया जाता है।
विज्ञापन
बिलालपत गांव में कई किसानों ने खजूर की नर्सरी तैयार कर रखी हैं। नर्सरी पेड़ों की परवरिश करने और उन्हें बेचने लायक तैयार करने में किसान बड़ा ध्यान देते हैं। पेड़ों को पानी देने के लिए बोरिंग कराए गए हैं। उनकी प्रॉपर देखरेख की जाती है। जब यह पेड़ बड़े हो जाते हैं तब इन्हें मुंबई समेत कई बड़े शहरों में भेजा जाता है। वहां पर पेड़ों को दोबारा से लगाया जाता है। हाईवे के किनारे बनने वाले नए होटलों और बैंक्वेट हालों के परिसर में भी इन पेड़ों की डिमांड है। पांच से दस फीट के पेड़ की कीमत लगभग 35 सौ रुपये आती है।
सोत नदी के किनारे सैकड़ों पेड़ हुआ करते थे। इन्हें चोरी छुपे लोगों ने बेच दिया। बड़े शहरों में यह पेड़ सबसे पहले लगे। जब इन पेड़ों की डिमांड आई तो किसी के दिमाग में पेड़ तैयार करने के लिए नर्सरी लगाए जाने का विचार आया और इसके बाद एक नए कारोबार की शुरूआत हुई। सोत नदी के किनारे लगभग सभी खजूर के पेड़ खत्म हो गए हैं लेकिन कई किसानों ने बिजनेस के लिए खजूर के पेड़ की नर्सरी तैयार कर ली है।