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Sambhal News: भक्तों ने मंदिर और आश्रम में गुरुओं का लिया आशीर्वाद
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संभल। गुरु पूर्णिमा पर्व जिलेभर में धूमधाम से मनाया गया। भक्तों ने मंदिर और आश्रम में आकर गुरुओं का आशीर्वाद लिया। मंदिर और आश्रम में गुरु पूजन किया गया और कीर्तन और प्रवचन के बीच में गुरु पूजे गए। कहा गया कि सनातन धर्म और संस्कृति में गुरु का महत्वपूर्ण स्थान है। इसलिए गुरु के बिना अज्ञानता के अंधकार को दूर कर पाना असंभव माना गया है। गांव मोलनपुर डांडा स्थित श्री हरिबाबा बांध धाम पर चल रहे सात दिवसीय गुरु पूजा महोत्सव के अंतिम दिन बृहस्पतिवार की सुबह तीन बजे हरिपूजन के लिए कपाट खोल दिए गए। हजारों की संख्या में पहुंचे भक्तों ने पहले गंगा स्नान किया और उसके बाद श्री हरिबाबा की प्रतिमा के दर्शन किए। जीवन में सुख समृद्धि की कामना के साथ भोग लगाया।
मंदिर परिसर में पंडित दिनेश मोहन शास्त्री और पंडित प्रवीन भारद्वाज ने भजन सुनाकर गुरु पूजा महोत्सव में समा बांध दिया। शीशे को हीरा बनाया मेहरबानी आपकी और ये चमक ये दमक, यह गुलवन की महक सब कुछ सरकार तुम्हारा है पर श्रद्धालु झूम उठे।
इस दौरान बिशंभर पाठक, अजय कुमार सिंह, राजेंद्र यादव, डॉ. दिनेश गोस्वामी, गौरव अग्रवाल आदि रहे। दूसरी ओर, संतोषपुरी संन्यास आश्रम अट्टा अतौरा, महोरा लखुपुरा आदि में पूजन किया गया।
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गुरु बिना जीवन का कल्याण नहीं
संभल। श्री हरिबाबा बांध धाम पर गुरु पूजा का मर्म बताते हुए कथाव्यास दीपक कृष्ण उपाध्याय ने कहा कि गुरु पूजा की परंपरा प्राचीनकाल से है। गुरु के बिना अंधकार को दूर कर पाना असंभव मनाया गया है। गुरु हमारे जीवन का कल्याण करते हैं। उनके बिना कल्याण मुश्किल है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की पूजा नहीं, इसमें व्यास रूपी गुरु की पूजा की जानी चाहिए। अनादिकाल से चली आ रही गुरु पूजा की परंपरा को व्यक्ति पैसा, सत्ता या संपन्नता से नहीं हासिल कर सकता है। व्यक्ति जबसे भगवान बनने की चेष्टा के साथ अपनी पूजा कराना शुरू किया है, तब से उनका अनिष्ट होता आया है। कहा कि जिस पल व्यक्ति भगवान बनने की चाह में ऐसे कृत्यों को करता है, उसी पल उसका पतन निश्चित होने लगता है। संवाद
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मंदिर परिसर में पंडित दिनेश मोहन शास्त्री और पंडित प्रवीन भारद्वाज ने भजन सुनाकर गुरु पूजा महोत्सव में समा बांध दिया। शीशे को हीरा बनाया मेहरबानी आपकी और ये चमक ये दमक, यह गुलवन की महक सब कुछ सरकार तुम्हारा है पर श्रद्धालु झूम उठे।
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इस दौरान बिशंभर पाठक, अजय कुमार सिंह, राजेंद्र यादव, डॉ. दिनेश गोस्वामी, गौरव अग्रवाल आदि रहे। दूसरी ओर, संतोषपुरी संन्यास आश्रम अट्टा अतौरा, महोरा लखुपुरा आदि में पूजन किया गया।
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गुरु बिना जीवन का कल्याण नहीं
संभल। श्री हरिबाबा बांध धाम पर गुरु पूजा का मर्म बताते हुए कथाव्यास दीपक कृष्ण उपाध्याय ने कहा कि गुरु पूजा की परंपरा प्राचीनकाल से है। गुरु के बिना अंधकार को दूर कर पाना असंभव मनाया गया है। गुरु हमारे जीवन का कल्याण करते हैं। उनके बिना कल्याण मुश्किल है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की पूजा नहीं, इसमें व्यास रूपी गुरु की पूजा की जानी चाहिए। अनादिकाल से चली आ रही गुरु पूजा की परंपरा को व्यक्ति पैसा, सत्ता या संपन्नता से नहीं हासिल कर सकता है। व्यक्ति जबसे भगवान बनने की चेष्टा के साथ अपनी पूजा कराना शुरू किया है, तब से उनका अनिष्ट होता आया है। कहा कि जिस पल व्यक्ति भगवान बनने की चाह में ऐसे कृत्यों को करता है, उसी पल उसका पतन निश्चित होने लगता है। संवाद