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भाजपा सांसद सत्यपाल सैनी के खिलाफ दायर याचिकाएं खारिज
ब्यूरो/अमर उजाला संभल
Updated Sun, 17 Dec 2017 01:38 AM IST
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सत्यपाल सैनी
- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला संभल
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लोक सभा चुनाव 2014 में भाजपा के विजयी प्रत्याशी और मौजूदा संभल सांसद सत्यपाल सैनी के खिलाफ पूर्व सांसद डा.शफीकुर्रहमान बर्क और आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी की ओर से दायर की गई चुनौती याचिका को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया है।
लोकसभा 2014 के चुनाव तो मार्च में हुए थे। मतगणना मई-2014 को हुई थी। इसमें भाजपा प्रत्याशी सत्यपाल सैनी को विजयी घोषित किया गया था। इस चुनाव में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी डा.शफीकुर्रहमान बर्क थे। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी डॉ.शफीकुर्रहमान बर्क ने हाई कोर्ट इलाहाबाद में उनके चुनाव को चुनौती दी थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि भाजपा प्रत्याशी की जीत मतगणना में बेईमानी किए जाने से हुई थी। आग्रह के बावजूद रीकाउंटिंग नहीं कराई गई थी।
शनिवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डा.बर्क की ओर से दी गई चुनौती याचिका को खारिज कर दिया है। इसके अलावा आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी हुर मेहंदी बाकरी ने भी एक चुनौती याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनका नामांकन पत्र गलत तरीके से खारिज किया गया है, यदि उनका नामांकन खारिज नहीं किया गया होता तो उनकी जीत सुनिश्चित थी, वह संभल के सांसद होते। उच्च न्यायालय ने हुर मेहंदी बाकरी की भी चुनौती को खारिज कर दिया है।
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याचिकाएं मुझे परेशान करने की नीयत से डाली गई थीं। उच्च न्यायालय के फैसले से सत्य की जीत हुई है। इससे साबित हो गया है कि मुझे जनता ने पार्टी की नीतियों और मेरी शख्सियत को देखते जिताया था।
सत्यपाल सिंह सैनी, सांसद संभल
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लोकसभा 2014 के चुनाव तो मार्च में हुए थे। मतगणना मई-2014 को हुई थी। इसमें भाजपा प्रत्याशी सत्यपाल सैनी को विजयी घोषित किया गया था। इस चुनाव में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी डा.शफीकुर्रहमान बर्क थे। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी डॉ.शफीकुर्रहमान बर्क ने हाई कोर्ट इलाहाबाद में उनके चुनाव को चुनौती दी थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि भाजपा प्रत्याशी की जीत मतगणना में बेईमानी किए जाने से हुई थी। आग्रह के बावजूद रीकाउंटिंग नहीं कराई गई थी।
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शनिवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डा.बर्क की ओर से दी गई चुनौती याचिका को खारिज कर दिया है। इसके अलावा आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी हुर मेहंदी बाकरी ने भी एक चुनौती याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनका नामांकन पत्र गलत तरीके से खारिज किया गया है, यदि उनका नामांकन खारिज नहीं किया गया होता तो उनकी जीत सुनिश्चित थी, वह संभल के सांसद होते। उच्च न्यायालय ने हुर मेहंदी बाकरी की भी चुनौती को खारिज कर दिया है।
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याचिकाएं मुझे परेशान करने की नीयत से डाली गई थीं। उच्च न्यायालय के फैसले से सत्य की जीत हुई है। इससे साबित हो गया है कि मुझे जनता ने पार्टी की नीतियों और मेरी शख्सियत को देखते जिताया था।
सत्यपाल सिंह सैनी, सांसद संभल