{"_id":"57cb2f464f1c1b64292cb03e","slug":"mela-ganesh-chauth-rathyatra","type":"story","status":"publish","title_hn":"उत्तर भारत में इकलौती है स्वचालित झांकियों वाली श्रीगणेश रथयात्रा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उत्तर भारत में इकलौती है स्वचालित झांकियों वाली श्रीगणेश रथयात्रा
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल
Updated Sun, 04 Sep 2016 01:45 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
बात आजादी से पहले की है। अंग्रेजी हुकूमत के आगे भारतीयों के सामने आजादी के आंदोलन सफल बनाने के लिए रणनीति बनाने और लोगों से संपर्क करने तक में मुश्किलें आ रही थीं। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने आजादी की लड़ाई के लिए रणनीति और संपर्क के लिए भगवान गणेश का सहारा लिया। गणेशोत्सव के बहाने वह लोगों से मिलकर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ खड़े होने के लिए संपर्क करते रहे।
एक तरफ गणेशोत्सव की धूम तो उत्साह और भीड़ के नजारे के पीछे आजादी की लड़ाई के लिए रणनीति चल रही थी। मुंबई में गणेशोत्सव की धूम आज भी खास मायने रखती है। चंदौसी में भी गणेश मेले के 55 वर्ष पूरे हो रहे हैं। यहां स्वचालित झांकियों के साथ निकलने वाली रथयात्रा उत्तर भारत का एकमात्र आकर्षण है। रथयात्रा पांच सितंबर को निकाली जाएगी।
स्वचालित झांकियों को तैयार करने के लिए नौकरी पेशा युवा रात में महीनों कई-कई घंटे काम करते हैं। झांकियां किसी कारीगर या फिर पेशेवर से नहीं बनवाई जाती हैं।-हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक मेले में मुस्लिम समाज भगवान गणेश को लड्डू का भोग लगाता है। वहीं, हिंदू समाज के लोग खान बाबा की मजार पर चादरपोशी करते हैं।
एक तरफ गणेशोत्सव की धूम तो उत्साह और भीड़ के नजारे के पीछे आजादी की लड़ाई के लिए रणनीति चल रही थी। मुंबई में गणेशोत्सव की धूम आज भी खास मायने रखती है। चंदौसी में भी गणेश मेले के 55 वर्ष पूरे हो रहे हैं। यहां स्वचालित झांकियों के साथ निकलने वाली रथयात्रा उत्तर भारत का एकमात्र आकर्षण है। रथयात्रा पांच सितंबर को निकाली जाएगी।
विज्ञापन
स्वचालित झांकियों को तैयार करने के लिए नौकरी पेशा युवा रात में महीनों कई-कई घंटे काम करते हैं। झांकियां किसी कारीगर या फिर पेशेवर से नहीं बनवाई जाती हैं।-हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक मेले में मुस्लिम समाज भगवान गणेश को लड्डू का भोग लगाता है। वहीं, हिंदू समाज के लोग खान बाबा की मजार पर चादरपोशी करते हैं।
विज्ञापन