{"_id":"57ba08c24f1c1b7273d4f83a","slug":"loss-in-mantha-industry","type":"story","status":"publish","title_hn":"विदेशी आर्डर घटने से मैंथा इंडस्ट्री को झटका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विदेशी आर्डर घटने से मैंथा इंडस्ट्री को झटका
ब्यूरो/अमर उजाला संभल
Updated Mon, 22 Aug 2016 01:39 AM IST
विज्ञापन
चंदौसी में मैंथा व्यापारी के प्रतिष्ठान पर छापेमारी करती एसआईबी की टीम।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारत में मैंथा आयल के दाम में तेजी के बाद चीन और यूरोप के साथ अमेरिका तक में खरीदारों ने नए आर्डर देने में सुस्ती दिखा दी है। विदेशों से आर्डर नहीं मिलने से भारतीय मैंथा इंडस्ट्री को झटका लगा है।
मैंथा का सीजन शुरू होने पर मई से जून तक विदेशी बायर्स ने काफी खरीदारी की है। जब तक मैंथा आयल का भाव 900 रुपये प्रति किलोग्राम था तब तक विदेशी बायर्स की खरीदारी होती रही। भाव में तेजी आने के साथ ही विदेशी खरीदारों में सबसे पहले चीन ने हाथ खींचा। इसके यूरोप और अमेरिका के खरीदार पीछे हटे। विदेशी बाजार में भारतीय इंडस्ट्री को माल के खरीदार नहीं मिल रहे हैं।
कारोबारी बताते हैं कि जून के बाद मैंथा इंडस्ट्री को विदेशी आर्डर न के बराबर ही मिले हैं। दिल्ली से प्रमुख निर्यातक हिमांशु अग्रवाल ने बताया कि भारत से निर्यात होने वाले कुल मैंथॉल प्रोडक्ट में 50 प्रतिशत माल अकेले चीन खरीदता है, लेकिन जून के बाद चीन के 10-12 बायर्स ने खरीद बंद कर दी है।
विज्ञापन
इसके चलते भारतीय बाजार में सुस्ती है। इससे निर्माण और प्रॉसिस करने वाली मैंथा इकाइयों में कामकाज प्रभावित है। भाव 900 रुपये प्रति किलोग्राम होने पर विदेशी खरीदारों के दोबारा रुख करने की उम्मीद है।
सिंथेटिक मैंथाल की बढ़ती खपत और विदेशों में पर्याप्त माल होने की जानकारी मिल रही है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खरीदारी घटी है। अंकुर अग्रवाल, मैंथाल के निर्यातक।
पिछले दिनों मंदी में चीन तथा यूरोप ने काफी खरीदारी की थी। इस बीच आवक भी कम हुई है। संभल में जहां इन दिनों 150 ड्रम मैंथा आयल आता था वहां अब 80-90 ड्रम की आवक होने का अनुमान है। चंदौसी में 25-30 ड्रम की आवक है। -दीपक गुप्ता, संभल मैंथा एसोसिएशन के सचिव।
विज्ञापन
मैंथा का सीजन शुरू होने पर मई से जून तक विदेशी बायर्स ने काफी खरीदारी की है। जब तक मैंथा आयल का भाव 900 रुपये प्रति किलोग्राम था तब तक विदेशी बायर्स की खरीदारी होती रही। भाव में तेजी आने के साथ ही विदेशी खरीदारों में सबसे पहले चीन ने हाथ खींचा। इसके यूरोप और अमेरिका के खरीदार पीछे हटे। विदेशी बाजार में भारतीय इंडस्ट्री को माल के खरीदार नहीं मिल रहे हैं।
विज्ञापन
कारोबारी बताते हैं कि जून के बाद मैंथा इंडस्ट्री को विदेशी आर्डर न के बराबर ही मिले हैं। दिल्ली से प्रमुख निर्यातक हिमांशु अग्रवाल ने बताया कि भारत से निर्यात होने वाले कुल मैंथॉल प्रोडक्ट में 50 प्रतिशत माल अकेले चीन खरीदता है, लेकिन जून के बाद चीन के 10-12 बायर्स ने खरीद बंद कर दी है।
विज्ञापन
इसके चलते भारतीय बाजार में सुस्ती है। इससे निर्माण और प्रॉसिस करने वाली मैंथा इकाइयों में कामकाज प्रभावित है। भाव 900 रुपये प्रति किलोग्राम होने पर विदेशी खरीदारों के दोबारा रुख करने की उम्मीद है।
सिंथेटिक मैंथाल की बढ़ती खपत और विदेशों में पर्याप्त माल होने की जानकारी मिल रही है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खरीदारी घटी है। अंकुर अग्रवाल, मैंथाल के निर्यातक।
पिछले दिनों मंदी में चीन तथा यूरोप ने काफी खरीदारी की थी। इस बीच आवक भी कम हुई है। संभल में जहां इन दिनों 150 ड्रम मैंथा आयल आता था वहां अब 80-90 ड्रम की आवक होने का अनुमान है। चंदौसी में 25-30 ड्रम की आवक है। -दीपक गुप्ता, संभल मैंथा एसोसिएशन के सचिव।