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शिक्षक दिवस: लॉक डाउन में स्कूली बच्चों के लिए शुरू की रिच बाल पेंटिंग
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चंदौसी के ग्राम कैथल के प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाचार्य रीनू द्वारा बनवाई गई वॉल पेटिंग।
- फोटो : CHANDAUSI
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चंदौसी (संभल)। लॉकडाउन में सभी व्यवस्थाएं चौपट हो गईं। स्कूल कॉलेज भी बंद हो गए। स्मार्ट फोन न होने से प्राइमरी स्कूलों में शुरू की गई ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था परवान नहीं चढ़ सकी। बच्चे भी शिक्षा की मूल धारा से दूर हो गए। ऐसे में प्राइमरी विद्यालय कैथल की प्रधानाचार्या रीनू बंसल ने लॉकडाउन के दौरान बच्चों की पढ़ाई के लिए स्वयं के खर्च से गांव में सात स्थानों पर रिच वॉल पेंटिंग कराई। चित्रों के माध्यम से अक्षर ज्ञान, गिनती, अंग्रेजी वर्णमाला और दो अक्षरों के शब्दों केे ज्ञान को सरल बनाया। पैर से दिव्यांग होने के बावजूद शिक्षा से जुड़े अन्य बच्चों को शिक्षा की मूल धारा से जोड़ने का अथक प्रयास कर रहीं हैं। लॉकडाउन के दौरान भी गांव जाकर बच्चों को पढ़ाती हैं।
प्राथमिक विद्यालय कैथल में रीनू बंसल की तैनात 2015 में हुई थी। बच्चों की पढ़ाई के लिए उन्होंने स्कूल में कई सार्थक प्रयास किए। लॉकडाउन के दौरान बच्चों का स्कूल आना बंद हो गया। जुलाई माह से नया शैक्षिक सत्र शुरू हुआ। ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था भी की गई, लेकिन गांव कैथल के प्राइमरी स्कूल के 350 में से करीब 220 बच्चों के घर में स्मार्ट फोन नहीं है। इस कारण बच्च ऑनलाइन शिक्षा से नहीं जुड़ सके। मिशन प्रेरणा के अंतर्गत अक्षर ज्ञान को सरल बनाने के लिए शासन ने स्कूल की दीवारों पर रिच वॉल पेंटिंग कराने के निर्देश दिए। प्रधानाचार्या रीनू बंसल ने बच्चों की शिक्षा के लिए रिच वॉल पेंटिंग को अपनाया। स्वयं के खर्च से गांव कैथल में सात स्थानों पर वॉल पेंटिंग कराई। वॉल पेंटिंग में हिंदी की वर्णमाला और अंग्रेजी के अक्षर हैं। चित्रों के माध्यम से अक्षरों को समझाया। जगह-जगह एक से सौ तक की गिनती भी लिखीं हैं। बच्चों के स्कूल आने पर मनाही है। ऐसे में एक जुलाई से रीनू बंसल स्वयं गांव जातीं हैं और रास्ते में खेल रहे बच्चों को बुलाकर जगह जगह दीवारों पर बनी पेंटिंग के माध्यम से पढ़ा रहीं हैं।
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शुरूआत में स्कूल की हालत ठीक नहीं थे। बच्चों की संख्या भी बढ़ी है। लॉकडाउन में बच्चे स्कूल नहीं आ रहे हैं। उनके अक्षर ज्ञान के लिए गांव में जगह-जगह बाल पेंटिंग बनाईं हैं। बच्चे उससे सीखकर स्कूल में अपनी कॉपी दिखाने आते हैं।
रीनू बंसल, प्रधानाचार्या।
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प्राथमिक विद्यालय कैथल में रीनू बंसल की तैनात 2015 में हुई थी। बच्चों की पढ़ाई के लिए उन्होंने स्कूल में कई सार्थक प्रयास किए। लॉकडाउन के दौरान बच्चों का स्कूल आना बंद हो गया। जुलाई माह से नया शैक्षिक सत्र शुरू हुआ। ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था भी की गई, लेकिन गांव कैथल के प्राइमरी स्कूल के 350 में से करीब 220 बच्चों के घर में स्मार्ट फोन नहीं है। इस कारण बच्च ऑनलाइन शिक्षा से नहीं जुड़ सके। मिशन प्रेरणा के अंतर्गत अक्षर ज्ञान को सरल बनाने के लिए शासन ने स्कूल की दीवारों पर रिच वॉल पेंटिंग कराने के निर्देश दिए। प्रधानाचार्या रीनू बंसल ने बच्चों की शिक्षा के लिए रिच वॉल पेंटिंग को अपनाया। स्वयं के खर्च से गांव कैथल में सात स्थानों पर वॉल पेंटिंग कराई। वॉल पेंटिंग में हिंदी की वर्णमाला और अंग्रेजी के अक्षर हैं। चित्रों के माध्यम से अक्षरों को समझाया। जगह-जगह एक से सौ तक की गिनती भी लिखीं हैं। बच्चों के स्कूल आने पर मनाही है। ऐसे में एक जुलाई से रीनू बंसल स्वयं गांव जातीं हैं और रास्ते में खेल रहे बच्चों को बुलाकर जगह जगह दीवारों पर बनी पेंटिंग के माध्यम से पढ़ा रहीं हैं।
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शुरूआत में स्कूल की हालत ठीक नहीं थे। बच्चों की संख्या भी बढ़ी है। लॉकडाउन में बच्चे स्कूल नहीं आ रहे हैं। उनके अक्षर ज्ञान के लिए गांव में जगह-जगह बाल पेंटिंग बनाईं हैं। बच्चे उससे सीखकर स्कूल में अपनी कॉपी दिखाने आते हैं।
रीनू बंसल, प्रधानाचार्या।