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कार्रवाई करने के नाम पुलिस तहरीर के चक्कर में उलझी
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संभल। चकबंदी न्यायालय में हुई घटना को लेकर दूसरे दिन भी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। पुलिस का कहना है कि किसी ने कोई तहरीर नहीं दी। जबकि चकबंदी अधिकारी का कहना है कि तहरीर दी गई है। पुलिस पत्रावली चोरी हुई या नहीं इस जानकारी को मांग रही है। कार्रवाई के नाम पर पुलिस तहरीर के चक्कर में उलझ गई है। पुलिस की जिम्मेदारी बनती है कि वह घटनास्थल की जांच कर पहले कार्रवाई करे।
चकबंदी न्यायालय में हुई घटना को लेकर जिम्मेदार गंभीर क्यों नहीं है। अधिवक्ताओं ने इस सुस्ती पर भी सवाल उठाए हैं। मालूम हो शनिवार की सुबह संभल की पुरानी तहसील परिसर में स्थित चकबंदी न्यायालय का गेट टूटा मिला। न्यायालय के अंदर पत्रावली भी इधर उधर पड़ी हुई थीं। अंदेशा है कि न्यायालय से पत्रावली चोरी की गई हैं। इस मामले में चकबंदी सीओ की ओर से तहरीर दी गई है, लेकिन पुलिस तहरीर मिलने से इनकार कर रही है। सवाल उठता है कि पत्रावली चोरी हुई हैं या नहीं लेकिन कार्रवाई तो होनी चाहिए।
तहरीर दी गई है लेकिन पुलिस ने कहा है कि पत्रावली चेक करा ली जाए कि चोरी हुई है या नहीं। उसके बाद रिपोर्ट दर्ज कर लेंगे। इसलिए सोमवार को पत्रावली चेक कराई जाएगी, जिससे चोरी होने या नहीं होने की जानकारी हो सके।
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सचेंद्र कुमार सिंह, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी, संभल
हमें कोई तहरीर नहीं मिली है। यदि तहरीर मिलती तो रिपोर्ट दर्ज कर ली जाती। इसलिए अब तक कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई है।
पंकज लावानिया, कोतवाल, संभल
चकबंदी न्यायालय में चोरी होना गंभीर मामला है। दूसरे दिन भी रिपोर्ट दर्ज न होने से अधिकारियों की लापरवाही सामने आ रही है। पुलिस को अपने स्तर से जांच करनी चाहिए, तभी इसकी हकीकत सामने आ पाएगी।
प्रदीप कुमार गुप्ता, अध्यक्ष, संभल बार एसोसिएशन, संभल
पांच वर्ष पहले भी जला था चकबंदी का रिकॉर्ड, सिरसी के किसान अब तक परेशान
संभल। चकबंदी विभाग पांच वर्ष पहले उस समय चर्चाओं में आया था, जब चकबंदी का रिकॉर्ड जलाया गया था। एक लेखपाल को पुलिस ने जेल भेजा था। उस रिकॉर्ड में कुछ गांव और कस्बा सिरसी के तमाम रिकॉर्ड खाक हो गए थे। संभल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप कुमार गुप्ता ने बताया कि रिकॉर्ड जल गया था, तब कुछ गांव और कस्बा सिरसी का रिकॉर्ड जला था। गांवों का रिकॉर्ड मिल गया था, लेकिन कस्बा सिरसी के किसान अब तक परेशान हैं। 40 वर्ष पुरानी खतौनी मुरादाबाद से निकवानी पड़ी थीं। अब तक रिकॉर्ड दुरुस्त नहीं हुआ है।
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चकबंदी न्यायालय में हुई घटना को लेकर जिम्मेदार गंभीर क्यों नहीं है। अधिवक्ताओं ने इस सुस्ती पर भी सवाल उठाए हैं। मालूम हो शनिवार की सुबह संभल की पुरानी तहसील परिसर में स्थित चकबंदी न्यायालय का गेट टूटा मिला। न्यायालय के अंदर पत्रावली भी इधर उधर पड़ी हुई थीं। अंदेशा है कि न्यायालय से पत्रावली चोरी की गई हैं। इस मामले में चकबंदी सीओ की ओर से तहरीर दी गई है, लेकिन पुलिस तहरीर मिलने से इनकार कर रही है। सवाल उठता है कि पत्रावली चोरी हुई हैं या नहीं लेकिन कार्रवाई तो होनी चाहिए।
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तहरीर दी गई है लेकिन पुलिस ने कहा है कि पत्रावली चेक करा ली जाए कि चोरी हुई है या नहीं। उसके बाद रिपोर्ट दर्ज कर लेंगे। इसलिए सोमवार को पत्रावली चेक कराई जाएगी, जिससे चोरी होने या नहीं होने की जानकारी हो सके।
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सचेंद्र कुमार सिंह, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी, संभल
हमें कोई तहरीर नहीं मिली है। यदि तहरीर मिलती तो रिपोर्ट दर्ज कर ली जाती। इसलिए अब तक कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई है।
पंकज लावानिया, कोतवाल, संभल
चकबंदी न्यायालय में चोरी होना गंभीर मामला है। दूसरे दिन भी रिपोर्ट दर्ज न होने से अधिकारियों की लापरवाही सामने आ रही है। पुलिस को अपने स्तर से जांच करनी चाहिए, तभी इसकी हकीकत सामने आ पाएगी।
प्रदीप कुमार गुप्ता, अध्यक्ष, संभल बार एसोसिएशन, संभल
पांच वर्ष पहले भी जला था चकबंदी का रिकॉर्ड, सिरसी के किसान अब तक परेशान
संभल। चकबंदी विभाग पांच वर्ष पहले उस समय चर्चाओं में आया था, जब चकबंदी का रिकॉर्ड जलाया गया था। एक लेखपाल को पुलिस ने जेल भेजा था। उस रिकॉर्ड में कुछ गांव और कस्बा सिरसी के तमाम रिकॉर्ड खाक हो गए थे। संभल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप कुमार गुप्ता ने बताया कि रिकॉर्ड जल गया था, तब कुछ गांव और कस्बा सिरसी का रिकॉर्ड जला था। गांवों का रिकॉर्ड मिल गया था, लेकिन कस्बा सिरसी के किसान अब तक परेशान हैं। 40 वर्ष पुरानी खतौनी मुरादाबाद से निकवानी पड़ी थीं। अब तक रिकॉर्ड दुरुस्त नहीं हुआ है।