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नाला बंद होता व अंधे मोड़ पर संकेतक लगा होता तो बच जाती दोनों भाइयों की जान
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नाला बंद होता और अंधे मोड़ पर संकेतक लगा होता तो शायद दोनों भाइयों की जान बच जाती। यह कहना है एआरटीओ प्रवर्तन अम्बरीश कुमार का। मानक विहीन बाईपास का एआरटीओ प्रवर्तन ने बुधवार को मौका मुआयना किया। एआरटीओ ने माना कि तीव्र मोड़ के कारण हादसों का खतरा ज्यादा है। मोड़ पर संकेतक नहीं हैं और टेबल टॉप भी बना नहीं है। वहीं उन्होंने तीव्र मोड़ के सामने खुले बह रहे नगर पालिका के नाले को सबसे खतरनाक माना है। कहना है तीव्र मोड़ के सामने गहरे और बड़े नाले का खुला रहना सबसे खतरनाक है।
सात अगस्त की रात को असमोली थाना क्षेत्र के गांव मनोटा निवासी आबिद के 17 वर्षीय बेटे फैजान और सात वर्षीय बेटा साहिल संभल कोतवाली क्षेत्र के गांव गोविंदपुर अपने मामा के घर जा रहे थे। नखासा थाना क्षेत्र के गांव मंडलाई में संभल-असमोली बाईपास पर तीव्र मोड़ पर हादसा हुआ और फैजान और साहिल बाइक समेत नगर पालिका के गहरे और बड़े नाले में जा गिरे। दोनों भाइयों की नाले में डूबने से मौत हो गई थी। फैजान का शव आठ अगस्त को मिला था जबकि साहिल का शव नौ अगस्त को मिला था।
इसी हादसे की सूचना पर एआरटीओ प्रवर्तन पहुंचे थे। उन्होंने मौका मुआयना किया और आसपास के किसानों से भी बात की। एआरटीओ प्रवर्तन ने बताया कि किसानों ने बताया है कि तीव्र मोड़ के कारण हादसे होते हैं। बाईपास पर कई मोड़ खतरनाक हैं। सभी पर संकेतक लगे होने चाहिए। जिस मोड़ पर हादसा हुआ है वहां और भी हादसे हो सकते हैं। फिलहाल बाईपास के सुधार के लिए लोकनिर्माण विभाग को पत्र लिखा जाएगा और मानक पूरे करने के लि कहा जाएगा जिससे और हादसे न हों। इसके अलावा नगर पालिका को भी पत्र लिखेंगे कि नाले को कवर कराया जाए। बताया कि खामियों में सुधार नहीं किया गया तो 26 अगस्त को होने वाली सड़क सुरक्षा की बैठक के दौरान रखा जाएगा।
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सात अगस्त की रात को असमोली थाना क्षेत्र के गांव मनोटा निवासी आबिद के 17 वर्षीय बेटे फैजान और सात वर्षीय बेटा साहिल संभल कोतवाली क्षेत्र के गांव गोविंदपुर अपने मामा के घर जा रहे थे। नखासा थाना क्षेत्र के गांव मंडलाई में संभल-असमोली बाईपास पर तीव्र मोड़ पर हादसा हुआ और फैजान और साहिल बाइक समेत नगर पालिका के गहरे और बड़े नाले में जा गिरे। दोनों भाइयों की नाले में डूबने से मौत हो गई थी। फैजान का शव आठ अगस्त को मिला था जबकि साहिल का शव नौ अगस्त को मिला था।
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इसी हादसे की सूचना पर एआरटीओ प्रवर्तन पहुंचे थे। उन्होंने मौका मुआयना किया और आसपास के किसानों से भी बात की। एआरटीओ प्रवर्तन ने बताया कि किसानों ने बताया है कि तीव्र मोड़ के कारण हादसे होते हैं। बाईपास पर कई मोड़ खतरनाक हैं। सभी पर संकेतक लगे होने चाहिए। जिस मोड़ पर हादसा हुआ है वहां और भी हादसे हो सकते हैं। फिलहाल बाईपास के सुधार के लिए लोकनिर्माण विभाग को पत्र लिखा जाएगा और मानक पूरे करने के लि कहा जाएगा जिससे और हादसे न हों। इसके अलावा नगर पालिका को भी पत्र लिखेंगे कि नाले को कवर कराया जाए। बताया कि खामियों में सुधार नहीं किया गया तो 26 अगस्त को होने वाली सड़क सुरक्षा की बैठक के दौरान रखा जाएगा।
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