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Sambhal News: बंदर के कूदने से गिरा मकान का छज्जा, बालक की मौत
Tue, 23 Jun 2026 01:44 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Tue, 23 Jun 2026 01:44 AM IST
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बबराला। गुन्नौर कोतवाली क्षेत्र के गांव नदरौली में बंदर के कूदने से मकान के छज्जे के मलबा बच्चे के ऊपर जा गिरा। मलबे में दबकर 11 वर्षीय बालक की मौत हो गई। परिजनों ने बिना किया कानूनी कार्रवाई के ही शव का अंतिम संस्कार कर दिया। बालक की मौत को लेकर परिवार में चीख पुकार मची हुई थी।
गुन्नौर कोतवाली क्षेत्र के गांव नदरौली निवासी नीरज का बेटा कौशल (11) सोमवार की सुबह गांव में ही स्थित परचूनी की दुकान पर कुछ सामान खरीद कर घर लौट रहा था, रास्ते में बिजेंद्र के मकान के पास पहुंचा तो बंदर के कूदने से मकान का जर्जर छज्जा रास्ते से जा रहे कौशल के ऊपर गिर पड़ा, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। पता लगते ही अफरातफरी मच गई।
गंभीर हालत में परिजन उसे लेकर गुन्नौर सीएचसी पहुंचे जहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। पड़ोसियों ने बताया कि बालक कौशल के पिता नीरज ने दस वर्ष पूर्व फंदे पर लटककर जान दे दी थी। उस समय कौशल मात्र पांच महीने का था। इसके बाद मां सविता अपने देवर रमाकांत के साथ रहकर उसका व उससे बड़ी बेटी प्रिया का पालन पोषण कर रही थी। घटना के बाद परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल हो गया है। इस मामले में परिजनों ने काई भी कानूनी कार्रवाई किए बिना शव का अंतिम संस्कार कर दिया।
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रोज बंदरों के हमले में घायल हो रहे लोग, दस दिन में एक महिला की मौत
बंदरों को पकड़ने के लिए प्रशासन की ओर से दिए गए थे आदेश, निभाई सिर्फ औपचारिकता
संवाद न्यूज एजेंसी
चंदौसी। कुत्तों के बाद बंदर लोगों की जान के दुश्मन बन गए हैं। जिले कहीं न कहीं रोज ही बंदरों के हमले से लोग घायल होते रहते हैं। इस साल की शुरुआत में जिले की सभी नगर पालिका व नगर पंचायतों को बंदर पकड़ने के आदेश दिए गए थे, लेकिन इसमें सिर्फ खानापूर्ति की गई। चंदौसी में ही करीब 300 बंदर पकड़ने का दावा किया गया था, लेकिन उनकी संख्या आज भी हर मोहल्ले में जस की तस है।
अभी चार दिन पहले ही बृहस्पतिवार को तहसील मुख्यालय के सामने दुर्गा धाम काॅलोनी में रहने वाले अनुज भटनागर सुबह साढ़े 10 बजे छत पर कपड़े सुखाने गए थे। उसी दौरान बंदरों के झुंड ने उन पर हमला बोल दिया। बचने के प्रयास में अनुज छत से नीचे सड़क पर आ गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए। उसके सिर व शरीर पर गंभीर चोट आई। दोनों पैरों समेत हाथ में फ्रेक्चर हो गया। हालत गंभीर होने पर हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।
बृहस्पतिवार को ही असमोली थाना क्षेत्र के गांव खानपुर बंद निवासी नासिर हुसैन की पत्नी 28 वर्षीय जीनत अपने मकान की छत पर बंदरों को भगाने गई थीं। इसी दौरान बंदरों के झुंड ने उस पर हमला कर दिया। अचानक हुए हमले से घबराकर महिला का संतुलन बिगड़ गया और वह छत से नीचे गिर पड़ी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। घटना के बाद परिजन उसे असमोली के एक निजी अस्पताल ले गए, जहां प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए संभल रेफर कर दिया।
इसी तरह दस दिन पूर्व असमोली क्षेत्र के ही गांव हीरापुर में बंदरों के हमले से घबराकर छत से गिरी 70 वर्षीय वृद्धा की मौत हो गई थी।
बंदरों के हमले की लगातार हो रही घटनाओं को लेकर जिला प्रशासन की ओर से पूर्व में सभी नगर पालिका व नगर पंचायतों को बंद पकड़कर बाहर छुड़वाने के आदेश दिए थे। इसके बाद कुछ स्थानों पर बंदरों को पकड़वाने की औपचारिकता निभाई गई।
मथुरा की टीम ने चंदौसी में बंदर पकड़े थे, लेकिन अब भी उनकी संख्या में कोई कमी नहीं आई है। शहर में हजारों की संख्या में बंदरों के होने के राण लोगों का घरों से निकलना दुष्वार हो गया है।
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गुन्नौर कोतवाली क्षेत्र के गांव नदरौली निवासी नीरज का बेटा कौशल (11) सोमवार की सुबह गांव में ही स्थित परचूनी की दुकान पर कुछ सामान खरीद कर घर लौट रहा था, रास्ते में बिजेंद्र के मकान के पास पहुंचा तो बंदर के कूदने से मकान का जर्जर छज्जा रास्ते से जा रहे कौशल के ऊपर गिर पड़ा, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। पता लगते ही अफरातफरी मच गई।
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गंभीर हालत में परिजन उसे लेकर गुन्नौर सीएचसी पहुंचे जहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। पड़ोसियों ने बताया कि बालक कौशल के पिता नीरज ने दस वर्ष पूर्व फंदे पर लटककर जान दे दी थी। उस समय कौशल मात्र पांच महीने का था। इसके बाद मां सविता अपने देवर रमाकांत के साथ रहकर उसका व उससे बड़ी बेटी प्रिया का पालन पोषण कर रही थी। घटना के बाद परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल हो गया है। इस मामले में परिजनों ने काई भी कानूनी कार्रवाई किए बिना शव का अंतिम संस्कार कर दिया।
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रोज बंदरों के हमले में घायल हो रहे लोग, दस दिन में एक महिला की मौत
बंदरों को पकड़ने के लिए प्रशासन की ओर से दिए गए थे आदेश, निभाई सिर्फ औपचारिकता
संवाद न्यूज एजेंसी
चंदौसी। कुत्तों के बाद बंदर लोगों की जान के दुश्मन बन गए हैं। जिले कहीं न कहीं रोज ही बंदरों के हमले से लोग घायल होते रहते हैं। इस साल की शुरुआत में जिले की सभी नगर पालिका व नगर पंचायतों को बंदर पकड़ने के आदेश दिए गए थे, लेकिन इसमें सिर्फ खानापूर्ति की गई। चंदौसी में ही करीब 300 बंदर पकड़ने का दावा किया गया था, लेकिन उनकी संख्या आज भी हर मोहल्ले में जस की तस है।
अभी चार दिन पहले ही बृहस्पतिवार को तहसील मुख्यालय के सामने दुर्गा धाम काॅलोनी में रहने वाले अनुज भटनागर सुबह साढ़े 10 बजे छत पर कपड़े सुखाने गए थे। उसी दौरान बंदरों के झुंड ने उन पर हमला बोल दिया। बचने के प्रयास में अनुज छत से नीचे सड़क पर आ गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए। उसके सिर व शरीर पर गंभीर चोट आई। दोनों पैरों समेत हाथ में फ्रेक्चर हो गया। हालत गंभीर होने पर हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।
बृहस्पतिवार को ही असमोली थाना क्षेत्र के गांव खानपुर बंद निवासी नासिर हुसैन की पत्नी 28 वर्षीय जीनत अपने मकान की छत पर बंदरों को भगाने गई थीं। इसी दौरान बंदरों के झुंड ने उस पर हमला कर दिया। अचानक हुए हमले से घबराकर महिला का संतुलन बिगड़ गया और वह छत से नीचे गिर पड़ी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। घटना के बाद परिजन उसे असमोली के एक निजी अस्पताल ले गए, जहां प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए संभल रेफर कर दिया।
इसी तरह दस दिन पूर्व असमोली क्षेत्र के ही गांव हीरापुर में बंदरों के हमले से घबराकर छत से गिरी 70 वर्षीय वृद्धा की मौत हो गई थी।
बंदरों के हमले की लगातार हो रही घटनाओं को लेकर जिला प्रशासन की ओर से पूर्व में सभी नगर पालिका व नगर पंचायतों को बंद पकड़कर बाहर छुड़वाने के आदेश दिए थे। इसके बाद कुछ स्थानों पर बंदरों को पकड़वाने की औपचारिकता निभाई गई।
मथुरा की टीम ने चंदौसी में बंदर पकड़े थे, लेकिन अब भी उनकी संख्या में कोई कमी नहीं आई है। शहर में हजारों की संख्या में बंदरों के होने के राण लोगों का घरों से निकलना दुष्वार हो गया है।