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Sambhal News: सरकारी कृषि भूमि के आवंटन में फर्जीवाड़ा, 17 पर एफआईआर
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गुन्नौर। तहसील क्षेत्र में सरकारी कृषि भूमि के आवंटन से जुड़े एक और बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। एडीएम न्यायिक सौरव कुमार पांडेय की जांच रिपोर्ट डीएम अंकित खंडेलवाल को सौंपे जाने के बाद राजस्व निरीक्षक की तहरीर पर गुन्नौर थाना पुलिस ने 17 नामजद लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।
राजस्व निरीक्षक बबराला की ओर से थाने में दी गई तहरीर के अनुसार वर्ष 1987 से 2011 के बीच ग्राम होतमगढ़ी, बिचपुरी सैलाव, गुन्नौर हीरापुर, रसूलपुर और हुसैनपुर सैलाव में करीब 20 कृषि भूमि आवंटन पत्रावलियों के माध्यम से श्रेणी-6 की सरकारी भूमि का फर्जी आवंटन कराया गया। तत्कालीन राजस्व और चकबंदी अधिकारियों को गुमराह कर सरकारी भूमि अपने परिवार और अन्य लोगों के नाम दर्ज कराई गई।
तहरीर में कहा गया है कि धर्मपाल सिंह ने अपनी दोनों पत्नियों, तीन पुत्रों, दो पुत्रियों, तीन पुत्रवधुओं, तीन भाइयों, तीन भतीजों तथा कुछ कथित बेनामी व्यक्तियों के नाम भूमि दर्ज कराई, जबकि इस श्रेणी की भूमि पर संक्रमणीय अधिकार उत्पन्न नहीं हो सकते थे। जांच में कुछ ऐसे नाम भी सामने आए, जिनके संबंध में ग्रामीण तक जानकारी नहीं दे सके कि वे कौन हैं और कहां के निवासी हैं।
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तहरीर के अनुसार बाद में इन्हीं आवंटनों के आधार पर आधार वर्ष खतौनी, सीएच-45, खाता संख्या 85, 97 और 101 सहित चकबंदी अभिलेखों में भी कथित हेरफेरी कर नाम दर्ज करा दिए गए। वर्ष 2008 और 2009 में पारित आदेशों के माध्यम से गाटा संख्या और रकबे में बदलाव कर अभिलेख संशोधित कराए गए। इसकी शिकायतें वर्षों से कुंवरपाल, सुगढ़पाल और पूर्व मंत्री अजीत कुमार उर्फ राजू द्वारा मुख्यमंत्री स्तर तक की जाती रही हैं।
शिकायतों के बाद हुई विभिन्न जांचों में भी अनियमितताएं सामने आने का दावा किया गया। इसके बावजूद संबंधित पक्ष भूमि बचाने के लिए सिविल न्यायालय, एडीएम न्यायालय, अपर आयुक्त मुरादाबाद, राजस्व परिषद लखनऊ और इलाहाबाद हाईकोर्ट तक वाद दायर करता रहा।
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राजस्व निरीक्षक बबराला की ओर से थाने में दी गई तहरीर के अनुसार वर्ष 1987 से 2011 के बीच ग्राम होतमगढ़ी, बिचपुरी सैलाव, गुन्नौर हीरापुर, रसूलपुर और हुसैनपुर सैलाव में करीब 20 कृषि भूमि आवंटन पत्रावलियों के माध्यम से श्रेणी-6 की सरकारी भूमि का फर्जी आवंटन कराया गया। तत्कालीन राजस्व और चकबंदी अधिकारियों को गुमराह कर सरकारी भूमि अपने परिवार और अन्य लोगों के नाम दर्ज कराई गई।
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तहरीर में कहा गया है कि धर्मपाल सिंह ने अपनी दोनों पत्नियों, तीन पुत्रों, दो पुत्रियों, तीन पुत्रवधुओं, तीन भाइयों, तीन भतीजों तथा कुछ कथित बेनामी व्यक्तियों के नाम भूमि दर्ज कराई, जबकि इस श्रेणी की भूमि पर संक्रमणीय अधिकार उत्पन्न नहीं हो सकते थे। जांच में कुछ ऐसे नाम भी सामने आए, जिनके संबंध में ग्रामीण तक जानकारी नहीं दे सके कि वे कौन हैं और कहां के निवासी हैं।
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तहरीर के अनुसार बाद में इन्हीं आवंटनों के आधार पर आधार वर्ष खतौनी, सीएच-45, खाता संख्या 85, 97 और 101 सहित चकबंदी अभिलेखों में भी कथित हेरफेरी कर नाम दर्ज करा दिए गए। वर्ष 2008 और 2009 में पारित आदेशों के माध्यम से गाटा संख्या और रकबे में बदलाव कर अभिलेख संशोधित कराए गए। इसकी शिकायतें वर्षों से कुंवरपाल, सुगढ़पाल और पूर्व मंत्री अजीत कुमार उर्फ राजू द्वारा मुख्यमंत्री स्तर तक की जाती रही हैं।
शिकायतों के बाद हुई विभिन्न जांचों में भी अनियमितताएं सामने आने का दावा किया गया। इसके बावजूद संबंधित पक्ष भूमि बचाने के लिए सिविल न्यायालय, एडीएम न्यायालय, अपर आयुक्त मुरादाबाद, राजस्व परिषद लखनऊ और इलाहाबाद हाईकोर्ट तक वाद दायर करता रहा।