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मेंथा टंकी की सफाई करने अंदर घुसे पिता-पुत्र सहित तीन लोग हुए बेहोश
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कुढ़फतेहगढ़। क्षेत्र के गांव जहांगीरपुर में मेंथा की टंकी की सफाई करने के लिए अंदर घुसे पिता-पुत्र सहित तीन लोग गैस की चपेट में आने से बेहोश हो गए। पास में काम कर रहे युवक ने ग्रामीणों की मदद से उन्हें बाहर निकाला और गांव में उनका उपचार कराया।
थाना क्षेत्र के गांव जहांगीरपुर में मूलचंद की गांव के निकट मेंथा की टंकी लगी है। जून माह में मेंथा की पेेेराई का काम शुरू हो जाता है। उसकी तैयारी के लिए सोमवार की सुबह मूलचंद अपने दो बेटों ताराचंद और प्रताप के साथ मेंथा की टंकी की सफाई करने खेत पर गए थे। काफी समय से टंकी बंद थी, उसमें गैस बन रही थी। जैसे ही ताराचंद टंकी के अंदर घुसे, तो वह बेहोश हो गए। ताराचंद को बेहोश हुआ तो देख कर उसके पिता मूलचंद अंदर घुसे और वह भी अंदर जाते ही बेहोश हो गए।
उन्हें देखने लिए बड़ा बेटा प्रताप भी अंदर पहुंच गया और बेहोश हो गया। गांव निवासी प्रमोद भी वहां से गुजर रहा था और टंकी में घुसे हुए उसने पिता पुत्रों को देखा था। काफी देर बाहर आने पर उसने आसपास खेतों में काम कर रहे ग्रामीणों को बुला लिया। ग्रामीणों की मदद से पिता पुत्रों को बाहर निकाला गया। ग्रामीण उन्हें लेकर घर आए और गांव में ही निजी चिकित्सक से उपचार कराया। एक घंटे बाद तीनों पिता पुत्रों को होश आया।
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थाना क्षेत्र के गांव जहांगीरपुर में मूलचंद की गांव के निकट मेंथा की टंकी लगी है। जून माह में मेंथा की पेेेराई का काम शुरू हो जाता है। उसकी तैयारी के लिए सोमवार की सुबह मूलचंद अपने दो बेटों ताराचंद और प्रताप के साथ मेंथा की टंकी की सफाई करने खेत पर गए थे। काफी समय से टंकी बंद थी, उसमें गैस बन रही थी। जैसे ही ताराचंद टंकी के अंदर घुसे, तो वह बेहोश हो गए। ताराचंद को बेहोश हुआ तो देख कर उसके पिता मूलचंद अंदर घुसे और वह भी अंदर जाते ही बेहोश हो गए।
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उन्हें देखने लिए बड़ा बेटा प्रताप भी अंदर पहुंच गया और बेहोश हो गया। गांव निवासी प्रमोद भी वहां से गुजर रहा था और टंकी में घुसे हुए उसने पिता पुत्रों को देखा था। काफी देर बाहर आने पर उसने आसपास खेतों में काम कर रहे ग्रामीणों को बुला लिया। ग्रामीणों की मदद से पिता पुत्रों को बाहर निकाला गया। ग्रामीण उन्हें लेकर घर आए और गांव में ही निजी चिकित्सक से उपचार कराया। एक घंटे बाद तीनों पिता पुत्रों को होश आया।
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