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ढांग में तीन दबे, किसान की मौत
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल
Updated Wed, 10 Aug 2016 01:41 AM IST
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मौत
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हयातनगर थाना क्षेत्र के चंदायन गांव कुइयां में ईंटें निकालते समय अचानक मिट्टी की ढांग ढह गई। इससे दो सगे भाई और एक मजदूर मिट्टी दब गए। कुइयां के करीब में काम कर रहे कुछ लोगों ने आनन-फानन में दो लोगों को बाहर निकाल लिया। जबकि, एक किसान को जेसीबी की मदद से दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला जा सका। उसे उपचार के लिए जिला अस्पताल लाया गया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
चंदायन गांव निवासी मोहम्मद जरीफ (45) पुत्र नजीर अहमद मंगलवार को अपने सगे भाई अथर व एक अन्य मजदूर के साथ करीब 13 फीट गहरी कुइयां को बंद करने के लिए उसमें उतरे। यह लोग कुइयां में लगीं ईंटें निकाल रहे थे। इस बीच कुइयां की मिट्टी नीचे धसकने लगी। मिट्टी के धसकने से तीन लोगों मिट्टी में दब गए।
आसपास के खेतों में काम रहे लोग दौड़े और उन्हें बचाने के लिए मिट्टी हटानी शुरू कर दी। अथर और आढौल गांव निवासी मजदूर को तत्काल ही बाहर निकाल लिया गया लेकिन जरीफ को निकालने के लिए जेसीबी मंगाई गई। इसके बाद जेसीबी से मिट्टी हटवाई गई और दो घंटे कड़ी मशक्कत के बाद नीचे दबे किसान को बाहर निकाला गया। लेकिन तब तक दम घुटने से उसकी मौत हो चुकी थी।
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एम्बुलेंस न रेस्क्यू वैन, आपात स्थिति में फूल जाते हैं हाथ-पैर
संभल(ब्यूरो)। बोरवेल की कुइयां में हादसे आएदिन होते हैं लेकिन अभी तक हादसों से निपटने के लिए जिले कोई व्यवस्था नहीं है। आमतौर पर ग्रामीण अपनी जान को जोखिम में डालकर अपने लोगों को बचाते हैं। कई बार तो जान बचाने के लिए उतरे लोग भी जान गवां बैठते हैं।
चंदायन गांव में मंगलवार को हादसा हुआ तो उसके बाद भी वहां पर सरकारी तंत्र से मदद नहीं मिली। ले-देकर हयातनगर थाने की पुलिस पहुंची। पुलिस भी ग्रामीणाें के माध्यम से रेस्क्यू कर रही है। रेस्क्यू के लिए कोई प्रशिक्षित टीम नहीं थी। पुलिस ने अपने प्रयासों से जेसीबी मंगाई और उसके माध्यम से खुदाई हुई लेकिन देर होने की वजह से एक किसान की जान चली गई। यह घटना एक बार फिर जाहिर करती है कि समय पर रेस्क्यू न होने की वजह से जान चली गई।
इस मामले में डीएम एनकेएस चौहान का कहना था कि हादसों से निपटने के लिए दमकल की टीम है लेकिन वह तभी पहुंच सकती है, जब गांव के लोग खबर करें।
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चंदायन गांव निवासी मोहम्मद जरीफ (45) पुत्र नजीर अहमद मंगलवार को अपने सगे भाई अथर व एक अन्य मजदूर के साथ करीब 13 फीट गहरी कुइयां को बंद करने के लिए उसमें उतरे। यह लोग कुइयां में लगीं ईंटें निकाल रहे थे। इस बीच कुइयां की मिट्टी नीचे धसकने लगी। मिट्टी के धसकने से तीन लोगों मिट्टी में दब गए।
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आसपास के खेतों में काम रहे लोग दौड़े और उन्हें बचाने के लिए मिट्टी हटानी शुरू कर दी। अथर और आढौल गांव निवासी मजदूर को तत्काल ही बाहर निकाल लिया गया लेकिन जरीफ को निकालने के लिए जेसीबी मंगाई गई। इसके बाद जेसीबी से मिट्टी हटवाई गई और दो घंटे कड़ी मशक्कत के बाद नीचे दबे किसान को बाहर निकाला गया। लेकिन तब तक दम घुटने से उसकी मौत हो चुकी थी।
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संभल(ब्यूरो)। बोरवेल की कुइयां में हादसे आएदिन होते हैं लेकिन अभी तक हादसों से निपटने के लिए जिले कोई व्यवस्था नहीं है। आमतौर पर ग्रामीण अपनी जान को जोखिम में डालकर अपने लोगों को बचाते हैं। कई बार तो जान बचाने के लिए उतरे लोग भी जान गवां बैठते हैं।
चंदायन गांव में मंगलवार को हादसा हुआ तो उसके बाद भी वहां पर सरकारी तंत्र से मदद नहीं मिली। ले-देकर हयातनगर थाने की पुलिस पहुंची। पुलिस भी ग्रामीणाें के माध्यम से रेस्क्यू कर रही है। रेस्क्यू के लिए कोई प्रशिक्षित टीम नहीं थी। पुलिस ने अपने प्रयासों से जेसीबी मंगाई और उसके माध्यम से खुदाई हुई लेकिन देर होने की वजह से एक किसान की जान चली गई। यह घटना एक बार फिर जाहिर करती है कि समय पर रेस्क्यू न होने की वजह से जान चली गई।
इस मामले में डीएम एनकेएस चौहान का कहना था कि हादसों से निपटने के लिए दमकल की टीम है लेकिन वह तभी पहुंच सकती है, जब गांव के लोग खबर करें।