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देश के लिए शहादत पर गर्व है सुधीश कुमार के परिवार को
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल
Updated Mon, 17 Oct 2016 01:10 AM IST
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शहीद
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कपिल कुमार भी फौज में हैं और इन दिनों छुट्टी पर गांव आए थे। उन्होंने बताया कि सुधीश देश के लिए कुछ भी कर गुजरने का जज्बा रखता था। सुधीश की प्रेरणा से ही चार वर्ष पहले वह सेना की भर्ती में शामिल हुए थे। दोनों के बीच हर रोज बात होती थी। वह कहते थे कि अपने लिए तो सभी जीते हैं कुछ लोगों को देश के लिए भी जीना चाहिए। उनकी शहादत ने गांव का ही नहीं बल्कि पूरे जिले और पूरे देश का नाम ऊंचा किया है। हमारे पूरे परिवार को उनके बलिदान पर गर्व है।
पांच भाई बहनों में सबसे छोटे थे सुधीश कुमार
संभल। सुधीश कुमार पांच भाई बहनों में सबसे छोटे थे। उन्हें पूरे परिवार का प्यार मिलता था। वह सबके दुलारे थे। माता पिता के साथ अपनी भाभी और चचेरे भाई से हर रोज उनकी बात होती थी। परिजनों ने बताया कि सबसे बड़ी बहन मीना कुमारी हैं। इसके बाद भाई अनिल, बहन बबिता, भाई सुनील और फिर सुधीश का नंबर था।
राजकीय सम्मान से होगा अंतिम संस्कार
सुधीश कुमार के शहीद होने की सूचना मिल गई है। उन्हें राजकीय सम्मान देने की तैयारी की गई है। गांव पनसुखा मिलक में उनका पार्थिव शरीर आने पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। इस संबंध में प्रशासन ने अपनी तैयारी कर ली है। उनके शव के आने का इंतजार है। सेना से मिली जानकारी के मुताबिक शव सोमवार को शाम आएगा।
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- भूपेंद्र एस चौधरी, जिलाधिकारी, संभल।
अंतिम संस्कार में शामिल होंगे कई गांवों के लोग
संभल। जिले के प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के साथ साथ भाकियू के पदाधिकारी भी अंतिम संस्कार में शामिल होंगे। भाकियू के जिला महासचिव चौधरी वीरेंद्र सिंह ने कहा कि वह हर जगह सैनिकों के सम्मान में जाते हैं। यह तो क्षेत्र का मामला है। इसमें उनकी पूरी टीम शामिल होगी। इसके अलावा अन्य संगठन भी हिस्सा लेंगे।
चचेरे भाई और दोस्त से की थी आखिरी बार बात
संभल। सुधीश कुमार ने शहीद होने से पहले अपने चचेरे भाई और दोस्त कपिल कुमार को लास्ट काल की। वह मोर्चे पर एक बजे गए। इससे पहले उन्होंने अपने चचेरे छोटे भाई कपिल कुमार जो फौज में ही रोजाना की तरह कुशलता की बातें कीं। हंसे और खिलखिलाए भी। छोटे भाई से पूछा- तू कैसा है। क्या कर रहा है। घर पर सब ठीक है। सबकी कुशलता लेने के बाद वह बोले कि एक बजे ड्यूटी पर जाना है।
कपिल ने बताया कि इसके बाद वह गांव में अपने काम में व्यस्त हो गए। शाम को 6.30 बजे उनके पास सुधीश के सीरियस होने के बारे में पहली सूचना बिजनौर जिले के सैनिक कमल ने दी। कमल, सुशीश के साथ ही बार्डर पर तैनात है। कमल को पता था कि सुधीश बार्डर में शहीद हो गया है लेकिन उसने पहले यह बात छुपाई और यही कहा कि उसकी हालत गंभीर है। लेकिन जब मैंने कहा कि-मैं फौज में हूं, तो उसने बताया कि वह 4.40 बजे राजौरी जिले के तारकुंडी में भारत-पाक सीमा पर शहीद हो गया है।
इसके बाद में एक पल को सन्न रह गया लेकिन फिर मैंने खुद को संभाला और सुधीश के पिता और बड़े भाई को जानकारी दी। इसके बाद सेना मु्ख्यालय से फोन आया। परिजनों और परिवार के बारे में जानकारी मांगी गई। यह जानकारी भी दी गई कि सुशीध का शव सोमवार को शाम तक आएगा।
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पांच भाई बहनों में सबसे छोटे थे सुधीश कुमार
संभल। सुधीश कुमार पांच भाई बहनों में सबसे छोटे थे। उन्हें पूरे परिवार का प्यार मिलता था। वह सबके दुलारे थे। माता पिता के साथ अपनी भाभी और चचेरे भाई से हर रोज उनकी बात होती थी। परिजनों ने बताया कि सबसे बड़ी बहन मीना कुमारी हैं। इसके बाद भाई अनिल, बहन बबिता, भाई सुनील और फिर सुधीश का नंबर था।
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राजकीय सम्मान से होगा अंतिम संस्कार
सुधीश कुमार के शहीद होने की सूचना मिल गई है। उन्हें राजकीय सम्मान देने की तैयारी की गई है। गांव पनसुखा मिलक में उनका पार्थिव शरीर आने पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। इस संबंध में प्रशासन ने अपनी तैयारी कर ली है। उनके शव के आने का इंतजार है। सेना से मिली जानकारी के मुताबिक शव सोमवार को शाम आएगा।
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- भूपेंद्र एस चौधरी, जिलाधिकारी, संभल।
अंतिम संस्कार में शामिल होंगे कई गांवों के लोग
संभल। जिले के प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के साथ साथ भाकियू के पदाधिकारी भी अंतिम संस्कार में शामिल होंगे। भाकियू के जिला महासचिव चौधरी वीरेंद्र सिंह ने कहा कि वह हर जगह सैनिकों के सम्मान में जाते हैं। यह तो क्षेत्र का मामला है। इसमें उनकी पूरी टीम शामिल होगी। इसके अलावा अन्य संगठन भी हिस्सा लेंगे।
चचेरे भाई और दोस्त से की थी आखिरी बार बात
संभल। सुधीश कुमार ने शहीद होने से पहले अपने चचेरे भाई और दोस्त कपिल कुमार को लास्ट काल की। वह मोर्चे पर एक बजे गए। इससे पहले उन्होंने अपने चचेरे छोटे भाई कपिल कुमार जो फौज में ही रोजाना की तरह कुशलता की बातें कीं। हंसे और खिलखिलाए भी। छोटे भाई से पूछा- तू कैसा है। क्या कर रहा है। घर पर सब ठीक है। सबकी कुशलता लेने के बाद वह बोले कि एक बजे ड्यूटी पर जाना है।
कपिल ने बताया कि इसके बाद वह गांव में अपने काम में व्यस्त हो गए। शाम को 6.30 बजे उनके पास सुधीश के सीरियस होने के बारे में पहली सूचना बिजनौर जिले के सैनिक कमल ने दी। कमल, सुशीश के साथ ही बार्डर पर तैनात है। कमल को पता था कि सुधीश बार्डर में शहीद हो गया है लेकिन उसने पहले यह बात छुपाई और यही कहा कि उसकी हालत गंभीर है। लेकिन जब मैंने कहा कि-मैं फौज में हूं, तो उसने बताया कि वह 4.40 बजे राजौरी जिले के तारकुंडी में भारत-पाक सीमा पर शहीद हो गया है।
इसके बाद में एक पल को सन्न रह गया लेकिन फिर मैंने खुद को संभाला और सुधीश के पिता और बड़े भाई को जानकारी दी। इसके बाद सेना मु्ख्यालय से फोन आया। परिजनों और परिवार के बारे में जानकारी मांगी गई। यह जानकारी भी दी गई कि सुशीध का शव सोमवार को शाम तक आएगा।