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जहांगीरपुर में फैला बुखार का प्रकोप, एक ग्रामीण की मौत
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कुढ़फतेहगढ़/चंदौसी। बदलते मौसम और गांवों में फैली गंदगी के बीच लोग बुखार से पीड़ित हैं। कुढ़ फतेहगढ़ क्षेत्र के जहांगीरपुर में ग्रामीणों का यह भी दावा है कि यहां कई लोग पीलिया के शिकार हैं। जिनका उपचार बाहर के अस्पतालों में चल रहा है। सोमवार को एक बुखार पीड़ित पचास वर्षीय ग्रामीण की मौत हो गई है। सैकड़ों की संख्या में लोग बीमार हैं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग इसके प्रति गंभीर नहीं है। हालांकि जब विभाग को सूचना मिली तो गांव में शिविर लगाकर 135 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर दवाओं का वितरण किया गया।
मंगलवार को जहांगीरपुर गांव का हाल देखा गया तो जानकारी हुई कि इक्का दुक्का घरों को छोड़ कर पूरा गांव ही बीमार है। हर घर में एक दो लोग बुखार से पीड़ित हैं। खास बात तो यह है कि एक सप्ताह से लखनऊ से आई स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अप्रशिक्षित चिकित्सकों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है, जिससे अप्रशिक्षित चिकित्सकों के क्लीनिक भी बंद हैं। स्वास्थ्य विभाग ने भी कोई व्यवस्था नहीं की है। ग्रामीण महंगे अस्पतालों में आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उपचार नहीं करा पा रहे हैं। आलम यह है कि पूरा गांव ही कराह रहा है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रीठ, बेरनी, कुढ़फतेहगढ़ में हैं लेकिन कुछ समय के लिए खुलते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इन अस्पतालों में 24 घंटे उपचार की व्यवस्था होनी चाहिए। चंदौसी व अन्य अस्पतालों से लोग दवाई ला रहे हैं। उन डाक्टरों ने जहांगीरपुर में टाइफाइड, मलेरिया, पीलिया आदि रोग होने का दावा किया है। गांव में सौ से अधिक लोग बुखार से पीड़ित बताए जा रहे हैं।
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ग्रामीणों का दावा है कि एक दर्जन से अधिक मरीजों को बाहरी डाक्टरों ने पीलिया बता दिया है, जिससे वह घबरा रहे हैं। जमुना प्रसाद, मोर सिंह मौर्य, विमला ,लालाराम, जयवंती, चंद्रपाल मौर्य ,शांति भूकन, नीरज कश्यप आदि का कहना है कि उनका उपचार चंदौसी, मुरादाबाद, बिलारी आदि के अस्पताल में चल रहा है, जहां उन्हें पीलिया होने का दावा किया गया है। अजुद्धी प्रसाद (50) पुत्र महिलाल की सोमवार की सुबह बुखार से मौत हो गई। उसे तीन दिन पहले बुखार आया था। जिसका रीठ के निजी चिकित्सक के क्लीनिक तथा चंदौसी में उपचार कराया था।
स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची
स्वास्थ्य विभाग को सूचना मिली कि बिलारी संयुक्त चिकित्सालय की टीम जहांगीरपुर पहुंची। आशाओं और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों द्वारा प्राथमिक विद्यालय में शिविर लगाया। डा. वीके सिंह ने टीम के साथ 135 मरीजों की स्लाइड बनाकर उनको निशुल्क दवाइयां वितरित की गई।
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मंगलवार को जहांगीरपुर गांव का हाल देखा गया तो जानकारी हुई कि इक्का दुक्का घरों को छोड़ कर पूरा गांव ही बीमार है। हर घर में एक दो लोग बुखार से पीड़ित हैं। खास बात तो यह है कि एक सप्ताह से लखनऊ से आई स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अप्रशिक्षित चिकित्सकों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है, जिससे अप्रशिक्षित चिकित्सकों के क्लीनिक भी बंद हैं। स्वास्थ्य विभाग ने भी कोई व्यवस्था नहीं की है। ग्रामीण महंगे अस्पतालों में आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उपचार नहीं करा पा रहे हैं। आलम यह है कि पूरा गांव ही कराह रहा है।
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रीठ, बेरनी, कुढ़फतेहगढ़ में हैं लेकिन कुछ समय के लिए खुलते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इन अस्पतालों में 24 घंटे उपचार की व्यवस्था होनी चाहिए। चंदौसी व अन्य अस्पतालों से लोग दवाई ला रहे हैं। उन डाक्टरों ने जहांगीरपुर में टाइफाइड, मलेरिया, पीलिया आदि रोग होने का दावा किया है। गांव में सौ से अधिक लोग बुखार से पीड़ित बताए जा रहे हैं।
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ग्रामीणों का दावा है कि एक दर्जन से अधिक मरीजों को बाहरी डाक्टरों ने पीलिया बता दिया है, जिससे वह घबरा रहे हैं। जमुना प्रसाद, मोर सिंह मौर्य, विमला ,लालाराम, जयवंती, चंद्रपाल मौर्य ,शांति भूकन, नीरज कश्यप आदि का कहना है कि उनका उपचार चंदौसी, मुरादाबाद, बिलारी आदि के अस्पताल में चल रहा है, जहां उन्हें पीलिया होने का दावा किया गया है। अजुद्धी प्रसाद (50) पुत्र महिलाल की सोमवार की सुबह बुखार से मौत हो गई। उसे तीन दिन पहले बुखार आया था। जिसका रीठ के निजी चिकित्सक के क्लीनिक तथा चंदौसी में उपचार कराया था।
स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची
स्वास्थ्य विभाग को सूचना मिली कि बिलारी संयुक्त चिकित्सालय की टीम जहांगीरपुर पहुंची। आशाओं और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों द्वारा प्राथमिक विद्यालय में शिविर लगाया। डा. वीके सिंह ने टीम के साथ 135 मरीजों की स्लाइड बनाकर उनको निशुल्क दवाइयां वितरित की गई।