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Sambhal News: निजी नौकरियां छोड़कर अफसर बनीं बेटियां
Fri, 08 Mar 2024 01:44 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Fri, 08 Mar 2024 01:44 AM IST
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चंदौसी (संभल)। जिले में प्रशासनिक सेवा में आईपीएस से लेकर पीसीएस व अन्य कई बड़े पदों पर महिला अधिकारी तैनात है। इनमें से कुछ महिला अधिकारियों ने मल्टीनेशनल कंपनी में प्राइवेट जॉब की तो किसी ने विदेश में स्कॉलरशिप पर रिसर्च भी किया, लेकिन वहां आमजन से सीधे संपर्क में होने, रोजाना रूटीन का वही काम होने के कारण जॉब को बीच में ही छोड़ दी और प्रशासनिक सेवा में जाने का निर्णय लिया। प्राइवेट सेक्टर में अच्छी नौकरी छोड़ने पर परिजन सहमत नहीं थे तो उन्हें किसी तरह से मनाया। सिविल सर्विस की तैयारी कर अपने मुकाम को हासिल कर सपने को साकार किया। यह महिला अधिकारी अन्य महिलाओं के लिए एक आदर्श हैं। महिला दिवस पर अमर उजाला की ओर से कई बातचीत की एक रिपोर्ट:
पीएचडी बीच में छोड़ यूपीएससी की तैयार कर आईपीएस बनीं अनुकृति शर्मा
जिले में तैनात आईपीएस अनुकृति शर्मा मूल रूप से राजस्थान के जयपुर की रहने वाली हैं। पिता राजस्थान में विकास विभाग में डायरेक्टर के पद से सेवानिवृत्त हैं। अनुकृति शर्मा की प्रांरभिक शिक्षा सीबीएसई से हुई। आईआईटी जेई का एग्जाम देकर कोलकाता से इंजीनियरिंग की। पति वैभव मिश्रा भी आईआईटी इंजीनियर हैं। 2012 में दोनों को स्कॉलरशिप पर यूएस के ह्यूस्टन शहर में हवाई ज्वालामुखी विषय में रिसर्च का मौका मिला। रिसर्च के दौरान वहां एनआरआई से बात करते थे तो वह लोग देश की समस्याएं अधिक गिनाते थे। वहां से मन बदला। मन में आता था कि ऐसे शोध का क्या लाभ, जिसका सीधे तौर पर आमजन को लाभ न दे सकें। पति के साथ ही डेढ़ साल में रिसर्च बीच में छोड़ दिया था। सोचा इस रिसर्च का वह समाज को सीधे तौर पर कोई लाभ नहीं दे सकते हैं। वापस आते समय पति-पत्नी दोनाें ने यूपीएससी की तैयारी का मन बनाया। मायके और ससुराल में दोनों पक्ष के लोग निर्णय से सहमत नहीं थे। 2014 में प्रयागराज ससुराल में घर पर ही तैयारी की। 2018 में चौथे प्रयास में 315 रैंक के साथ आईआरएस मिला, लेकिन संतुष्टि नहीं हुई। पांचवें प्रयास में प्री-एग्जाम भी पास नहीं हुआ। छठें प्रयास में 2020 में आईपीएस मिला। संभल जनपद में मेरी दूसरी तैनाती है। पति अब दिल्ली में यूपीएससी की तैयारी कराते हैं। अनुकृति शर्मा का कहना है, जो मन कहे, वही काम करों। शोध के दौरान मन को तसल्ली नहीं मिनी, इसलिए बीच में शोध छोड़ दिया था। अब लोगों से सीधे संपर्क में रहती हूं, उनकी समस्या सुनती हूं, तो अच्छा लगता है।
टॉपर की कॉपियों से लिया सबक : नीतू रानी
पीसीएस अधिकारी नीतू रानी मूल रूप से मेरठ की रहने वाली है। पिता किसान हैं। नीतू रानी ने बताया कि मेरठ से 2012 में बीटेक करने के बाद प्राइवेट कंपनी में जाॅब शुरू कर दी थी। रोजाना वही रूटीन का काम था। अच्छा नहीं लगा तो 2014 में नौकरी छोड़ दी। शुरुआत में घर ही तैयारी की और यूपीएससी का एक्जाम दिया। पिता किसान थे। भाई, बहन भी पढ़ाई कर रहे थे। परिवार में अन्य कोई व्यक्ति सही गाइडेंस देना वाला नहीं था। इस कारण काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। इसके लिए कोचिंग ज्वाइन करनी पड़ी। यूट्यूब के माध्यम से टॉपर की कापी देखी और उनका अध्ययन किया। उन्होंने किस तरह से प्रश्नों के उत्तर दिए। वह सभी काम आए। तैयारी के बाद 2018 में यूपीपीसीएस का एग्जाम दिया। प्री एग्जाम भी पास नहीं हुआ। इसके बाद 2019 में यूपीपीसीएस उत्तीर्ण किया और ट्रेनिंग के बाद मथुरा में पहली पोस्टिंग मिली। संभल में दूसरी पोस्टिंग है। अब भाई ने प्राइवेट कंपनी की जॉब छोड़ दी है और उन्हें देखकर ही यूपीएससी की तैयार कर रहा है।
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बिना कोचिंग पाई सफलता : वंदना मिश्रा
पीसीएस अधिकारी और चंदौसी में एसडीएम न्यायिक के पद पर तैनात वंदना मिश्रा मूल रूप से जनपद देवरिया की रहने वाली हैं। उन्होंने बताया कि पिता इंटर कॉलेज में प्रवक्ता थे, जो सेवानिवृत्त हो चुके हैं। दो भाई हैं, जो अधिवक्ता हैं। घर में शुरुआत से ही पढ़ाई का माहौल मिला। यूपीपीसीएस की तैयारी में कोई परेशानी महसूस नहीं हुई। किसी तरह की कोई कोचिंग नहीं ली। घर पर सेल्फ स्टडी की। उन्होंने बताया कि पढ़ाई के लिए माहौल मिले और लक्ष्य बनाकर काम करें तो सफलता अवश्य मिलती है। इसी का परिणाम है कि वर्ष 2013 में पहले प्रयास में ही यूपीपीसीएस की परीक्षा उत्तीर्ण की। पहली तैनाती वाराणसी, दूसरी जिला चंदौली और तीसरी तैनाती जिला संभल में है। उन्होंने बताया कि शुरुआती शिक्षा कस्बे में पूरी की। घर के माहौल के कारण भाषाई दिक्कत नहीं आई।
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पीएचडी बीच में छोड़ यूपीएससी की तैयार कर आईपीएस बनीं अनुकृति शर्मा
जिले में तैनात आईपीएस अनुकृति शर्मा मूल रूप से राजस्थान के जयपुर की रहने वाली हैं। पिता राजस्थान में विकास विभाग में डायरेक्टर के पद से सेवानिवृत्त हैं। अनुकृति शर्मा की प्रांरभिक शिक्षा सीबीएसई से हुई। आईआईटी जेई का एग्जाम देकर कोलकाता से इंजीनियरिंग की। पति वैभव मिश्रा भी आईआईटी इंजीनियर हैं। 2012 में दोनों को स्कॉलरशिप पर यूएस के ह्यूस्टन शहर में हवाई ज्वालामुखी विषय में रिसर्च का मौका मिला। रिसर्च के दौरान वहां एनआरआई से बात करते थे तो वह लोग देश की समस्याएं अधिक गिनाते थे। वहां से मन बदला। मन में आता था कि ऐसे शोध का क्या लाभ, जिसका सीधे तौर पर आमजन को लाभ न दे सकें। पति के साथ ही डेढ़ साल में रिसर्च बीच में छोड़ दिया था। सोचा इस रिसर्च का वह समाज को सीधे तौर पर कोई लाभ नहीं दे सकते हैं। वापस आते समय पति-पत्नी दोनाें ने यूपीएससी की तैयारी का मन बनाया। मायके और ससुराल में दोनों पक्ष के लोग निर्णय से सहमत नहीं थे। 2014 में प्रयागराज ससुराल में घर पर ही तैयारी की। 2018 में चौथे प्रयास में 315 रैंक के साथ आईआरएस मिला, लेकिन संतुष्टि नहीं हुई। पांचवें प्रयास में प्री-एग्जाम भी पास नहीं हुआ। छठें प्रयास में 2020 में आईपीएस मिला। संभल जनपद में मेरी दूसरी तैनाती है। पति अब दिल्ली में यूपीएससी की तैयारी कराते हैं। अनुकृति शर्मा का कहना है, जो मन कहे, वही काम करों। शोध के दौरान मन को तसल्ली नहीं मिनी, इसलिए बीच में शोध छोड़ दिया था। अब लोगों से सीधे संपर्क में रहती हूं, उनकी समस्या सुनती हूं, तो अच्छा लगता है।
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टॉपर की कॉपियों से लिया सबक : नीतू रानी
पीसीएस अधिकारी नीतू रानी मूल रूप से मेरठ की रहने वाली है। पिता किसान हैं। नीतू रानी ने बताया कि मेरठ से 2012 में बीटेक करने के बाद प्राइवेट कंपनी में जाॅब शुरू कर दी थी। रोजाना वही रूटीन का काम था। अच्छा नहीं लगा तो 2014 में नौकरी छोड़ दी। शुरुआत में घर ही तैयारी की और यूपीएससी का एक्जाम दिया। पिता किसान थे। भाई, बहन भी पढ़ाई कर रहे थे। परिवार में अन्य कोई व्यक्ति सही गाइडेंस देना वाला नहीं था। इस कारण काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। इसके लिए कोचिंग ज्वाइन करनी पड़ी। यूट्यूब के माध्यम से टॉपर की कापी देखी और उनका अध्ययन किया। उन्होंने किस तरह से प्रश्नों के उत्तर दिए। वह सभी काम आए। तैयारी के बाद 2018 में यूपीपीसीएस का एग्जाम दिया। प्री एग्जाम भी पास नहीं हुआ। इसके बाद 2019 में यूपीपीसीएस उत्तीर्ण किया और ट्रेनिंग के बाद मथुरा में पहली पोस्टिंग मिली। संभल में दूसरी पोस्टिंग है। अब भाई ने प्राइवेट कंपनी की जॉब छोड़ दी है और उन्हें देखकर ही यूपीएससी की तैयार कर रहा है।
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बिना कोचिंग पाई सफलता : वंदना मिश्रा
पीसीएस अधिकारी और चंदौसी में एसडीएम न्यायिक के पद पर तैनात वंदना मिश्रा मूल रूप से जनपद देवरिया की रहने वाली हैं। उन्होंने बताया कि पिता इंटर कॉलेज में प्रवक्ता थे, जो सेवानिवृत्त हो चुके हैं। दो भाई हैं, जो अधिवक्ता हैं। घर में शुरुआत से ही पढ़ाई का माहौल मिला। यूपीपीसीएस की तैयारी में कोई परेशानी महसूस नहीं हुई। किसी तरह की कोई कोचिंग नहीं ली। घर पर सेल्फ स्टडी की। उन्होंने बताया कि पढ़ाई के लिए माहौल मिले और लक्ष्य बनाकर काम करें तो सफलता अवश्य मिलती है। इसी का परिणाम है कि वर्ष 2013 में पहले प्रयास में ही यूपीपीसीएस की परीक्षा उत्तीर्ण की। पहली तैनाती वाराणसी, दूसरी जिला चंदौली और तीसरी तैनाती जिला संभल में है। उन्होंने बताया कि शुरुआती शिक्षा कस्बे में पूरी की। घर के माहौल के कारण भाषाई दिक्कत नहीं आई।