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फंदा लगाने के बाद भी युवक को जिंदा दिखाने की कोशिश करती रही पुलिस

Sat, 14 May 2016 01:24 AM IST
ब्यूराे/अमर उजाला, संभल
ब्यूराे/अमर उजाला, संभल Updated Sat, 14 May 2016 01:24 AM IST
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police saved himself in case
रोते बिलखते पहुंचे परिजन।
थानों में बड़े-बड़े बोर्ड पर मानवाधिकार के नियम-कायदे साफ-साफ लफ्जों में लिखे होने के बावजूद इसका अमल नहीं किया जाता। पुलिस की ओर से थर्ड डिग्री दिए जाने पर फांसी लगाने वाले युवक रामनरेश के खिलाफ कोई एफआईआर तक दर्ज नहीं थी। लेकिन लड़की की बरामदगी के लिए पुलिस वालों ने उसका इतना उत्पीड़न किया कि उसे आत्मघाती कदम उठा लिया। सूत्र तो यहां तक बताते हैं कि पुलिस ने फांसी लगाने के बाद भी काफी कोशिश की कि कोई डाक्टर उसे अपने पास आने पर जीवित होने का प्रमाणपत्र दे दे जिससे वे इलाज के दौरान उसकी मौत दिखा सकें।
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डाक्टरों और पुलिस कप्तान की सख्ती के बाद थाना पुलिस की कोशिश नाकाम हो गई। इस कवायद में थानेदार समेत सात पुलिस कर्मी नप गए। एसपी संभल अतुल सक्सेना का कहना है कि वारदात के समय थाने में मौजूद व पकड़कर लाने के उत्तरदायी धनारी थानाध्यक्ष ब्रजेश कुमार यादव, उपनिरीक्षक हरी सिंह, कांस्टेबल ब्रजेश कुमार,  चंद्रपाल,  विनोद कुमार, विजयपाल,  ऊषा रानी को तत्काल निलंबित कर दिया है। 
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यह था मामला ः धनारी थाने के एक गांव की सोलह साल की युवती को रजपुरा थाने का एक युवक रंजीत सात अप्रैल को बहला फुसलाकर भगा ले गया था, जिसका मुकदमा 11 अप्रैल-2016 को दर्ज किया गया। गुरुवार को  पुलिस प्रेमी युवक रंजीत की ननिहाल में अलीगढ़ जिले के गंगीरी थाने के रहतोली गांव पहुंची। प्रेमी युवक व युवती तो नहीं मिली लेकिन दबाव बनाने को युवक के ममेरे भाई रामनरेश (35) पुत्र लाल सिंह को पकड़ लाया। शुक्रवार को दोपहर करीब एक बजे उसने उत्पीड़न से तंग आकर अपनी ही शर्ट को हवालात के शौचालय के ऊंचे दरवाजे में फंसाकर फंदा बनाया और उससे लटककर आत्महत्या कर ली।
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