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इत्तेहादे उम्मत कांफ्रेंस में इल्मेदीन सीखने की दी नसीहत
ब्यूरो/अमर उजाला संभल
Updated Fri, 13 Nov 2015 12:29 AM IST
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हजरत मखदूम अशरफ जहांगीर के उर्स के मौके पर बुधवार को इत्तेहादे उम्मत कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। उलेमा ने हजरत मखदूम अशरफ सिमनानी की करामातों को बयान किया। बुर्जुगाने दीन के फैलाए हुए सूफी इज्म पर अमल करने को कहा। चौधरी सराय स्थित दारुल उलूम मखदूमिया में कांफ्रेंस संपन्न हुई।
जिसकी शुरुआत कारी जाने आलम ने तिलावते कुरान-ए-पाक व हाफिज मोहम्मद वसीम ने नाते रसूल पढ़कर की। इमामे ईदगाह हजरत मौलाना सुलेमान अशरफ हामिदी अशरफी ने कहा कि पूरी दुनिया में हुसैनी सादात की एक तन्हा सल्तनत की बागडोर मखदूमे सिमनानी को 15 साल की उम्र में दी गई।
जिसको उन्होंने बखूबी अंजाम देते हुए बिशारते सरकारे दो आलम पाकर दीन की तबलीग और इंसानियत के पैगाम को आम करने के लिए हिंदुस्तान कीी राह अख्तियार की और फैजाबाद के कारीब किछौछा में कायम किया। काईद एहलेसुन्नत मौलाना नफीस अख्तर अशरफी ने बुजुर्गों के उर्सों में हो रहे बेहूदा कामों को रोकने का आह्वान किया।
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मौलाना महबूब रजा वास्ती, डा.काजिम अशरफी, मौलाना मुफ्ती कासिम मिस्बाही, मौलाना दानिश मिस्बाही, कारी मोअज्जम रजा, कारी बुरहान अशरफ हामिदी, मौलाना कामिल मिस्बाही, कारी मुदस्सिर, चौधरी अशरफ अली, शकील मेंबर, इनामुर्रहमान खां, सईद अख्तर इस्राइली आदि मौजूद रहे।
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जिसकी शुरुआत कारी जाने आलम ने तिलावते कुरान-ए-पाक व हाफिज मोहम्मद वसीम ने नाते रसूल पढ़कर की। इमामे ईदगाह हजरत मौलाना सुलेमान अशरफ हामिदी अशरफी ने कहा कि पूरी दुनिया में हुसैनी सादात की एक तन्हा सल्तनत की बागडोर मखदूमे सिमनानी को 15 साल की उम्र में दी गई।
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जिसको उन्होंने बखूबी अंजाम देते हुए बिशारते सरकारे दो आलम पाकर दीन की तबलीग और इंसानियत के पैगाम को आम करने के लिए हिंदुस्तान कीी राह अख्तियार की और फैजाबाद के कारीब किछौछा में कायम किया। काईद एहलेसुन्नत मौलाना नफीस अख्तर अशरफी ने बुजुर्गों के उर्सों में हो रहे बेहूदा कामों को रोकने का आह्वान किया।
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मौलाना महबूब रजा वास्ती, डा.काजिम अशरफी, मौलाना मुफ्ती कासिम मिस्बाही, मौलाना दानिश मिस्बाही, कारी मोअज्जम रजा, कारी बुरहान अशरफ हामिदी, मौलाना कामिल मिस्बाही, कारी मुदस्सिर, चौधरी अशरफ अली, शकील मेंबर, इनामुर्रहमान खां, सईद अख्तर इस्राइली आदि मौजूद रहे।