दो झोलाछाप पकड़े, क्लीनिक सील
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दोनों फर्जी चिकित्सकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए। उनके क्लीनिक भी सील कर दिए गए। डिप्टी सीएमओ ने हयातनगर थाने में तहरीर दी है। एसडीएम जेबी सिंह बुधवार को दोपहर तहसीलदार अरविंद तिवारी के साथ क्षेत्र में भ्रमण पर निकले थे। जब यह अधिकारी नारंगपुर तालाब का निरीक्षण कर रहे थे।
तभी फर्जी डाक्टर अपने क्लीनिक बंद करके भागने की तैयारी में थे। इसी दौरान सरकारी कर्मचारियों की निगाह उन पर पड़ गई। कर्मचारियों ने दोनों को पकड़ लिया और इसके दोनों को पुलिस के हवाले करा दिया। डिप्टी सीएमओ डा. कप्तान सिंह को मौके पर बुलाया गया।
डिप्टी सीएमओ कप्तान सिंह ने बताया कि चूहरपुर निवासी इंद्रपाल यादव पुत्र राजपाल यादव और मोतीनगर निवासी चंद्रपाल पुत्र भागीरथ बिना किसी पंजीकरण के क्लीनिक चला रहे थे। दोनों के क्लीनिक सील किए गए हैं। दोनों के खिलाफ हयातनगर थाने में मुकदमा दर्ज कराने के लिए तहरीर दी गई है।
वहीं नारंगपुर गांव में कापी किताबों की दुकान से दवाओं की बिक्री की जा रही थी। मौके पर 33 दवाएं मिलीं हैं। इसमें पांच दवाओं के नमूने परीक्षण के लिए भेजे गए हैं। दवाएं औषधि निरीक्षक ने अपने कब्जे में लीं और सभी दवाओं को सील किया गया है। अवैध तरीके से दवाओं की बिक्री पर रोक लगाई गई है।
सहायक आयुक्त औषधि एके जैन के पास किसी व्यक्ति ने गोपनीय शिकायत की थी जिसमें कहा गया था कि नारंगपुर गांव में फर्जी तरीके से मेडिकल स्टोर संचालित है। आयुक्त ने अमरोहा के औषधि निरीक्षक पीयूष कुमार और संभल के औषधि निरीक्षक आशुतोष चौबे को शामिल करते हुए टीम का गठन किया गया।
टीम के अधिकारी बुधवार को दोपहर गांव पहुंच गए। गांव में लव बुक स्टोर के नाम से एक दुकान थी जिसमें दवाएं भी रखी हुईं थीं। दवाओं को अधिकारियों ने अपने कब्जे में लिया लेकिन दुकानदार हाथ नहीं आया। दुकानदार का भाई आया उसने छापे और चेकिंग का विरोध किया। हल्की फुल्की बहस की लेकिन जब उसे औषधि निरीक्षक ने समझाया तो वह मान गया। इसके बाद कानूनी कार्रवाई में उसने भी सहयोग दिया। औषधि निरीक्षक आशुतोष चौबे ने बताया कि उन्होंने इस मामले में रवि कुमार पुत्र वीरपाल के खिलाफ तहरीर दी है।