फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sambhal News ›   छतीस घंटे बाद भी अगवा मासूम ग्रंथ का कोई सुराग नहीं

छतीस घंटे बाद भी अगवा मासूम ग्रंथ का कोई सुराग नहीं

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 04 May 2019 01:23 AM IST
विज्ञापन
छतीस घंटे बाद भी अगवा मासूम ग्रंथ का कोई सुराग नहीं
चंदौसी। गुरुवार को दोपहर को शहर की प्रेमनगर कालोनी से आठ माह के मासूम ग्रंथ का अपहरण होने के छत्तीस घंटे बाद भी पुलिस अभी तक कोई सुराग नहीं लगा सकी है। जबकि अपने लाड़ले की सकुशल वापसी के लिए परिजन चिंतित हैं। मां के आंसू ठहर नहीं रहे हैं। हर समय दरवाजे की ओर टकटकी निहार रही है कि कहीं कोई उसके लाड़ले को लेकर आ जाए। पुलिस ने एक अज्ञात महिला के खिलाफ अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
विज्ञापन

गुरुवार को दोपहर के समय जब परिजन खेत खलिहान पर गए, पिता सुखवीर दिवाकर सब्जी बेचने चला गया तो उसी समय मां गुड्डो पर कुछ पलों के लिए अपने लाडले को नीचे सोता छोड़कर छत पर गई। इसी बीच उसका बेटा लापता हो गया।
विज्ञापन

परिजनों ने पहले तो लापता ग्रंथ की उम्र ग्यारह माह बताई थी लेकिन पुलिस को दी गई तहरीर में ग्रंथ की उम्र आठ माह लिखी गई है। पिता सुखवीर दिवाकर की तहरीर पर पुलिस ने एक अज्ञात महिला के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज कर लिया है। जांच पड़ताल शुरू कर दी गई है। टीमों का गठन कर दिया गया है। सर्विलांस टीम ने भी काम करना शुरू कर दिया है। शक के आधार पर सुखवीर दिवाकर के एक पड़ोसी को भी कोतवाली लाया गया है, जिससे पूछताछ की जा रही है। कुछ समय पहले पड़ोसी से विवाद हो गया था। लेकिन अभी तक बालक की बरामदगी की दिशा में कोई ठोस सुराग नहीं लगा है। कोतवाली प्रभारी ऋषिराम कठेरिया ने बताया कि सुखवीर की तहरीर पर अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

सभी बिंदुओं को बारीकी से देखा जा रहा है। पुलिस का प्रयास है कि शीघ ही बच्चे की सकुशल बरामदगी हो सके। इधर मासूम ग्रंथ की मां गुड्डो का बुरा हाल है। रोते रोते उसके आंखों के आंसू सूख चुके हैं। ना तो खाना खा रही है और ना ही सो पा रही है। हर समय उसकी निगाहे दरवाजे पर टिकी रहती है। उसे लगता है कि कोई आएगा, उसके लाडले को लाएगा और उसकी गोद में डाल देगा।
लेकिन अपहरण के छत्तीस घंटे बाद भी अभी तक उसके बेटे का कोई सुराग नहीं लग सका है। परिजन भी गमजदा हैं। हर कोई अपनी तरह से कयास लगा रहा है कि इतने छोटे बच्चे का अपहरण आखिर क्यों किया गया होगा। क्योंकि फिरौती मांगने का भी कोई मामला सामने नहीं आ रहा है। क्योंकि परिवार सब्जी बेचता है। इस लायक नहीं है कि फिरौती दे सके।

बच्चों के भविष्य को सुखमय बनाने की चाहत शहर खींच लाई
चंदौसी। अगवा हुए ग्रंथ के पिता सुखवीर दिवाकर का पूरा परिवार बरेली जिले की तहसील आंवला के मदपुरी गांव का है। बताते हैं कि गांव दूरस्थ था। ना कोई स्कूल की व्यवस्था थी और ही कारोबार का कोई साधन उपलब्ध था। अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने और कारोबार के लिए सुखवीर दिवाकर व उसके चार अन्य भाई चार साल पहले मदपुरी से चंदौसी आ गए। सभी पांच भाइयों राजवीर, सत्यवीर, जसवीर, जगवीर व सुखवीर ने चंदौसी की प्रेमनगर कालोनी में ही बराबर बराबर मकान बना लिया था। सुखवीर सब्जी बेचने लगा। कारोबार अच्छा चला। बच्चे भी सभी के अच्छे स्कूलों में पढ़ने लगे।


चंदौसी से सालभर पहले भी अगवा कर ली गई थी मासूम बालिका
चंदौसी। मुरादाबाद के कटघर थाना क्षेत्र के रोड़ाझोडा गांव निवासी एक महिला मंजू अक्सर रेलवे स्टेशन चंदौसी पर घूमती थी। यहीं लोगों से मांग कर खाना खा लेती थी। रेलवे स्टेशन पर ही सो जाती थी। बताते हैं कि 12 अप्रैल-2018 को जब वह महिला स्टेशन परिसर में सो गई तो कोई उसकी डेढ़ साल की बेटी तनु को उठा ले गया। जिसका मुकदमा भी जीआरपी थाने में दर्ज किया गया लेकिन बच्ची का आज तक पता नहीं चला है। पुलिस ने बताया कि तनु के माता-पिता पहले हिमाचल प्रदेश में रहते थे। मजदूरी करते थे। वहां से भी उनकी एक बेटी को कोई अगवा कर ले गया था लेकिन उसका पता चल गया था लेकिन गरीबी और पालने की समस्या के कारण उन्होंने उस बेटी को उसी व्यक्ति को दे दिया था, जो उसकी बेटी को उठाकर ले गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed