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छछैरा गांव में नाला निर्माण का विरोध, ग्रामीणों का पुलिस से टकराव और पथराव
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संभल। नाला निर्माण को लेकर चल रहे विरोध को खत्म करने पहुंची पुलिस का छछैरा गांव में रविवार की सुबह साढ़े दस बजे ग्रामीणों से टकराव हो गया। हंगामे और अफरातफरी भरे माहौल में पुलिस ने ग्रामीणों को पुलिसिया लहजे में समझाया और डंडा दिखाया तो गुस्साए ग्रामीणों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। पुलिसकर्मियों को मौके से भागना पड़ा। वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने हवाई फायरिंग कर उन्हें खदेड़ा है। ग्रामीणों ने कहा कि पुलिस ने अभद्रता की है। पुलिस के डंडे से महिलाओं समेत कई ग्रामीणों को चोट लगी है लेकिन वह इसलिए अपनी शिकायत दर्ज कराने नहीं जा रहे हैं कि पुलिस उल्टे उन्हें ही फंसा देगी। गांव के एक युवक ने पुलिस की गोली करीब से छूकर निकलने की बात कही है। दूसरी ओर पुलिस ने फायरिंग से इनकार किया है।
रविवार की सुबह साढ़े दस बजे करीब कोतवाली क्षेत्र के गांव छछैरा में ग्राम प्रधान नाला निर्माण के लिए जेसीबी से खुदाई करा रहे थे। इसी दौरान गांव के कुछ लोगों ने कहा कि अगर नाला खुदा तो बच्चों के कब्रिस्तान की ओर पानी आएगा और अगर कब्रिस्तान पर पानी भर गया तो वे बच्चों को कहां दफनाएंगे। इसीलिए वे खुदाई का काम रुकवाना चाहते हैं। जब उन्होंने खुदाई का विरोध किया तो ग्राम प्रधान ने मौके पर पुलिस बुला ली। मौके पर पहुंची पुलिस ने ग्रामीणों से खुदाई कार्य कराने के लिए कहा लेकिन ग्रामीण लगातार विरोध करते रहे। ग्रामीणों से पुलिस की कहासुनी होने लगी।
इसी बात से गुस्साई पुलिस ने ग्रामीणों पर बल प्रयोग किया। उन्हें पुलिसिया धौंस में लेने का प्रयास करते हुए डंडा उठा लिया। पुलिस ने डंडा चलाया तो ग्रामीणों का गुस्सा बढ़ गया। पुलिस के डंडे से एक दो लोगों को चोट लगी। इस पर ग्रामीणों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। पथराव होने के साथ ही पुलिसकर्मी मौके से भागने लगे। एक पुलिसकर्मी ने एक घर में दुकान में घुसकर खुद को बचाया।
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जब कोतवाली से पुलिस बल मौके पर पहुंचा तब वह घर से निकल आए। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने उनकी ओर हवाई फायरिंग किए। वहीं दूसरी ओर पुलिस फायरिंग करने की बात से इनकार कर रही है। कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक धर्मपाल सिंह भारी पुलिस बल और दंगा नियंत्रण वाहन को लेकर घटना स्थल पर पहुंचे। वहां से लौटने के बाद उन्होंने बताया कि ग्रामीणों ने हंगामा करते हुए नाले की खुदाई का काम रोका है। इस मामले में ग्राम पंचायत सचिव की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज की जा रही है। पुलिस की ओर से अभी कोई मामला दर्ज नहीं किया गया। जो पुलिसकर्मी मौके पर गए थे। उनके बयान लेकर ग्राम पंचायत सचिव की ओर से दर्ज मामले में ही उसे शामिल किया जाएगा। जिन लोगों ने कानून को अपने हाथ में लिया है उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
पहले से था टकराव का अंदेशा
संभल। मनरेगा योजना के तहत तालाब तक नाले को खोदा जाना था। इसमें विरोध का अंदेशा था। इसीलिए ग्राम विकास अधिकारी और पंचायत सचिव भुवनेश सिंह ने खंड विकास अधिकारी को अवगत कराया था। खंड विकास अधिकारी ने प्रभारी निरीक्षक को पत्र भेजा था। प्रभारी निरीक्षक से खंड विकास अधिकारी ने पुलिस बल उपलब्ध कराने के लिए कहा था। प्रभारी निरीक्षक ने टांडा चौकी पुलिस को भेजा था। टांडा के चौकी इंचार्ज अवधेश कुमार का कहना है कि वह मौके पर गए थे। पुलिस ने न तो बल प्रयोग किया और न ही हवाई फायर किया। ग्रामीणों ने पथराव किया था। इस पर ग्राम विकास अधिकारी की ओर से रिपोर्ट दर्ज कराई जा रही है। वहीं उप जिलाधिकारी दीपेंद्र यादव का कहना है कि उन्हें इस तरह के मामले से अवगत नहीं कराया गया था। अन्यथा की स्थिति में वह व्यापक पुलिस बल को मौके पर भेजते।
गांव के एक हिस्से में जलभराव की समस्या
संभल। ग्राम प्रधान जरीफ अहमद ने कहा कि गांव के एक हिस्से में जल भराव की समस्या है। उसके समाधान के लिए खंड विकास अधिकारी के आदेश से रविवार को नाला खोदा जा रहा था लेकिन कुछ लोगों ने विरोध किया और पथराव कर दिया। इससे काम रुक गया है। जिस वक्त घटना हुई वह गांव में नहीं थे।
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रविवार की सुबह साढ़े दस बजे करीब कोतवाली क्षेत्र के गांव छछैरा में ग्राम प्रधान नाला निर्माण के लिए जेसीबी से खुदाई करा रहे थे। इसी दौरान गांव के कुछ लोगों ने कहा कि अगर नाला खुदा तो बच्चों के कब्रिस्तान की ओर पानी आएगा और अगर कब्रिस्तान पर पानी भर गया तो वे बच्चों को कहां दफनाएंगे। इसीलिए वे खुदाई का काम रुकवाना चाहते हैं। जब उन्होंने खुदाई का विरोध किया तो ग्राम प्रधान ने मौके पर पुलिस बुला ली। मौके पर पहुंची पुलिस ने ग्रामीणों से खुदाई कार्य कराने के लिए कहा लेकिन ग्रामीण लगातार विरोध करते रहे। ग्रामीणों से पुलिस की कहासुनी होने लगी।
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इसी बात से गुस्साई पुलिस ने ग्रामीणों पर बल प्रयोग किया। उन्हें पुलिसिया धौंस में लेने का प्रयास करते हुए डंडा उठा लिया। पुलिस ने डंडा चलाया तो ग्रामीणों का गुस्सा बढ़ गया। पुलिस के डंडे से एक दो लोगों को चोट लगी। इस पर ग्रामीणों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। पथराव होने के साथ ही पुलिसकर्मी मौके से भागने लगे। एक पुलिसकर्मी ने एक घर में दुकान में घुसकर खुद को बचाया।
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जब कोतवाली से पुलिस बल मौके पर पहुंचा तब वह घर से निकल आए। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने उनकी ओर हवाई फायरिंग किए। वहीं दूसरी ओर पुलिस फायरिंग करने की बात से इनकार कर रही है। कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक धर्मपाल सिंह भारी पुलिस बल और दंगा नियंत्रण वाहन को लेकर घटना स्थल पर पहुंचे। वहां से लौटने के बाद उन्होंने बताया कि ग्रामीणों ने हंगामा करते हुए नाले की खुदाई का काम रोका है। इस मामले में ग्राम पंचायत सचिव की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज की जा रही है। पुलिस की ओर से अभी कोई मामला दर्ज नहीं किया गया। जो पुलिसकर्मी मौके पर गए थे। उनके बयान लेकर ग्राम पंचायत सचिव की ओर से दर्ज मामले में ही उसे शामिल किया जाएगा। जिन लोगों ने कानून को अपने हाथ में लिया है उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
पहले से था टकराव का अंदेशा
संभल। मनरेगा योजना के तहत तालाब तक नाले को खोदा जाना था। इसमें विरोध का अंदेशा था। इसीलिए ग्राम विकास अधिकारी और पंचायत सचिव भुवनेश सिंह ने खंड विकास अधिकारी को अवगत कराया था। खंड विकास अधिकारी ने प्रभारी निरीक्षक को पत्र भेजा था। प्रभारी निरीक्षक से खंड विकास अधिकारी ने पुलिस बल उपलब्ध कराने के लिए कहा था। प्रभारी निरीक्षक ने टांडा चौकी पुलिस को भेजा था। टांडा के चौकी इंचार्ज अवधेश कुमार का कहना है कि वह मौके पर गए थे। पुलिस ने न तो बल प्रयोग किया और न ही हवाई फायर किया। ग्रामीणों ने पथराव किया था। इस पर ग्राम विकास अधिकारी की ओर से रिपोर्ट दर्ज कराई जा रही है। वहीं उप जिलाधिकारी दीपेंद्र यादव का कहना है कि उन्हें इस तरह के मामले से अवगत नहीं कराया गया था। अन्यथा की स्थिति में वह व्यापक पुलिस बल को मौके पर भेजते।
गांव के एक हिस्से में जलभराव की समस्या
संभल। ग्राम प्रधान जरीफ अहमद ने कहा कि गांव के एक हिस्से में जल भराव की समस्या है। उसके समाधान के लिए खंड विकास अधिकारी के आदेश से रविवार को नाला खोदा जा रहा था लेकिन कुछ लोगों ने विरोध किया और पथराव कर दिया। इससे काम रुक गया है। जिस वक्त घटना हुई वह गांव में नहीं थे।