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बजट के अभाव में लटका ओवरहेड टैंक का निर्माण कार्य
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संभल। सैफ खां सराय गांव में बजट के अभाव में ओवरहेड टैंक का निर्माण कार्य अधर में लटक गया है। ग्रामीण पेयजल योजना के तहत तीन करोड़ की लागत से इसका निर्माण कार्य पूरा किया जाना है। वर्ष-2014 में निर्माण कार्य के लिए पचास फीसदी धनराशि अवमुक्त की गई थी। जिससे कुछ ओवरहेड टैंक का निर्माण कार्य तो कुछ गांव में जलापूर्ति के लिए पाइप लाइन बिछाई गई। फिलहाल अब काम बंद है और ग्रामीणों को पीने के लिए स्वच्छ पेयजल नहीं मिल रहा है। जिससे उनमें रोष है।
शहर से सटे गांव सैफ खां सराय में करीब बीस हजार की आबादी है। स्वच्छ पानी पीने के लिए इस आबादी को उपलब्ध नहीं है। वर्ष-2014 में स्वच्छ पेयजल के लिए गांव में मल्टी सेक्टोरल डवलपमेंट प्लान के अंतर्गत तीन करोड़ की लागत से स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति के लिए कार्य शुरू कराया गया। ओवरहेड टैंक के निर्माण से लेकर जलापूर्ति के लिए पाइपलाइन और संचालन के लिए सारी व्यवस्था इसी धनराशि से की जानी है।
जल निगम के अवर अभियंता विशाल रुहेला ने बताया कि वर्ष-2014 में योजना के तहत खर्च होने वाली धनराशि में से आधी धनराशि शासन स्तर से स्वीकृत हुई थी, जिससे करीब 65 फीसदी कार्य कराया गया। उसके बाद धन का आवंटन नहीं हुआ। जिलाधिकारी के माध्यम से कई बार शासन स्तर पर पत्राचार हुआ, लेकिन अब तक धन का आवंटन नहीं हुआ। जिसकी वजह से निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका। दूसरी ओर से काम के बंद होने से ग्रामीणों की उम्मीद अब मंद पड़ने लगी है। उनका कहना है कि शुरू में जो काम हुआ, उससे लग रहा था कि जल्द ही स्वच्छ पेयजल मिलने लगेगा, लेकिन अब तक पेयजल नहीं मिला। अब काम को बंद हुए कई साल बीत गए हैं। कोई ध्यान देने को तैयार नहीं हैं।
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शहर से सटे गांव सैफ खां सराय में करीब बीस हजार की आबादी है। स्वच्छ पानी पीने के लिए इस आबादी को उपलब्ध नहीं है। वर्ष-2014 में स्वच्छ पेयजल के लिए गांव में मल्टी सेक्टोरल डवलपमेंट प्लान के अंतर्गत तीन करोड़ की लागत से स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति के लिए कार्य शुरू कराया गया। ओवरहेड टैंक के निर्माण से लेकर जलापूर्ति के लिए पाइपलाइन और संचालन के लिए सारी व्यवस्था इसी धनराशि से की जानी है।
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जल निगम के अवर अभियंता विशाल रुहेला ने बताया कि वर्ष-2014 में योजना के तहत खर्च होने वाली धनराशि में से आधी धनराशि शासन स्तर से स्वीकृत हुई थी, जिससे करीब 65 फीसदी कार्य कराया गया। उसके बाद धन का आवंटन नहीं हुआ। जिलाधिकारी के माध्यम से कई बार शासन स्तर पर पत्राचार हुआ, लेकिन अब तक धन का आवंटन नहीं हुआ। जिसकी वजह से निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका। दूसरी ओर से काम के बंद होने से ग्रामीणों की उम्मीद अब मंद पड़ने लगी है। उनका कहना है कि शुरू में जो काम हुआ, उससे लग रहा था कि जल्द ही स्वच्छ पेयजल मिलने लगेगा, लेकिन अब तक पेयजल नहीं मिला। अब काम को बंद हुए कई साल बीत गए हैं। कोई ध्यान देने को तैयार नहीं हैं।
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