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Sambhal News: चंदाैसी पुलिस दो दिन तक पीटती रही, बोली-कबूल करो गोली तुमने ही मारी है
Sun, 08 Sep 2024 05:49 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Sun, 08 Sep 2024 05:49 AM IST
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चंदौसी (संभल)। भाजपा नेता प्रेमपाल की साजिश में जेल भेजे गए बेगुनाह श्यामलाल और हेमंत घटना का राजफाश होने के बाद शनिवार को रिहा होने पर घर पहुंचे तो उन्होंने पुलिस की मनमानी बयां की। बोले, जुल्म तो हमारे साथ हुआ। दो दिन तक पुलिस ने पीटती रही और कहती थी कबूल कर लो गोली तुमने मारी है। दो दिन पुलिस की प्रताड़ना झेलने के बाद उन्होंने कबूल नहीं किया, जिसके बाद झूठे मुकदमे में जेल भेज दिया। जेल में 37 दिन घुटन के साथ काटे। भला हो डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का जो उन्होंने हमारी सुनी। तीसरा बेगुनाह दिलीप सोमवार को रिहा हो सकेगा।
कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला लोधियान निवासी श्यामलाल ने बताया कि 27 जुलाई की रात करीब 12 बजे पांच पुलिसकर्मी उनके घर में घुस आए थे। सोते से उठाने के बाद दिलीप और हेमंत के घर ले गए। वहां उनको भी सोते से ही उठाया और तीनों को कोतवाली लाकर पिटाई शुरू कर दी। पुलिसकर्मी पिटाई करने के साथ कह रहे थे कि कबूल कर लो कि भाजपा नेता प्रेमपाल सिंह को गोली तुमने मारी है। जब गोली मारने की बात कबूल नहीं की गई तो दो रात तक पिटाई की। 29 जुलाई की सुबह तमंचा व डंडा लगाकर जेल भेज दिया। श्यामलाल ने बताया कि प्रेमपाल से उनकी कोई रंजिश नहीं है। वह मोहल्ले में राशन डीलर है। बताया कि दिलीप और हेमंत की 11 बीघा जमीन बदायूं के गांव परौली में है। उस जमीन को प्रेमपाल सिंह अपने नाम करने का दबाव बना रहा था। जब दिलीप और हेमंत दबाव में नहीं आए तो 10 लाख रुपये उधार होने की झूठी कहानी रच रहा था। श्यामलाल ने बताया कि प्रेमपाल सिंह चाहता था कि 10 लाख रुपये उधार होने की गवाही पुलिस को दे दे, लेकिन जब उसने मना किया तो वह खफा हो गया। इसलिए दिलीप और हेमंत के साथ उन्हें भी फंसा दिया। आरोपी बनवा दिया।
53 लाख की जमीन को चाहता था हड़पना इसलिए रची साजिश
त्रिवेणी देवी की पुश्तैनी चार बीघा जमीन शहर से लगी थी। उसको 60 लाख रुपये में बेच दिया था और बदायूं के गांव परौली में 11 बीघा जमीन 53 लाख रुपये की खरीद ली थी, उस समय पर कब्जा ग्रामीणों ने नहीं होने दिया। इसलिए त्रिवेणी देवी और दोनों बेटे परेशान थे। इसकी जानकारी प्रेमपाल सिंह को लगी तो वह काफी समय पहले त्रिवेणी के घर पहुंचा और जमीन खरीदने की बात कही थी। एक लाख रुपया भी एडवांस दिया और तीन महीने में जमीन का पूरा भुगतान करने और नाम कराने की बात कही थी। समय पूरा हो गया तो प्रेमपाल सिंह ने जमीन का बैनामा कराने की बात कही और बैनामा होने के बाद भुगतान करने के लिए कहा। इस पर त्रिवेणी और उनके दोनों बेटे राजी नहीं हुए। इसलिए उसने 27 जुलाई की रात को गोली मारने की झठी कहानी रच डाली।
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दिलीप चलाता है ई-रिक्शा और हेमंत करता है खेती की मजदूरी
त्रिवेणी के दो ही बेटे हैं। इसमें दिलीप शादीशुदा है और पांच बच्चों का पिता है। ई-रिक्शा चलाकर परिवार की गुजर करता है। हेमंत अविवाहित है और मजदूरी करता है। मजदूरी से ही पूरे घर की गुजर होती है। दोनों भाइयों के जेल जाने पर परिवार की गुजर होना मुश्किल हो गई। 37 दिन बाद हेमंत और श्यामलाल रिहा हुए हैं। अभी दिलीप के रिहा होने की बात सोमवार को कही गई है।
पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ जनप्रतिनिधियों के भी लगाए चक्कर, सुनवाई कहीं नहीं हुई
त्रिवेणी देवी ने बताया कि वह अपने बेटों के बेगुनाह होने की फरियाद लेकर संभल, मुरादाबाद और बरेली के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक गईं लेकिन सुनी किसी ने नहीं। सभी ने बेटो को दोषी बताया और पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई को सही बताया। जब डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के पास लखनऊ पहुंची तो उन्होंने मेरी फरियाद सुनी। पुलिस के सभी वरिष्ठ अधिकारियों को निष्पक्ष जांच के लिए निर्देश दिए। जांच तो निष्पक्ष कर दी और बेटे बेगुनाह साबित हो गए लेकिन जो गुनाहगार थे उन्हें जेल जाने से पहले ही जमानत दे दी गई।
मेडिकल करने वाले चिकित्सकों की समझ पर भी उठ रहा है सवाल
प्रेमपाल सिंह ने गोली को अपने शरीर में अलग से रखवाया था। इसके लिए निजी अस्पताल के कंपाउंडर ने मदद की। अब सवाल उठता है कि जब मेडिकल किया गया तो चिकित्सक को यह अंदाज नहीं हुआ कि गोली ने शरीर चीरा है या ब्लड से शरीर में घाव किया गया है। यह सवाल सभी के मन में उठ रहा है। माना जा रहा है कि लालच के चलते रिपोर्ट को सही कर दिया गया या फिर चिकित्सक ने मेडिकल करने की जहमत ही नहीं उठाई। वार्ड ब्याय व अन्य स्टाफ से ही खानापूर्ति कराई गई। त्रिवेणी देवी का कहना है कि मेडिकल करने वाले चिकित्सक की भी जांच होनी चाहिए।
27 जुलाई की रात क्या हुआ था
27 जुलाई को भाजपा नेता प्रेमपाल को गोली मारने की सूचना पर पुलिस पहुंची थी। इसमें प्रेमपाल ने बताया था कि उसके पड़ोसी दिलीप, हेमंत और श्यामलाल ने गोली मारी है। बताया था कि वह बहजोई से व्यापार मंडल की बैठक में शामिल होकर बाइक से घर लौट रहा था। नेहटा-पतरौआ मार्ग पर सैनिक चौराहे पर दिलीप, हेमंत और श्यामलाल ने रास्ता रोका और गोली मारकर भाग गए। इसके बाद की साजिश पुलिस ने रचनी शुरू कर दी और तीन बेगुनाह लोगों को आरोपी बना दिया। पुलिस ने अब बेगुनाह लोगों को फंसाने में प्रेमपाल, आमिर, शराफत और राहुल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पांच आरोपी जयवीर भागा हुआ है।
किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं थी घाव में गोली रखने की साजिश
प्रेमपाल की कमर में घाव करने के लिए निजी अस्पताल का कंपाउंडर आमिर आया और उसने घटनास्थल पर पहुंचकर पहले कमर में घाव किया और फिर इस्तेमाल की गई 315 की गोली अंदर कर दी। इस साजिश को न पुलिस समझ सकी और न चिकित्सक। या यूं कहा जाए कि समझना ही नहीं चाहा। बेगुनाह लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की और फिर प्रताड़ित कर गोली मारने की बात तक कबूल कराई।
सवाल अब तमंचे का है, जो दिलीप के हाथ में दिखाया गया
दिलीप की रिहाई जेल से शनिवार को इसलिए नहीं हुई क्योंकि पुलिस ने उसके हाथ में ही तमंचा दिखाया था। अब सवाल उठता है कि जब दिलीप, हेमंत और श्यामलाल बेगुनाह हैं तो तमंचा किसके अपराध में जोड़ा जाएगा। श्यामलाल का कहना है कि तमंचा पुलिस ने दिलीप के हाथ में दिया और एक वीडियो बनाया। जिसमें दिलीप से कहलवाया गया कि प्रेमपाल सिंह को गोली उसने मारी है। अब जब गोली दिलीप ने नहीं मारी और वह बेगुनाह है तो पुलिस की वीडियो और तमंचा, कारतूस का अपराध किसके नाम दर्ज होगा। यह सवाल सभी के दिमाग में उठ रहा है।
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कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला लोधियान निवासी श्यामलाल ने बताया कि 27 जुलाई की रात करीब 12 बजे पांच पुलिसकर्मी उनके घर में घुस आए थे। सोते से उठाने के बाद दिलीप और हेमंत के घर ले गए। वहां उनको भी सोते से ही उठाया और तीनों को कोतवाली लाकर पिटाई शुरू कर दी। पुलिसकर्मी पिटाई करने के साथ कह रहे थे कि कबूल कर लो कि भाजपा नेता प्रेमपाल सिंह को गोली तुमने मारी है। जब गोली मारने की बात कबूल नहीं की गई तो दो रात तक पिटाई की। 29 जुलाई की सुबह तमंचा व डंडा लगाकर जेल भेज दिया। श्यामलाल ने बताया कि प्रेमपाल से उनकी कोई रंजिश नहीं है। वह मोहल्ले में राशन डीलर है। बताया कि दिलीप और हेमंत की 11 बीघा जमीन बदायूं के गांव परौली में है। उस जमीन को प्रेमपाल सिंह अपने नाम करने का दबाव बना रहा था। जब दिलीप और हेमंत दबाव में नहीं आए तो 10 लाख रुपये उधार होने की झूठी कहानी रच रहा था। श्यामलाल ने बताया कि प्रेमपाल सिंह चाहता था कि 10 लाख रुपये उधार होने की गवाही पुलिस को दे दे, लेकिन जब उसने मना किया तो वह खफा हो गया। इसलिए दिलीप और हेमंत के साथ उन्हें भी फंसा दिया। आरोपी बनवा दिया।
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53 लाख की जमीन को चाहता था हड़पना इसलिए रची साजिश
त्रिवेणी देवी की पुश्तैनी चार बीघा जमीन शहर से लगी थी। उसको 60 लाख रुपये में बेच दिया था और बदायूं के गांव परौली में 11 बीघा जमीन 53 लाख रुपये की खरीद ली थी, उस समय पर कब्जा ग्रामीणों ने नहीं होने दिया। इसलिए त्रिवेणी देवी और दोनों बेटे परेशान थे। इसकी जानकारी प्रेमपाल सिंह को लगी तो वह काफी समय पहले त्रिवेणी के घर पहुंचा और जमीन खरीदने की बात कही थी। एक लाख रुपया भी एडवांस दिया और तीन महीने में जमीन का पूरा भुगतान करने और नाम कराने की बात कही थी। समय पूरा हो गया तो प्रेमपाल सिंह ने जमीन का बैनामा कराने की बात कही और बैनामा होने के बाद भुगतान करने के लिए कहा। इस पर त्रिवेणी और उनके दोनों बेटे राजी नहीं हुए। इसलिए उसने 27 जुलाई की रात को गोली मारने की झठी कहानी रच डाली।
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दिलीप चलाता है ई-रिक्शा और हेमंत करता है खेती की मजदूरी
त्रिवेणी के दो ही बेटे हैं। इसमें दिलीप शादीशुदा है और पांच बच्चों का पिता है। ई-रिक्शा चलाकर परिवार की गुजर करता है। हेमंत अविवाहित है और मजदूरी करता है। मजदूरी से ही पूरे घर की गुजर होती है। दोनों भाइयों के जेल जाने पर परिवार की गुजर होना मुश्किल हो गई। 37 दिन बाद हेमंत और श्यामलाल रिहा हुए हैं। अभी दिलीप के रिहा होने की बात सोमवार को कही गई है।
पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ जनप्रतिनिधियों के भी लगाए चक्कर, सुनवाई कहीं नहीं हुई
त्रिवेणी देवी ने बताया कि वह अपने बेटों के बेगुनाह होने की फरियाद लेकर संभल, मुरादाबाद और बरेली के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक गईं लेकिन सुनी किसी ने नहीं। सभी ने बेटो को दोषी बताया और पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई को सही बताया। जब डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के पास लखनऊ पहुंची तो उन्होंने मेरी फरियाद सुनी। पुलिस के सभी वरिष्ठ अधिकारियों को निष्पक्ष जांच के लिए निर्देश दिए। जांच तो निष्पक्ष कर दी और बेटे बेगुनाह साबित हो गए लेकिन जो गुनाहगार थे उन्हें जेल जाने से पहले ही जमानत दे दी गई।
मेडिकल करने वाले चिकित्सकों की समझ पर भी उठ रहा है सवाल
प्रेमपाल सिंह ने गोली को अपने शरीर में अलग से रखवाया था। इसके लिए निजी अस्पताल के कंपाउंडर ने मदद की। अब सवाल उठता है कि जब मेडिकल किया गया तो चिकित्सक को यह अंदाज नहीं हुआ कि गोली ने शरीर चीरा है या ब्लड से शरीर में घाव किया गया है। यह सवाल सभी के मन में उठ रहा है। माना जा रहा है कि लालच के चलते रिपोर्ट को सही कर दिया गया या फिर चिकित्सक ने मेडिकल करने की जहमत ही नहीं उठाई। वार्ड ब्याय व अन्य स्टाफ से ही खानापूर्ति कराई गई। त्रिवेणी देवी का कहना है कि मेडिकल करने वाले चिकित्सक की भी जांच होनी चाहिए।
27 जुलाई की रात क्या हुआ था
27 जुलाई को भाजपा नेता प्रेमपाल को गोली मारने की सूचना पर पुलिस पहुंची थी। इसमें प्रेमपाल ने बताया था कि उसके पड़ोसी दिलीप, हेमंत और श्यामलाल ने गोली मारी है। बताया था कि वह बहजोई से व्यापार मंडल की बैठक में शामिल होकर बाइक से घर लौट रहा था। नेहटा-पतरौआ मार्ग पर सैनिक चौराहे पर दिलीप, हेमंत और श्यामलाल ने रास्ता रोका और गोली मारकर भाग गए। इसके बाद की साजिश पुलिस ने रचनी शुरू कर दी और तीन बेगुनाह लोगों को आरोपी बना दिया। पुलिस ने अब बेगुनाह लोगों को फंसाने में प्रेमपाल, आमिर, शराफत और राहुल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पांच आरोपी जयवीर भागा हुआ है।
किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं थी घाव में गोली रखने की साजिश
प्रेमपाल की कमर में घाव करने के लिए निजी अस्पताल का कंपाउंडर आमिर आया और उसने घटनास्थल पर पहुंचकर पहले कमर में घाव किया और फिर इस्तेमाल की गई 315 की गोली अंदर कर दी। इस साजिश को न पुलिस समझ सकी और न चिकित्सक। या यूं कहा जाए कि समझना ही नहीं चाहा। बेगुनाह लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की और फिर प्रताड़ित कर गोली मारने की बात तक कबूल कराई।
सवाल अब तमंचे का है, जो दिलीप के हाथ में दिखाया गया
दिलीप की रिहाई जेल से शनिवार को इसलिए नहीं हुई क्योंकि पुलिस ने उसके हाथ में ही तमंचा दिखाया था। अब सवाल उठता है कि जब दिलीप, हेमंत और श्यामलाल बेगुनाह हैं तो तमंचा किसके अपराध में जोड़ा जाएगा। श्यामलाल का कहना है कि तमंचा पुलिस ने दिलीप के हाथ में दिया और एक वीडियो बनाया। जिसमें दिलीप से कहलवाया गया कि प्रेमपाल सिंह को गोली उसने मारी है। अब जब गोली दिलीप ने नहीं मारी और वह बेगुनाह है तो पुलिस की वीडियो और तमंचा, कारतूस का अपराध किसके नाम दर्ज होगा। यह सवाल सभी के दिमाग में उठ रहा है।