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संभल में कारतूसों की नियम विरूद्ध हो रही बिक्री की होगी जांच
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संभल। संभल जैसे अति संवेदनशील जिले में कारतूस की गलत बिक्री करने और खोखों की वापसी में अनदेखी करने के मामले की शिकायत शासन तक पहुंची तो शासन ने संज्ञान ले लिया गया। संयुक्त सचिव की ओर से जिलाधिकारी को जांच के आदेश किए गए हैं। शासन को जल्द जांच रिपोर्ट भेजने के लिए भी कहा है।
बदायूं की तहसील बिसौली अंतर्गत गांव जरैडा निवासी जितेंद्र कुमार शर्मा पुत्र रामकिशोर शर्मा ने शासन में शिकायत की थी कि संभल जिले में कारतूस नियमों के विरुद्ध बिक रहे हैं। कारतूस खोखो की वापसी में खेल हो रहा है। शिकायतकर्ता ने आरटीआई का हवाला दिया कि उन्होंने 2015 से 2021 तक बिके कारतूस के खोखों की जानकारी मांगी थी।
शस्त्र लिपिक ने कुल 45500 खोखे जमा होने की जानकारी दी। जबकि यह संख्या कई गुना होनी चाहिए। शिकायतकर्ता का कहना है कि शस्त्र लिपिक तीन वर्ष से जिले में हैं इनके कार्यकाल के दौरान ही करीब डेढ़ से दो लाख कारतूस खोखे होने चाहिए। क्योंकि जिले के दस आर्म्स स्टोर से प्रत्येक वर्ष 40-50 हजार कारतूस बिकता है।
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इसमें 80 प्रतिशत खोखे की वापसी का नियम हैं। इस शिकायत पर शासन ने संज्ञान लिया और जिलाधिकारी को 31 मई को पत्र भेजकर जांच के आदेश कर दिए। जिससे हकीकत सामने आ सके। क्योंकि संभल अतिसंवेदशील जिलों में शामिल है। कारतूस की नियम विरुद्ध बिक्री चिंता का विषय है।
क्या है नियम कारतूस खरीद और खोखा वापसी के लिए
संभल। कारतूस की बिक्री और उसके खर्च के हिसाब के लिए शासन ने नियम बनाया था। यह नियम दिसंबर 2014 में बना था लेकिन जनवरी 2015 से लागू हुआ। इस नियम के अंतर्गत कोई भी लाइसेंस धारक एक वर्ष में दो सौ कारतूस और एक बार में सौ कारतूस ले सकता है। कारतूस लेने के लिए 80 प्रतिशत खोखे आर्म्स स्टोर पर जमा करने होंगे जो बाद में आर्म्स स्टोर से शस्त्र लिपिक को दिए जाएंगे। इसका पूरा हिसाब बनाकर रखा जाता है। बाद में शासनादेश मिलने पर खोखे नष्ट कर दिए जाते हैं। संभल जिले को यह आदेश अब तक नहीं मिला है। इसलिए खोखे नष्ट नहीं किए गए हैं। आरटीआई में जो खोखो की संख्या बताई गई है उससे तो कई सवाल खड़े हो रहे हैं। जिसकी हकीकत जांच के बाद ही सामने आएगी।
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बदायूं की तहसील बिसौली अंतर्गत गांव जरैडा निवासी जितेंद्र कुमार शर्मा पुत्र रामकिशोर शर्मा ने शासन में शिकायत की थी कि संभल जिले में कारतूस नियमों के विरुद्ध बिक रहे हैं। कारतूस खोखो की वापसी में खेल हो रहा है। शिकायतकर्ता ने आरटीआई का हवाला दिया कि उन्होंने 2015 से 2021 तक बिके कारतूस के खोखों की जानकारी मांगी थी।
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शस्त्र लिपिक ने कुल 45500 खोखे जमा होने की जानकारी दी। जबकि यह संख्या कई गुना होनी चाहिए। शिकायतकर्ता का कहना है कि शस्त्र लिपिक तीन वर्ष से जिले में हैं इनके कार्यकाल के दौरान ही करीब डेढ़ से दो लाख कारतूस खोखे होने चाहिए। क्योंकि जिले के दस आर्म्स स्टोर से प्रत्येक वर्ष 40-50 हजार कारतूस बिकता है।
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इसमें 80 प्रतिशत खोखे की वापसी का नियम हैं। इस शिकायत पर शासन ने संज्ञान लिया और जिलाधिकारी को 31 मई को पत्र भेजकर जांच के आदेश कर दिए। जिससे हकीकत सामने आ सके। क्योंकि संभल अतिसंवेदशील जिलों में शामिल है। कारतूस की नियम विरुद्ध बिक्री चिंता का विषय है।
क्या है नियम कारतूस खरीद और खोखा वापसी के लिए
संभल। कारतूस की बिक्री और उसके खर्च के हिसाब के लिए शासन ने नियम बनाया था। यह नियम दिसंबर 2014 में बना था लेकिन जनवरी 2015 से लागू हुआ। इस नियम के अंतर्गत कोई भी लाइसेंस धारक एक वर्ष में दो सौ कारतूस और एक बार में सौ कारतूस ले सकता है। कारतूस लेने के लिए 80 प्रतिशत खोखे आर्म्स स्टोर पर जमा करने होंगे जो बाद में आर्म्स स्टोर से शस्त्र लिपिक को दिए जाएंगे। इसका पूरा हिसाब बनाकर रखा जाता है। बाद में शासनादेश मिलने पर खोखे नष्ट कर दिए जाते हैं। संभल जिले को यह आदेश अब तक नहीं मिला है। इसलिए खोखे नष्ट नहीं किए गए हैं। आरटीआई में जो खोखो की संख्या बताई गई है उससे तो कई सवाल खड़े हो रहे हैं। जिसकी हकीकत जांच के बाद ही सामने आएगी।