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Sambhal News: हथेली पर लिखकर सभी को राम-राम, बड़े भाई ने भी दे दी जान
Sat, 30 Dec 2023 01:56 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Sat, 30 Dec 2023 01:56 AM IST
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धनारी (संभल)। गांव औरंगाबाद में बृहस्पतिवार की शाम छोटे भाई पान सिंह की आत्महत्या के बाद बड़े भाई ब्रजेश ने भी जान देने का प्रयास किया। परिजनों ने चंडीगढ़ में रहने वाले तीसरे भाई मुनीश को दोनों के बीमार होने की बात कहते हुए घर आने के लिए कहा। रात करीब 11 बजे धनारी रेलवे स्टेशन पर पहुंचने किसी ने उसे बता दिया कि एक भाई की मौत हो चुकी है। जबकि दूसरा अस्पताल में भर्ती है। जिसके बाद वह घर नहीं पहुंचा और अपनी हथेली पर सभी को राम-राम लिखकर फंदा लगाकर जान दे दी।
थाना क्षेत्र के गांव औरंगाबाद निवासी विजय सिंह के मुनीश, ब्रजेश और पान सिंह तीन बेटे थे। मुनीस चंडीगढ़ में ठेला लगाकर मूंगफली बेचता था। जबकि ब्रजेश और पान सिंह गांव में रहकर खेती और मजदूरी करते थे। तीनों की शादी हो चुकी थी, लेकिन फिर भी तीनों भाई एक-दूसरे से हद से ज्यादा प्रेम करते थे। बृहस्पतिवार की शाम पिता से विवाद के बाद पान सिंह ने फंदा लगाकर जान दे दी। परिजन शव लेकर पहुंचे तो ब्रजेश भाई का शव देखकर खुद को कमरे में बंद कर लिया। परिजन कुछ समझ पाते, तब तक उसने भी फंदा लगाकर जान देने का प्रयास किया, लेकिन परिजन और ग्रामीणों ने कमरे का गेट तोड़कर उसे बचा लिया। परिजनों ने चंडीगढ़ में रहने वाले मुनीश को घर बुलाने के लिए भाई की मौत की खबर छिपाते हुए ये कहा कि उसके दोनों भाई बीमार है। जितना जल्दी हो सके घर आ जाओ। मुनीश रात करीब 11 बजे धनारी रेलवे स्टेशन पहुंचा तो किसी ग्रामीण ने उसे बता दिया कि उसके सबसे छोटे भाई पान सिंह की मौत हो चुकी है और उसका अंतिम संस्कार भी हो गया। जबकि दूसरे नंबर का ब्रजेश अस्पताल में भर्ती है। जिसके बाद मुनीश ने धनारी रेलवे स्टेशन के पास से ही अपने तहेरे भाई अवधेश के पास फोन किया और बोला-उसके एक भाई की मौत हो गई, जबकि दूसरा मौत से लड़ रहा है। ऐसे में मैं अब जीकर क्या करूंगा और रोते हुए फोन काट दिया। परिजन उसे तलाश करते हुए धनारी रेलवे स्टेशन के पास पहुंचे तो रात दो बजे मुनीश का शव छोइया नदी के पुल के नीचे फंदे पर लटका मिला। आत्महत्या करने से पहले उसने अपनी हथेली पर लिखा था कि हम दोनों भाइयों की आत्मा...उसके आगे लिखा था, सभी को राम-राम।
साइड स्टोरी : दस घंटे में दस किलोमीटर की दूरी में तीन भाइयों ने उठाया आत्मघाती कदम
दस घंटे में दस किलोमीटर की दूरी में तीन भाइयों ने उठाया आत्मघाती कदम
छोटा भाई को फंदे से उतारा, तो एक घंटे मझला भाई फंदे पर लटका
छोटे का अंतिम संस्कार किया तो बड़े ने फंदे पर लटक कर की आत्महत्या
संवाद न्यूज एजेंसी
धनारी। क्षेत्र के गांव औरंगाबाद निवासी तीन सगे भाइयों ने दस घंटे के भीतर 10 किलोमीटर की दूरी के अंतराल में आत्मघाती कदम उठाए। जिसमें दो की मौत हो गई, जबकि एक को परिजन और ग्रामीणों ने बचा लिया। हालांकि वह भी अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। गांव में बृहस्पतिवार की शाम पान सिंह की मौत के बाद शुरू हुई चींख पुकार शुक्रवार तक मचती रही। पूरी रात पजिनों के साथ ही ग्रामीण इधर से उधर दौड़ते रहे। परिजनों के साथ ही ग्रामीण भी सदमे में रहे। गांव में घरों में चूल्हे नहीं जले। जिधर भी देखो सिर्फ रोने और चींखने चिल्लाने की आवाज थी। दस घंटे में मात्र दस किलोमीटर की दूरी पर तीन भाइयों के आत्मघाती कदम से परिजनों के साथ ही ग्रामीण भी सदमे में हैं।
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विजय सिंह के थे तीन बेटे, उजड़ गया परिवार
एक बेटे की हालत गंभीर, परिवार में एक बेटी, दो विधवा बहू
संवाद न्यूज एजेंसी
चंदौसी। धनारी के गांव औरंगाबाद में पारिवारिक कलह के चलते विजय सिंह का परिवार उजड़ गया है। उसके तीन बेटे थे। तीनों बेटे विवाहित थे। बृहस्पतिवार की घटना के बाद एक बेटा बचा है, उसकी हालत गंभीर है। एक छोटी बेटी और दो विधवा पुत्रवधू रह गई है। परिजनों का रो- रोकर बुरा हाल है।
विजय सिंह ने बताया कि उनके बड़े बेटे मुनीश की शादी करीब पांच साल पहले हुई थी। पत्नी से विवाद चल रहा है। वह अलग रह रही है। करीब डेढ़ साल पहले मझले बेटे ब्रजेश की शादी हुई थी। उसके छह माह के अंतराल पर ही छोटे बेटे पान सिंह की शादी हो गई थी। पर अभी तक उनमें से किसी के भी संतान नहीं थी। घर में दो-दो विधवा बहू हैं और एक छोटी बेटी है।
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मुनीश लगाता था ठेला, दोनों छोटे भाई करते थे मजदूरी
धनारी। विजय सिंह का बड़ा बेटा चंडीगढ़ में रहता था और वहा मूंगफली का ठेला लगाता था। छोटे बेटे ब्रजेश व पान सिंह गांव में रहते थे। दोनाें अपनी खेती करते थे और समय बचने पर मजदूरी भी कर लेते थे।
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पान सिंह दिल्ली में काम पर जाने की कर रहा था जिद
धनारी। परिजनाें ने बताया कि पान सिंह ने करीब एक सप्ताह पहले पिता से दिल्ली जाकर काम करने की जिद की थी। पिता ने ठंड अधिक होने की बात कहकर उसे दिल्ली जाने से मना कर दिया था। उस बात को लेकर पान सिंह तनाव में था। वह कहता था कि दिल्ली जाकर पैसा कमाना चाहता है।
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दादा बोले: मेरे बेटे का उजड़ गया परिवार, कोई मेरे एक पोते को बचा लो
धनारी। मृतक मुनीश व पान सिंह के दादा खुशीराम का रो-रोकर बुरा हाल है। खुशीराम बदहवास हालत में है। एक ही रट लगाए हुए हैं, मेरे बेटे का परिवार उजड़ गया। कोई मेरे पोते को बचा लो।
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मुनीश ने मरने से पहले हाथ पर लिखा नोट
चंदौसी। विजय सिंह के बड़े बेटे मुनीश का शव धनारी रेलवे स्टेशन के पास छोइया नदी के पुल के नीचे लटका मिला। सूचना पर पहुंचे परिजनों ने शव नीचे उतारा उसके हाथ पर पेंसिल से एक नोट लिखा हुआ था। उसमें लिखा था कि हम दोनों भाइयों की आत्मा की (एक शब्द धुंधला लिखा दिखाई दे रहा) को हम हमारे घर की लाज रखना। बाकी सब लोगों को राम राम।
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थाना क्षेत्र के गांव औरंगाबाद निवासी विजय सिंह के मुनीश, ब्रजेश और पान सिंह तीन बेटे थे। मुनीस चंडीगढ़ में ठेला लगाकर मूंगफली बेचता था। जबकि ब्रजेश और पान सिंह गांव में रहकर खेती और मजदूरी करते थे। तीनों की शादी हो चुकी थी, लेकिन फिर भी तीनों भाई एक-दूसरे से हद से ज्यादा प्रेम करते थे। बृहस्पतिवार की शाम पिता से विवाद के बाद पान सिंह ने फंदा लगाकर जान दे दी। परिजन शव लेकर पहुंचे तो ब्रजेश भाई का शव देखकर खुद को कमरे में बंद कर लिया। परिजन कुछ समझ पाते, तब तक उसने भी फंदा लगाकर जान देने का प्रयास किया, लेकिन परिजन और ग्रामीणों ने कमरे का गेट तोड़कर उसे बचा लिया। परिजनों ने चंडीगढ़ में रहने वाले मुनीश को घर बुलाने के लिए भाई की मौत की खबर छिपाते हुए ये कहा कि उसके दोनों भाई बीमार है। जितना जल्दी हो सके घर आ जाओ। मुनीश रात करीब 11 बजे धनारी रेलवे स्टेशन पहुंचा तो किसी ग्रामीण ने उसे बता दिया कि उसके सबसे छोटे भाई पान सिंह की मौत हो चुकी है और उसका अंतिम संस्कार भी हो गया। जबकि दूसरे नंबर का ब्रजेश अस्पताल में भर्ती है। जिसके बाद मुनीश ने धनारी रेलवे स्टेशन के पास से ही अपने तहेरे भाई अवधेश के पास फोन किया और बोला-उसके एक भाई की मौत हो गई, जबकि दूसरा मौत से लड़ रहा है। ऐसे में मैं अब जीकर क्या करूंगा और रोते हुए फोन काट दिया। परिजन उसे तलाश करते हुए धनारी रेलवे स्टेशन के पास पहुंचे तो रात दो बजे मुनीश का शव छोइया नदी के पुल के नीचे फंदे पर लटका मिला। आत्महत्या करने से पहले उसने अपनी हथेली पर लिखा था कि हम दोनों भाइयों की आत्मा...उसके आगे लिखा था, सभी को राम-राम।
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साइड स्टोरी : दस घंटे में दस किलोमीटर की दूरी में तीन भाइयों ने उठाया आत्मघाती कदम
दस घंटे में दस किलोमीटर की दूरी में तीन भाइयों ने उठाया आत्मघाती कदम
छोटा भाई को फंदे से उतारा, तो एक घंटे मझला भाई फंदे पर लटका
छोटे का अंतिम संस्कार किया तो बड़े ने फंदे पर लटक कर की आत्महत्या
संवाद न्यूज एजेंसी
धनारी। क्षेत्र के गांव औरंगाबाद निवासी तीन सगे भाइयों ने दस घंटे के भीतर 10 किलोमीटर की दूरी के अंतराल में आत्मघाती कदम उठाए। जिसमें दो की मौत हो गई, जबकि एक को परिजन और ग्रामीणों ने बचा लिया। हालांकि वह भी अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। गांव में बृहस्पतिवार की शाम पान सिंह की मौत के बाद शुरू हुई चींख पुकार शुक्रवार तक मचती रही। पूरी रात पजिनों के साथ ही ग्रामीण इधर से उधर दौड़ते रहे। परिजनों के साथ ही ग्रामीण भी सदमे में रहे। गांव में घरों में चूल्हे नहीं जले। जिधर भी देखो सिर्फ रोने और चींखने चिल्लाने की आवाज थी। दस घंटे में मात्र दस किलोमीटर की दूरी पर तीन भाइयों के आत्मघाती कदम से परिजनों के साथ ही ग्रामीण भी सदमे में हैं।
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विजय सिंह के थे तीन बेटे, उजड़ गया परिवार
एक बेटे की हालत गंभीर, परिवार में एक बेटी, दो विधवा बहू
संवाद न्यूज एजेंसी
चंदौसी। धनारी के गांव औरंगाबाद में पारिवारिक कलह के चलते विजय सिंह का परिवार उजड़ गया है। उसके तीन बेटे थे। तीनों बेटे विवाहित थे। बृहस्पतिवार की घटना के बाद एक बेटा बचा है, उसकी हालत गंभीर है। एक छोटी बेटी और दो विधवा पुत्रवधू रह गई है। परिजनों का रो- रोकर बुरा हाल है।
विजय सिंह ने बताया कि उनके बड़े बेटे मुनीश की शादी करीब पांच साल पहले हुई थी। पत्नी से विवाद चल रहा है। वह अलग रह रही है। करीब डेढ़ साल पहले मझले बेटे ब्रजेश की शादी हुई थी। उसके छह माह के अंतराल पर ही छोटे बेटे पान सिंह की शादी हो गई थी। पर अभी तक उनमें से किसी के भी संतान नहीं थी। घर में दो-दो विधवा बहू हैं और एक छोटी बेटी है।
मुनीश लगाता था ठेला, दोनों छोटे भाई करते थे मजदूरी
धनारी। विजय सिंह का बड़ा बेटा चंडीगढ़ में रहता था और वहा मूंगफली का ठेला लगाता था। छोटे बेटे ब्रजेश व पान सिंह गांव में रहते थे। दोनाें अपनी खेती करते थे और समय बचने पर मजदूरी भी कर लेते थे।
पान सिंह दिल्ली में काम पर जाने की कर रहा था जिद
धनारी। परिजनाें ने बताया कि पान सिंह ने करीब एक सप्ताह पहले पिता से दिल्ली जाकर काम करने की जिद की थी। पिता ने ठंड अधिक होने की बात कहकर उसे दिल्ली जाने से मना कर दिया था। उस बात को लेकर पान सिंह तनाव में था। वह कहता था कि दिल्ली जाकर पैसा कमाना चाहता है।
दादा बोले: मेरे बेटे का उजड़ गया परिवार, कोई मेरे एक पोते को बचा लो
धनारी। मृतक मुनीश व पान सिंह के दादा खुशीराम का रो-रोकर बुरा हाल है। खुशीराम बदहवास हालत में है। एक ही रट लगाए हुए हैं, मेरे बेटे का परिवार उजड़ गया। कोई मेरे पोते को बचा लो।
मुनीश ने मरने से पहले हाथ पर लिखा नोट
चंदौसी। विजय सिंह के बड़े बेटे मुनीश का शव धनारी रेलवे स्टेशन के पास छोइया नदी के पुल के नीचे लटका मिला। सूचना पर पहुंचे परिजनों ने शव नीचे उतारा उसके हाथ पर पेंसिल से एक नोट लिखा हुआ था। उसमें लिखा था कि हम दोनों भाइयों की आत्मा की (एक शब्द धुंधला लिखा दिखाई दे रहा) को हम हमारे घर की लाज रखना। बाकी सब लोगों को राम राम।