फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sambhal News ›   bhatakkr aaye sambhar ko graminon ne kahdera

भटककर आए सांभर को ग्रामीणों ने पकड़ा, मौत

Mon, 02 Jan 2017 01:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल Updated Mon, 02 Jan 2017 01:31 AM IST
विज्ञापन

विज्ञापन
महोरालखूपुरा और अजीमाबाद में आबादी के करीब शनिवार को दिन में तीन बजे के करीब एक सांभर को ग्रामीणों ने देखा। उसे चोट लगी हुई थी। गांव वालों को देखकर वह भागा लेकिन कुछ ही दूरी पर जाकर बैठ गया। गांव वालों ने उसे पकड़ने का प्रयास किया तो वह फिर उछल भागा। इस पर गांव के लोगों ने वन विभाग को सूचना दे दी। वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची गांव वालों के सहयोग से दो घंटे में उसे पकड़ लिया। उसे टाटा एस में लेकर पवांसा स्थित कृष्णा नर्सरी में पहुंचे।

नर्सरी में जब उसे उतारा गया तो उसकी मौत हो चुकी थी। रविवार को उसका पोस्टमार्टम कराया गया।  पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक रमेश चंद्र ने बताया कि सांभर की श्वांस नली में सूजन थी और उसे श्वांस लेने में दिक्कत थी। इसी तकलीफ में उसने दम तोड़ा है। डाक्टर के मुताबिक उसे निमोनिया था। जबकि वन्य जीव विशेषज्ञ एवं सेवानिवृत डीएफओ जीएस खुशारिया ने कहा कि सांभर सर्दी में रहने के आदी होते हैं इसलिए उसे निमोनिया तो नहीं हुआ होगा।
विज्ञापन


यह सांभर कहीं से भटक कर पवांसा क्षेत्र में पहुंच गया। इसे गर्दन से नीचे और पैर से ऊपर चोट है। ऐसा माना जा रहा है कि इसको छलांग लगाते समय खेतों में कटीले तारों से चोट आई। डीएफओ एमपी सिंह ने बताया कि सांभर पाए जाने की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई है। मौत के बाद पोस्टमार्टम कराया गया है और उसे वन विभाग की नर्सरी में दफन कर दिया गया है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


ब्लैक बक वाले इलाके में मिला सांभर
संभल।  पवांसा में जहां ब्लैक बक पाए जाते हैं उसी इलाके में सांभर मिला है।  डीएफओ एमपी सिंह ने बताया कि जिले में ब्लैक बक तो आएदिन देखे जाते हैं  लेकिन सांभर पहली बार देखा गया है। असल में यह इसका क्षेत्र नहीं है। यह  कहीं बाहर से भटककर आया होगा।


सांभर (रुसा यूनिकॉलर) हिरन की प्रजाति का मुख्य जानवर है। टाइगर का भोजन है। यह जानवर दलदली जमीनों पर नदियों के किनारे पाए जाते हैं। इनका दायरा एक से दो किलोमीटर होता है। समूह में रहते हैं। टाइगर की आहट पर सतर्क हो जाते हैं और समूह के साथ ही क्षेत्र बदल लेते हैं। - विशेषज्ञ जीएस खुशारिया से बाचतीत के मुताबिक। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed