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पवांसा में दीवार कूदकर गोशाला में घुसे बीडीओ, केयरटेकर मिला नदारद
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पवांसा में दीवार कूदकर गोशाला में घुसे बीडीओ, केयरटेकर मिला नदारद
अमरोहा में पशुुओं की मौत के बाद संभल में मचा हड़कंप, रात में ही गोशालाओं का निरीक्षण करने निकले अधिकारी
संभल। अमरोहा में गोवंशीय पशुओं की मौत को मुख्यमंत्री ने संज्ञान में लिया, इसकी जानकारी होने पर संभल जिले में हड़कंप मच गया। बृहस्पतिवार की रात में ही ब्लॉक स्तरीय अधिकारी व कर्मचारी गोशालाओं में निरीक्षण करने के लिए पहुंच गए। पवांसा में बनी गोशाला का निरीक्षण करने के लिए बीडीओ रिजवान हुसैन पहुंचे तो केयरटेकर मौजूद नहीं था। वह दीवार कूदकर अंदर गए और निरीक्षण किया। शुक्रवार को पशु चिकित्सा विभाग की टीमें निरीक्षण के लिए पहुंचीं। पशु चिकित्सा विभाग की टीमों के अनुसार कहीं कोई पशु बीमार नहीं मिला। अमरोहा में पशुओं की मौत से संभल जिले में भी हड़कंप का माहौल बृहस्पतिवार की देर रात रहा। देर रात से ही जिलेभर के ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों ने गोशालाओं का निरीक्षण किया। शुक्रवार की सुबह तक व्यवस्थाएं लगभग दुरुस्त दिखाई दीं। पशु चिकित्सा विभाग की टीमें भी गोशालाओं का निरीक्षण करने के लिए पहुंचीं। चारे और भूसे की जानकारी ली और पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी मुन्ना लाल यादव ने बताया कि शुक्रवार को टीमों ने अपने अपने क्षेत्र की गोशाला का निरीक्षण किया, जहां कोई पशु बीमार नहीं मिला है। वहीं दूसरी ओर पवांसा के खंड विकास अधिकारी ने बताया कि पवांसा में केयरटेकर नहीं मिलने पर प्रधान को निर्देश दिए हैं कि केयरटेकर की व्यवस्थाओं में सुधार कराया जाए। जहां गंदगी मिली है, वहां सुधार कराने के लिए निर्देश दिए गए हैं।
मार्च से नहीं आया गोशालाओं का बजट
संभल। ग्राम पंचायत सैंजना के ग्राम प्रधानपति बादशाह यादव ने बताया कि मार्च से गांव बंजरपुरी में स्थित गोशाला का बजट नहीं मिला है। पशुओं के खाने की व्यवस्था उधार की जा रही है। इस समस्या से अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। वहीं खंड विकास अधिकारी रिजवान हुसैन ने बताया कि बजट के लिए शासन को रिपोर्ट भेज दी है। जल्द ही आने की उम्मीद है।
सड़कों से पशुओं का कब्जा नहीं हटा
संभल। 21 जुलाई को सभी खंड विकास अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि सड़कों पर घूमने वाले पशु संरक्षित किए जाए। कोई भी पशु सड़क पर दिखाई न दें। इसके बाद भी मुख्य मार्गों पर पशु दिखाई दे रहे हैं। इससे साफ जाहिर है कि जिलाधिकारी का आदेश भी बेअसर हो रहा है। ब्लॉक स्तर पर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। शुक्रवार की सुबह बहजोई-संभल मार्ग पर गांव अतरासी में करीब 15 गोवंशीय पशु मुख्य मार्ग पर बैठे दिखाई दिए। इस गांव के निवासी महेश यादव ने बताया कि इन पशुओं के कारण आए दिन हादसे होते हैं। ब्लॉक स्तर और मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की जा चुकी है, लेकिन इन पशुओं को संरक्षित नहीं किया गया है।
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30 रुपये में कैसे हो चारा, भूसा और चोकर की व्यवस्था
संभल। शासन की ओर से प्रत्येक गोवंश के संरक्षण के लिए 30 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से दिए जाते हैं। ग्राम प्रधानों की मानें तो इस बजट से गोवंश का गुजारा कराना काफी मुश्किल है। मांग की है कि इसका बजट बढ़ाया जाए, जिससे पशुओं का संरक्षण हो सके। बताया कि भूसे से लेकर चोकर तक पर काफी महंगाई है। इस समय चोकर का 45 किलोग्राम का कट्टा 1000 रुपये का मिल रहा है। भूसे का दाम भी 1400 रुपये क्विंटल है। एक पशु के लिए एक दिन में 5 से 7 किलोग्राम भूसा और इसमें करीब एक किलोग्राम चोकर की जरूरत होती है। अगर औसत लगाया जाए तो 30 रुपये के बजट में एक पशु का संरक्षण करना मुश्किल है।
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अमरोहा में पशुुओं की मौत के बाद संभल में मचा हड़कंप, रात में ही गोशालाओं का निरीक्षण करने निकले अधिकारी
संभल। अमरोहा में गोवंशीय पशुओं की मौत को मुख्यमंत्री ने संज्ञान में लिया, इसकी जानकारी होने पर संभल जिले में हड़कंप मच गया। बृहस्पतिवार की रात में ही ब्लॉक स्तरीय अधिकारी व कर्मचारी गोशालाओं में निरीक्षण करने के लिए पहुंच गए। पवांसा में बनी गोशाला का निरीक्षण करने के लिए बीडीओ रिजवान हुसैन पहुंचे तो केयरटेकर मौजूद नहीं था। वह दीवार कूदकर अंदर गए और निरीक्षण किया। शुक्रवार को पशु चिकित्सा विभाग की टीमें निरीक्षण के लिए पहुंचीं। पशु चिकित्सा विभाग की टीमों के अनुसार कहीं कोई पशु बीमार नहीं मिला। अमरोहा में पशुओं की मौत से संभल जिले में भी हड़कंप का माहौल बृहस्पतिवार की देर रात रहा। देर रात से ही जिलेभर के ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों ने गोशालाओं का निरीक्षण किया। शुक्रवार की सुबह तक व्यवस्थाएं लगभग दुरुस्त दिखाई दीं। पशु चिकित्सा विभाग की टीमें भी गोशालाओं का निरीक्षण करने के लिए पहुंचीं। चारे और भूसे की जानकारी ली और पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी मुन्ना लाल यादव ने बताया कि शुक्रवार को टीमों ने अपने अपने क्षेत्र की गोशाला का निरीक्षण किया, जहां कोई पशु बीमार नहीं मिला है। वहीं दूसरी ओर पवांसा के खंड विकास अधिकारी ने बताया कि पवांसा में केयरटेकर नहीं मिलने पर प्रधान को निर्देश दिए हैं कि केयरटेकर की व्यवस्थाओं में सुधार कराया जाए। जहां गंदगी मिली है, वहां सुधार कराने के लिए निर्देश दिए गए हैं।
मार्च से नहीं आया गोशालाओं का बजट
संभल। ग्राम पंचायत सैंजना के ग्राम प्रधानपति बादशाह यादव ने बताया कि मार्च से गांव बंजरपुरी में स्थित गोशाला का बजट नहीं मिला है। पशुओं के खाने की व्यवस्था उधार की जा रही है। इस समस्या से अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। वहीं खंड विकास अधिकारी रिजवान हुसैन ने बताया कि बजट के लिए शासन को रिपोर्ट भेज दी है। जल्द ही आने की उम्मीद है।
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सड़कों से पशुओं का कब्जा नहीं हटा
संभल। 21 जुलाई को सभी खंड विकास अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि सड़कों पर घूमने वाले पशु संरक्षित किए जाए। कोई भी पशु सड़क पर दिखाई न दें। इसके बाद भी मुख्य मार्गों पर पशु दिखाई दे रहे हैं। इससे साफ जाहिर है कि जिलाधिकारी का आदेश भी बेअसर हो रहा है। ब्लॉक स्तर पर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। शुक्रवार की सुबह बहजोई-संभल मार्ग पर गांव अतरासी में करीब 15 गोवंशीय पशु मुख्य मार्ग पर बैठे दिखाई दिए। इस गांव के निवासी महेश यादव ने बताया कि इन पशुओं के कारण आए दिन हादसे होते हैं। ब्लॉक स्तर और मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की जा चुकी है, लेकिन इन पशुओं को संरक्षित नहीं किया गया है।
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30 रुपये में कैसे हो चारा, भूसा और चोकर की व्यवस्था
संभल। शासन की ओर से प्रत्येक गोवंश के संरक्षण के लिए 30 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से दिए जाते हैं। ग्राम प्रधानों की मानें तो इस बजट से गोवंश का गुजारा कराना काफी मुश्किल है। मांग की है कि इसका बजट बढ़ाया जाए, जिससे पशुओं का संरक्षण हो सके। बताया कि भूसे से लेकर चोकर तक पर काफी महंगाई है। इस समय चोकर का 45 किलोग्राम का कट्टा 1000 रुपये का मिल रहा है। भूसे का दाम भी 1400 रुपये क्विंटल है। एक पशु के लिए एक दिन में 5 से 7 किलोग्राम भूसा और इसमें करीब एक किलोग्राम चोकर की जरूरत होती है। अगर औसत लगाया जाए तो 30 रुपये के बजट में एक पशु का संरक्षण करना मुश्किल है।