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बारिश संग ओले भी गिरे, मौसम में बढ़ी ठिठुरन
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल
Updated Sun, 08 Jan 2017 01:12 AM IST
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ऐसे में बाजार में सन्नाटे जैसे हालात दिखे, तो सड़कें भी राहगीरों की कमी के कारण सुनसान नजर आईं। बहुत जरूरी काम से ही लोग घरों से बाहर निकले। धनारी के कुछ इलाकों में ओले भी पड़े।
सर्दी के मौसम में पहले ही कोहरे का सितम झेल रहे लोगों को शनिवार को हुई बारिश ने परेशान किया। शीतलहर से जनजीवन ठहर सा गया। बाजारों से रौनक गायब हो गई। नन्हे-मुन्ने अपने घरों में टीवी के आगे नजर आए। दिन भर आसमान में बादल छाए रहे। रुक रुककर हुई बारिश ने सड़कों पर जलभराव कर दिया। नगर के मुख्य मार्गों पर नालों से गंदगी सड़कों पर बहती दिखी। लोगों को आवागमन में बेहद मुश्किल का सामना करना पड़ा।
मजदूरी पेशा लोग अलाव के सहारे सर्दी से निजात पाते दिखे। बबराला में चंदौसी व बदायूं रोड़ पर पानी जमा हो गया। घर से बाहर काम पर जाने वालों को भी बूंदा-बांदी से दिक्कत हुई। धनारी में आगरा-मुरादाबाद हाईवे पर भिरावटी तिराहे के पास जलभराव हो गया। कूबरीभूड़ में ओले पड़ने से गेहुं की फसल पर असर पड़ा। ओले पड़ने से ठंड का असर और बढ़ गया। बारिश होने से किसानों ने राहत मिली। रजपुरा/गवां में बारिश रुक-रुक कर शनिवार रात तक होती रही।
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मौसम का बिगड़ा मिजाज, गेहूं किसानों के चेहरे खिले, लाही-लेहटा को नुकसान
लाही लैहटा की जिस फसल में फूल आ रहा था उसे अचानक हुई बारिश और तेज हवाओं से भारी नुकसान हुआ है। संभल, बहजोई क्षेत्र के किसानों का कहना है कि फसल में फूल आते वक्त हवा चलने से फूल झड़ गया। वहीं बारिश ने भी क्षति पहुंचाई है। लेकिन इसके विपरीत गेहूं की फसल को फायदा हुआ है।
जिले में 1,39,000 हेक्टेयर गेहूं की फसल है। गेहूं में यह समय फसल के किल्ले फूटने का है। पिछले चौबीस घंटे में बारिश होने के बाद ठंडक बढ़ने का गेहूं को फायदा हुआ है, जबकि लाही लैहटा की उस फसल को नुकसान हुआ है, जिसमें फूल आने की स्टेज चल रही है।
जिले के उप निदेशक कृषि प्रसार जेएस राठौर ने बताया कि जिले में कुल 13,000 हेक्टेयर फसल लाही लैहटा की ही है। इसमें 3000 हेक्टेयर फसल बिगड़े मौसम से प्रभावित हुई है। यह वह फसल है जिसमें फूल आ रहा था। कहीं कम कहीं ज्यादा क्षति हुई है लेकिन क्षति का आंकलन अभी नहीं आया है। संभल में शनिवार को सुबह हुई बरसात ने किसानों को राहत दी है। क्योंकि गेहूं की फसल की इस समय किसान सिंचाई कर रहे हैं।
बोले किसान - प्रशासन कराए आंकलन
गेहूं की फसल को बारिश से बहुत फायदा हुआ है। सिंचाईं में डीजल खर्च होता लेकिन बारिश ने बचत करा दी। - हेम सिंह, बेहटा जयसिंह।
सरसों की फसल पकने के लिए तैयार थी। फूल आ चुका था लेकिन बारिश ने फूल गिरा दिया। ऐसे में फसल को काफी क्षति हुई है। सरकार इसके लिए मुआवजा दिलाए। - वीरेंद्र सिंह, बेहटा जयसिंह।
-आठ बीघा खेत में लहटा बोया था, जिस पर करीब 35 हजार रुपये लागत आई, लेकिन बरसात के कारण में खेत में पानी भर गया है। जिससे फसल को नुकसान पहुंचा है। फसल नष्ट होने की कगार पर पहुंच गई है।
-इरशाद अहमद, अकरौली किसान।
-पांच बीघा लहटा बोया था, इस पर आठ हजार रुपये से अधिक लागत आई। तेज हवा और बारिश के कारण फसल गिर गई है। जिससे लागत की रकम भी डूबने की आशंका उत्पन्न हो गई है। हालांकि गेहूं की फसल में जरूर लाभ होता दिख रहा है। -अनिल तोमर, किसान कुआंखेड़ा
-एक एकड़ खेत में मसूर की फसल बोई थी, जैसे-तैसे बैंक में लाइन लगाकर रुपये निकाले, बारह हजार रुपये की लागत से फसल तैयार की, अब खेत में जलभराव की स्थिति बन गई है, जिससे फसल नष्ट हो सकती है, जिससे भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका प्रबल हो गई है।
-कर्मवीर सिंह यादव, किसान बनियाखेड़ा।
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सर्दी के मौसम में पहले ही कोहरे का सितम झेल रहे लोगों को शनिवार को हुई बारिश ने परेशान किया। शीतलहर से जनजीवन ठहर सा गया। बाजारों से रौनक गायब हो गई। नन्हे-मुन्ने अपने घरों में टीवी के आगे नजर आए। दिन भर आसमान में बादल छाए रहे। रुक रुककर हुई बारिश ने सड़कों पर जलभराव कर दिया। नगर के मुख्य मार्गों पर नालों से गंदगी सड़कों पर बहती दिखी। लोगों को आवागमन में बेहद मुश्किल का सामना करना पड़ा।
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मजदूरी पेशा लोग अलाव के सहारे सर्दी से निजात पाते दिखे। बबराला में चंदौसी व बदायूं रोड़ पर पानी जमा हो गया। घर से बाहर काम पर जाने वालों को भी बूंदा-बांदी से दिक्कत हुई। धनारी में आगरा-मुरादाबाद हाईवे पर भिरावटी तिराहे के पास जलभराव हो गया। कूबरीभूड़ में ओले पड़ने से गेहुं की फसल पर असर पड़ा। ओले पड़ने से ठंड का असर और बढ़ गया। बारिश होने से किसानों ने राहत मिली। रजपुरा/गवां में बारिश रुक-रुक कर शनिवार रात तक होती रही।
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मौसम का बिगड़ा मिजाज, गेहूं किसानों के चेहरे खिले, लाही-लेहटा को नुकसान
लाही लैहटा की जिस फसल में फूल आ रहा था उसे अचानक हुई बारिश और तेज हवाओं से भारी नुकसान हुआ है। संभल, बहजोई क्षेत्र के किसानों का कहना है कि फसल में फूल आते वक्त हवा चलने से फूल झड़ गया। वहीं बारिश ने भी क्षति पहुंचाई है। लेकिन इसके विपरीत गेहूं की फसल को फायदा हुआ है।
जिले में 1,39,000 हेक्टेयर गेहूं की फसल है। गेहूं में यह समय फसल के किल्ले फूटने का है। पिछले चौबीस घंटे में बारिश होने के बाद ठंडक बढ़ने का गेहूं को फायदा हुआ है, जबकि लाही लैहटा की उस फसल को नुकसान हुआ है, जिसमें फूल आने की स्टेज चल रही है।
जिले के उप निदेशक कृषि प्रसार जेएस राठौर ने बताया कि जिले में कुल 13,000 हेक्टेयर फसल लाही लैहटा की ही है। इसमें 3000 हेक्टेयर फसल बिगड़े मौसम से प्रभावित हुई है। यह वह फसल है जिसमें फूल आ रहा था। कहीं कम कहीं ज्यादा क्षति हुई है लेकिन क्षति का आंकलन अभी नहीं आया है। संभल में शनिवार को सुबह हुई बरसात ने किसानों को राहत दी है। क्योंकि गेहूं की फसल की इस समय किसान सिंचाई कर रहे हैं।
बोले किसान - प्रशासन कराए आंकलन
गेहूं की फसल को बारिश से बहुत फायदा हुआ है। सिंचाईं में डीजल खर्च होता लेकिन बारिश ने बचत करा दी। - हेम सिंह, बेहटा जयसिंह।
सरसों की फसल पकने के लिए तैयार थी। फूल आ चुका था लेकिन बारिश ने फूल गिरा दिया। ऐसे में फसल को काफी क्षति हुई है। सरकार इसके लिए मुआवजा दिलाए। - वीरेंद्र सिंह, बेहटा जयसिंह।
-आठ बीघा खेत में लहटा बोया था, जिस पर करीब 35 हजार रुपये लागत आई, लेकिन बरसात के कारण में खेत में पानी भर गया है। जिससे फसल को नुकसान पहुंचा है। फसल नष्ट होने की कगार पर पहुंच गई है।
-इरशाद अहमद, अकरौली किसान।
-पांच बीघा लहटा बोया था, इस पर आठ हजार रुपये से अधिक लागत आई। तेज हवा और बारिश के कारण फसल गिर गई है। जिससे लागत की रकम भी डूबने की आशंका उत्पन्न हो गई है। हालांकि गेहूं की फसल में जरूर लाभ होता दिख रहा है। -अनिल तोमर, किसान कुआंखेड़ा
-एक एकड़ खेत में मसूर की फसल बोई थी, जैसे-तैसे बैंक में लाइन लगाकर रुपये निकाले, बारह हजार रुपये की लागत से फसल तैयार की, अब खेत में जलभराव की स्थिति बन गई है, जिससे फसल नष्ट हो सकती है, जिससे भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका प्रबल हो गई है।
-कर्मवीर सिंह यादव, किसान बनियाखेड़ा।