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Sambhal News: साइकिल पर मंदिर बनाकर 17 वर्ष से तीर्थ भ्रमण कर रहे आर्येंद्र
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जुनावई(संभल)। कासगंज जिले के नगरिया गांव निवासी आर्येंद्र कुमार पिछले 17 वर्षों से साइकिल पर मंदिर बनाकर देशभर के तीर्थ स्थलों का भ्रमण कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि मात्र आठ वर्ष की आयु में संत बद्रीनाथ गिरि महाराज के संपर्क में आकर वैराग्य हुआ और उनके साथ कुटिया में रहकर भजन-पूजन करने लगे। संत की मृत्यु के बाद वह साइकिल से ही तीर्थ यात्रा पर निकल पड़े, जो अब तक जारी है।
आर्येंद्र कुमार ने अपनी साइकिल पर मंदिर बना रखा है और देश के अधिकांश प्रमुख तीर्थ स्थलों के दर्शन कर चुके हैं। वह जहां रात हो जाती है, वहीं ठहर जाते हैं और श्रद्धा से मिलने वाले भोजन को स्वीकार कर अगले दिन फिर यात्रा शुरू कर देते हैं।
उन्होंने बताया कि वह लुधियाना में करीब एक दर्जन बार, राजस्थान के बागड़ में 20 बार, नीम करौली बाबा के दर्शन के लिए आठ बार और हरिद्वार छह बार जा चुके हैं। इसके अलावा अन्य कई तीर्थ स्थलों के भी दर्शन कर चुके हैं। उनका कहना है कि घर छोड़ने के बाद वह कभी वापस नहीं लौटे और आगे भी लौटने की कोई योजना नहीं है। संवाद
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उन्होंने बताया कि मात्र आठ वर्ष की आयु में संत बद्रीनाथ गिरि महाराज के संपर्क में आकर वैराग्य हुआ और उनके साथ कुटिया में रहकर भजन-पूजन करने लगे। संत की मृत्यु के बाद वह साइकिल से ही तीर्थ यात्रा पर निकल पड़े, जो अब तक जारी है।
आर्येंद्र कुमार ने अपनी साइकिल पर मंदिर बना रखा है और देश के अधिकांश प्रमुख तीर्थ स्थलों के दर्शन कर चुके हैं। वह जहां रात हो जाती है, वहीं ठहर जाते हैं और श्रद्धा से मिलने वाले भोजन को स्वीकार कर अगले दिन फिर यात्रा शुरू कर देते हैं।
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उन्होंने बताया कि वह लुधियाना में करीब एक दर्जन बार, राजस्थान के बागड़ में 20 बार, नीम करौली बाबा के दर्शन के लिए आठ बार और हरिद्वार छह बार जा चुके हैं। इसके अलावा अन्य कई तीर्थ स्थलों के भी दर्शन कर चुके हैं। उनका कहना है कि घर छोड़ने के बाद वह कभी वापस नहीं लौटे और आगे भी लौटने की कोई योजना नहीं है। संवाद
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