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कुरीतियों पर प्रहार का नाम है आर्य समाज : डीपी यादव
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बबराला। प्रांतीय आर्य महासम्मेलन के दूसरे दिन सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डीपी यादव ने आर्य समाज की सुधारवादी परंपरा पर प्रकाश डाला। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध संघर्ष और ज्ञान के प्रसार को आर्य समाज की स्थापना का मूल उद्देश्य बताया।
यादव ने आर्य समाज के विचारों को समझने और उन्हें जीवन में अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। सम्मेलन में धर्म, संस्कृति, शिक्षा और सामाजिक सुधार जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
रविवार को सम्मेलन के दूसरे दिन की शुरुआत आर्य वीर दल की शाखा और योग साधना से हुई। इसके बाद यज्ञ, भजन और प्रवचन के कार्यक्रम आयोजित किए गए। वैदिक मंत्रोच्चार और आध्यात्मिक प्रस्तुतियों ने वातावरण को भक्तिमय बनाया। मुख्य वक्ता डीपी यादव ने आर्य समाज की वैचारिक पृष्ठभूमि और उसकी सामाजिक भूमिका पर विचार रखे।
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उन्होंने आर्य समाज की ऐतिहासिक यात्रा का उल्लेख किया। यादव ने संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती के विचारों और सुधारवादी दृष्टिकोण को रेखांकित किया। आर्य समाज ने वैदिक सिद्धांतों के प्रचार के साथ समाज में व्याप्त कुरीतियों और अंधविश्वास के विरुद्ध वैचारिक जागरण का कार्य किया। इसने शिक्षा के प्रसार, स्त्री शिक्षा, सामाजिक समानता और नैतिक जीवन मूल्यों पर जोर दिया।
कहा कि आर्य समाज की विचारधारा का मूल संदेश सत्य की खोज, विवेकपूर्ण चिंतन और मानव कल्याण से जुड़ा है। यह विचारधारा तर्क और ज्ञान के प्रसार पर केंद्रित है। समाज में बदलते परिवेश के बीच वैचारिक जागरूकता, संस्कार और शिक्षा की भूमिका महत्वपूर्ण है।
नई पीढ़ी को तर्कशील सोच, नैतिक जिम्मेदारी और सामाजिक सद्भाव से जोड़ना समय की आवश्यकता है। वक्ताओं ने सामाजिक सुधार को केवल भाषणों तक सीमित न रखने पर बल दिया। उन्होंने इसे व्यवहार और जीवनशैली में उतारने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम में गुन्नौर के विधायक राम खिलाड़ी सिंह यादव ने भी संबोधित किया। सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. आनंद कुमार और डीएसएम शुगर मिल के उपाध्यक्ष उपेंद्र भी उपस्थित रहे।
डॉ. कुंवरपाल आर्य और डॉ. ज्ञान प्रकाश वैदिक ने अपने विचार रखे। कन्या गुरुकुल चोटीपुरा की सविता आर्या और प्रीति आर्या ने भी सभा को संबोधित किया। दयाशंकर आर्य ने वैदिक संस्कृति, शिक्षा, संस्कार और राष्ट्र निर्माण में आर्य समाज की भूमिका पर विचार व्यक्त किए।
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यादव ने आर्य समाज के विचारों को समझने और उन्हें जीवन में अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। सम्मेलन में धर्म, संस्कृति, शिक्षा और सामाजिक सुधार जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
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रविवार को सम्मेलन के दूसरे दिन की शुरुआत आर्य वीर दल की शाखा और योग साधना से हुई। इसके बाद यज्ञ, भजन और प्रवचन के कार्यक्रम आयोजित किए गए। वैदिक मंत्रोच्चार और आध्यात्मिक प्रस्तुतियों ने वातावरण को भक्तिमय बनाया। मुख्य वक्ता डीपी यादव ने आर्य समाज की वैचारिक पृष्ठभूमि और उसकी सामाजिक भूमिका पर विचार रखे।
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उन्होंने आर्य समाज की ऐतिहासिक यात्रा का उल्लेख किया। यादव ने संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती के विचारों और सुधारवादी दृष्टिकोण को रेखांकित किया। आर्य समाज ने वैदिक सिद्धांतों के प्रचार के साथ समाज में व्याप्त कुरीतियों और अंधविश्वास के विरुद्ध वैचारिक जागरण का कार्य किया। इसने शिक्षा के प्रसार, स्त्री शिक्षा, सामाजिक समानता और नैतिक जीवन मूल्यों पर जोर दिया।
कहा कि आर्य समाज की विचारधारा का मूल संदेश सत्य की खोज, विवेकपूर्ण चिंतन और मानव कल्याण से जुड़ा है। यह विचारधारा तर्क और ज्ञान के प्रसार पर केंद्रित है। समाज में बदलते परिवेश के बीच वैचारिक जागरूकता, संस्कार और शिक्षा की भूमिका महत्वपूर्ण है।
नई पीढ़ी को तर्कशील सोच, नैतिक जिम्मेदारी और सामाजिक सद्भाव से जोड़ना समय की आवश्यकता है। वक्ताओं ने सामाजिक सुधार को केवल भाषणों तक सीमित न रखने पर बल दिया। उन्होंने इसे व्यवहार और जीवनशैली में उतारने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम में गुन्नौर के विधायक राम खिलाड़ी सिंह यादव ने भी संबोधित किया। सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. आनंद कुमार और डीएसएम शुगर मिल के उपाध्यक्ष उपेंद्र भी उपस्थित रहे।
डॉ. कुंवरपाल आर्य और डॉ. ज्ञान प्रकाश वैदिक ने अपने विचार रखे। कन्या गुरुकुल चोटीपुरा की सविता आर्या और प्रीति आर्या ने भी सभा को संबोधित किया। दयाशंकर आर्य ने वैदिक संस्कृति, शिक्षा, संस्कार और राष्ट्र निर्माण में आर्य समाज की भूमिका पर विचार व्यक्त किए।