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Sambhal News: अंतरराज्यीय बीमा गिरोह का एक और सदस्य गिरफ्तार
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बहजोई (संभल)। 90 लाख रुपये की बीमा राशि हड़पने की मंशा से दिल्ली निवासी जीवित धर्मेंद्र की जीबी पंत अस्पताल में इलाज के दौरान मौत दर्शाकर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कराने और पर्सनल लोन कराकर 17 लाख रुपये हड़पने वाले अंतरराज्यीय बीमा माफिया गिरोह के सदस्य उत्तराखंड के जिला ऊधमसिंह नगर के थाना सितारगंज के गांव अरविंद नगर निवासी पंकज कुमार ढाली को गिरफ्तार किया है। हाल में आरोपी जिला गाजियाबाद के थाना वैशाली क्षेत्र का रहने वाला है।बुधवार को एएसपी अनुकृति शर्मा व सीओ प्रदीप कुमार सिंह के साथ प्रेसवार्ता करते हुए एसपी कृष्ण विश्नोई ने पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि आरोपी के पास से पुलिस ने एक लैपटॉप व दो मोबाइल फोन समेत विभिन्न बैंकों की 39 चेक बुक, 7 डेबिट कार्ड, 28 आधार कार्ड व 23 पैन कार्ड बरामद किए गए हैं। बरामद अभिलेख दिल्ली, उत्तराखंड, पंजाब व उत्तर प्रदेश के रहने वाले व्यक्तियों से जुड़े हैं। एसपी के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने आरोपी को जेल भेज दिया।
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त्रिलोक की तरह धर्मेंद्र का भी जीबी पंत में दिखाया था इलाज
एसपी कृष्ण विश्नोई ने बताया कि 15 फरवरी को गिरफ्तार किए गए धनारी के गांव भईयापुर निवासी शाहरुख खान से बरामद विभिन्न बैंकों के पास बुक, चेक बुक, डेबिट कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड, बीमा पॉलिसी क्लेम फॉर्म व मृत्य प्रमाण पत्रों आदि अभिलेखों पर पुलिस की छानबीन में सामने आया कि आरोपी शाहरुख खान व उसके साथियों की ओर से जिस प्रकार दिल्ली निवासी त्रिलोक की 19 जून 2024 को हुई मृत्यु के बावजूद उसके नाम से फर्जी तरीके से कई बीमा पॉलिसी कराई गई थीं। साथ ही बीमा का क्लेम पाने के लिए त्रिलोक का दिल्ली के जीबी पंत में हार्टअटैक के इलाज के दौरान मृत्यु दिखाते हुए 27 दिसंबर 2024 का एमसीडी से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करा लिया गया था।
आरोपियों की ओर से अस्पताल में त्रिलोक के इलाज से जुड़े अभिलेख तैयार करने में डॉक्टरों की फर्जी मोहर व हस्ताक्षर बनवाए गए थे। साथ ही त्रिलोक के नाम से किसी अन्य व्यक्ति का ईसीजी दिखाया गया था। त्रिलोक की पत्नी सपना की ओर से पूरे मामले की रिपोर्ट दर्ज कराने पर छानबीन के बाद 5 जुलाई 2025 को पांच आरोपियों में विरेंद्र, नबाज अहमद, कल्पना, प्रेम व रविंद्र गुप्ता को गिरफ्तार कर जेल भेज गया था। एसपी ने बताया कि इस बीच शाहरुख खान से बरामद किए गए मृत्यु प्रमाण पत्रों में दिल्ली निवासी धर्मेंद्र का एमसीडी से जारी मृत्यु प्रमाण पत्र मिला था। वहीं, शाहरुख खान मोबाइल फोन का डाटा चेक करने किया गया तो व्हाटस ऐप पर आरोपी शाहरुख खान, विरेंद्र व नबाज अहमद समेत एक अन्य व्यक्ति पंकज कुमार ढाली के बीच हुई बातचीत में सामने आया कि धर्मेंद्र की चार बीमा पॉलिसी दिखाई दे रही थीं और उसके आधार कार्ड व पैन कार्ड की फोटो भी थी। वहीं, त्रिलोक की तरह धर्मेंद्र के भी जीबी पंत में हार्ट अटैक के इलाज से जुड़े अभिलेख मोबाइल डाटा से प्राप्त हुए। इससे संभावना लगी कि त्रिलोक की तरह धर्मेंद्र की भी मृत्यु के बाद बीमा पॉलिसी कराई गई है। तब बीमा पॉलिसी व आधार कार्ड में दिए गए पते को तस्दीक किया गया, तो सामने आया कि धर्मेंद्र नाम का व्यक्ति जीवित है और मुंबई में रहकर मजदूरी करता है। वहीं, इस धोखाधड़ी की जानकारी मिलने पर धर्मेंद्र की ओर से थाना रजपुरा में रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई।
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सहायता के बहाने आरोपियों ने धर्मेंद्र को लिया झांसे में
जीबी पंत में लीवर का इलाज करा था धर्मेंद्र, हार्ट अटैक से मृत्यु दिखाकर फर्जी तरीके से बनवाया मृत्यु प्रमाण पत्र
संवाद न्यूज एजेंसी
बहजोई। एसपी ने बताया कि नशा करने के कारण धर्मेंद्र का लीवर खराब हो रहा था। वह आर्थिक रूप से कमजोर था। इस पर आरोपी शाहरुख, कल्पना व पंकज कुमार ढाली ने उसकी सहायता के बहाने आधार व पैन कार्ड हासिल किए और पंकज की ओर से अभिलेखों में धर्मेंद्र का पता बदलवाया गया था। बाद में बदले हुए पते के संशोधित आधार व पैन कार्ड को पंकज ने शाहरुख खान को भेजा। इसमें धर्मेंद्र के नाम पर आईसीआईसीआई, टाटा एआईए, रिलायंस निप्पन व एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस की कुल 90 लाख रुपये की बीमा पॉलिसी कराई गई थी। इसी बीमा राशि को पाने के लिए आरोपी शाहरुख ने विरेंद्र, नबाज अहमद आदि के साथ मिलकर जीबी पंत से मुत्यु संबंधी कागजात बनवाकर एमसीडी की ओर से 28 नवंबर 2024 का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया था। बावजूद इसके 15 फरवरी 2025 में आरोपी शाहरुख खान आदि की गिरफ्तारी होने के कारण क्लेम के लिए आवेदन नहीं किया गया था और न ही पुलिस की जांच पड़ताल में किसी भी प्रकार की बीमा पॉलिसी का भुगतान होना सामने आया है।
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धर्मेंद्र का पर्सनल लॉन कराकर आरोनियों ने हड़प ली करीब 17 लाख रुपये की राशि
बहजोई। एसपी कृष्ण विश्नोई ने बताया कि धर्मेंद्र के अभिलेखों की जांच पड़ताल में सामने आया कि आरोपी पंकज कुमार ढाली अन्य साथियों के साथ मिलकर एक कंपनी तैयार करता था। इसके बाद अयोग्य लोगों को फर्जी तरीके से कंपनी के डायरेक्टर व अन्य कर्मचारी बनाकर पर्सनल लोन करवा लेता था। धर्मेंद्र के ऐक्सिस बैंक के खाते की ट्रांजेक्शन रिपोर्ट देखने पर सामने आया कि उसके खाते में 12.21 लाख व 4.93 लाख रुपये के दो पर्सनल लोन हैं। धर्मेंद्र मुंबई में मजदूरी करता था। वह किसी भी कंपनी में कार्यरत ही नहीं है, तो उसे लोन मिलना संदेह की स्थिति में था। धर्मेंद्र ने भी पर्सनल लोन से जुड़ी कोई भी जानकारी होने से इंकार कर दिया। बावजूद इसके धर्मेंद्र ने पूरे मामले में शाहरुख खान, कल्पना व पंकज कुमार ढाली की ओर से सरकारी स्कीम का लाभ दिलाए जाने की बात कहते हुए उससे हस्ताक्षर व फिंगर प्रिंट स्कैनिंग मशीन पर अंगूठे लगवाने की बात बताई थी। एसपी ने बताया कि जांच पड़ताल में सामने आया कि आरोपियों ने धर्मेंद्र को फेलेनेक्स लैब प्राइवेट लिमिटेड में कार्यरत दिखाते हुए उसके खाते में प्रतिमाह वेतन भुगतान किया गया है। वह इस कपंनी के बावत कुछ नहीं जानता। एसपी ने बताया कि तस्दीक करने पर सामने आया कि कंपनी करीब एक वर्ष पहले बंद हो चुकी है। उसे पंकज कुमार ढाली ने लोन एजेंट बताया था।
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इनसेट
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तीन राज्यों के कई जिलों के लोगों से पर्सनल लोन की राशि हड़पने को की गई धोखाधड़ी
बहजोई। एसपी कृष्ण विश्नोई ने बताया कि जांच पड़ताल में सामने आया कि आरोपी पंकज कुमार ढाली की ओर से अन्य आरोपियों के साथ मिलकर धोखाधड़ी से पंजाब के गुरदासपुर समेत उत्तराखंड के हरिद्वार व ऊधमसिंह नगर तथा उत्तर प्रदेश के बरेली, बागपत, मेरठ, पीलीभीत व मुरादाबाद आदि जिलों के लोगों को अपनी कंपनी का कर्मचारी दिखाते हुए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पर्सनल लोन प्राप्त कर लोन की धनराशि हड़पने को धोखाधड़ी की गई।
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त्रिलोक की तरह धर्मेंद्र का भी जीबी पंत में दिखाया था इलाज
एसपी कृष्ण विश्नोई ने बताया कि 15 फरवरी को गिरफ्तार किए गए धनारी के गांव भईयापुर निवासी शाहरुख खान से बरामद विभिन्न बैंकों के पास बुक, चेक बुक, डेबिट कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड, बीमा पॉलिसी क्लेम फॉर्म व मृत्य प्रमाण पत्रों आदि अभिलेखों पर पुलिस की छानबीन में सामने आया कि आरोपी शाहरुख खान व उसके साथियों की ओर से जिस प्रकार दिल्ली निवासी त्रिलोक की 19 जून 2024 को हुई मृत्यु के बावजूद उसके नाम से फर्जी तरीके से कई बीमा पॉलिसी कराई गई थीं। साथ ही बीमा का क्लेम पाने के लिए त्रिलोक का दिल्ली के जीबी पंत में हार्टअटैक के इलाज के दौरान मृत्यु दिखाते हुए 27 दिसंबर 2024 का एमसीडी से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करा लिया गया था।
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आरोपियों की ओर से अस्पताल में त्रिलोक के इलाज से जुड़े अभिलेख तैयार करने में डॉक्टरों की फर्जी मोहर व हस्ताक्षर बनवाए गए थे। साथ ही त्रिलोक के नाम से किसी अन्य व्यक्ति का ईसीजी दिखाया गया था। त्रिलोक की पत्नी सपना की ओर से पूरे मामले की रिपोर्ट दर्ज कराने पर छानबीन के बाद 5 जुलाई 2025 को पांच आरोपियों में विरेंद्र, नबाज अहमद, कल्पना, प्रेम व रविंद्र गुप्ता को गिरफ्तार कर जेल भेज गया था। एसपी ने बताया कि इस बीच शाहरुख खान से बरामद किए गए मृत्यु प्रमाण पत्रों में दिल्ली निवासी धर्मेंद्र का एमसीडी से जारी मृत्यु प्रमाण पत्र मिला था। वहीं, शाहरुख खान मोबाइल फोन का डाटा चेक करने किया गया तो व्हाटस ऐप पर आरोपी शाहरुख खान, विरेंद्र व नबाज अहमद समेत एक अन्य व्यक्ति पंकज कुमार ढाली के बीच हुई बातचीत में सामने आया कि धर्मेंद्र की चार बीमा पॉलिसी दिखाई दे रही थीं और उसके आधार कार्ड व पैन कार्ड की फोटो भी थी। वहीं, त्रिलोक की तरह धर्मेंद्र के भी जीबी पंत में हार्ट अटैक के इलाज से जुड़े अभिलेख मोबाइल डाटा से प्राप्त हुए। इससे संभावना लगी कि त्रिलोक की तरह धर्मेंद्र की भी मृत्यु के बाद बीमा पॉलिसी कराई गई है। तब बीमा पॉलिसी व आधार कार्ड में दिए गए पते को तस्दीक किया गया, तो सामने आया कि धर्मेंद्र नाम का व्यक्ति जीवित है और मुंबई में रहकर मजदूरी करता है। वहीं, इस धोखाधड़ी की जानकारी मिलने पर धर्मेंद्र की ओर से थाना रजपुरा में रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई।
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सहायता के बहाने आरोपियों ने धर्मेंद्र को लिया झांसे में
जीबी पंत में लीवर का इलाज करा था धर्मेंद्र, हार्ट अटैक से मृत्यु दिखाकर फर्जी तरीके से बनवाया मृत्यु प्रमाण पत्र
संवाद न्यूज एजेंसी
बहजोई। एसपी ने बताया कि नशा करने के कारण धर्मेंद्र का लीवर खराब हो रहा था। वह आर्थिक रूप से कमजोर था। इस पर आरोपी शाहरुख, कल्पना व पंकज कुमार ढाली ने उसकी सहायता के बहाने आधार व पैन कार्ड हासिल किए और पंकज की ओर से अभिलेखों में धर्मेंद्र का पता बदलवाया गया था। बाद में बदले हुए पते के संशोधित आधार व पैन कार्ड को पंकज ने शाहरुख खान को भेजा। इसमें धर्मेंद्र के नाम पर आईसीआईसीआई, टाटा एआईए, रिलायंस निप्पन व एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस की कुल 90 लाख रुपये की बीमा पॉलिसी कराई गई थी। इसी बीमा राशि को पाने के लिए आरोपी शाहरुख ने विरेंद्र, नबाज अहमद आदि के साथ मिलकर जीबी पंत से मुत्यु संबंधी कागजात बनवाकर एमसीडी की ओर से 28 नवंबर 2024 का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया था। बावजूद इसके 15 फरवरी 2025 में आरोपी शाहरुख खान आदि की गिरफ्तारी होने के कारण क्लेम के लिए आवेदन नहीं किया गया था और न ही पुलिस की जांच पड़ताल में किसी भी प्रकार की बीमा पॉलिसी का भुगतान होना सामने आया है।
धर्मेंद्र का पर्सनल लॉन कराकर आरोनियों ने हड़प ली करीब 17 लाख रुपये की राशि
बहजोई। एसपी कृष्ण विश्नोई ने बताया कि धर्मेंद्र के अभिलेखों की जांच पड़ताल में सामने आया कि आरोपी पंकज कुमार ढाली अन्य साथियों के साथ मिलकर एक कंपनी तैयार करता था। इसके बाद अयोग्य लोगों को फर्जी तरीके से कंपनी के डायरेक्टर व अन्य कर्मचारी बनाकर पर्सनल लोन करवा लेता था। धर्मेंद्र के ऐक्सिस बैंक के खाते की ट्रांजेक्शन रिपोर्ट देखने पर सामने आया कि उसके खाते में 12.21 लाख व 4.93 लाख रुपये के दो पर्सनल लोन हैं। धर्मेंद्र मुंबई में मजदूरी करता था। वह किसी भी कंपनी में कार्यरत ही नहीं है, तो उसे लोन मिलना संदेह की स्थिति में था। धर्मेंद्र ने भी पर्सनल लोन से जुड़ी कोई भी जानकारी होने से इंकार कर दिया। बावजूद इसके धर्मेंद्र ने पूरे मामले में शाहरुख खान, कल्पना व पंकज कुमार ढाली की ओर से सरकारी स्कीम का लाभ दिलाए जाने की बात कहते हुए उससे हस्ताक्षर व फिंगर प्रिंट स्कैनिंग मशीन पर अंगूठे लगवाने की बात बताई थी। एसपी ने बताया कि जांच पड़ताल में सामने आया कि आरोपियों ने धर्मेंद्र को फेलेनेक्स लैब प्राइवेट लिमिटेड में कार्यरत दिखाते हुए उसके खाते में प्रतिमाह वेतन भुगतान किया गया है। वह इस कपंनी के बावत कुछ नहीं जानता। एसपी ने बताया कि तस्दीक करने पर सामने आया कि कंपनी करीब एक वर्ष पहले बंद हो चुकी है। उसे पंकज कुमार ढाली ने लोन एजेंट बताया था।
इनसेट
तीन राज्यों के कई जिलों के लोगों से पर्सनल लोन की राशि हड़पने को की गई धोखाधड़ी
बहजोई। एसपी कृष्ण विश्नोई ने बताया कि जांच पड़ताल में सामने आया कि आरोपी पंकज कुमार ढाली की ओर से अन्य आरोपियों के साथ मिलकर धोखाधड़ी से पंजाब के गुरदासपुर समेत उत्तराखंड के हरिद्वार व ऊधमसिंह नगर तथा उत्तर प्रदेश के बरेली, बागपत, मेरठ, पीलीभीत व मुरादाबाद आदि जिलों के लोगों को अपनी कंपनी का कर्मचारी दिखाते हुए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पर्सनल लोन प्राप्त कर लोन की धनराशि हड़पने को धोखाधड़ी की गई।