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Sambhal News: महाकुंभ हादसे में घायल बेरनी के वृद्ध श्रद्धालु की मौत
Sat, 01 Feb 2025 12:49 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Sat, 01 Feb 2025 12:49 AM IST
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चंदौसी (संभल)। प्रयागराज महाकुंभ में 28 जनवरी की रात संगम तट के पास हुए हादसे में घायल चंदौसी के थाना कुढ़फतेहगढ़ क्षेत्र के गांव बेरनी निवासी ब्रजपाल (60) की शुक्रवार की सुबह मृत्यु हो गई। प्रयागराज में बेहतर इलाज न मिलने के कारण परिजन उनको चंदौसी लेकर आ रहे थे, इसी दौरान रास्ते में उन्होंने दम तोड़ दिया। वह महाकुंभ में हुए हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। मृतक की तीन बेटियां है, जिससे परिजनों व ग्रामीणों ने एसडीएम से सरकारी आर्थिक मदद दिलाने की मांग की है। एसडीएम के हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। गांव बेरनी में प्राचीन शिव मंदिर है। मंदिर के महंत महादेव गिरी महाराज, राज गिरी बाबा, मंजारी बाबा समेत करीब 10 से 15 लोग 24 जनवरी को छोटा हाथी समेत दो वाहनों से प्रयागराज महाकुंभ में शामिल होने के लिए गए थे। जिसमें गांव में ब्रजपाल (60) पुत्र श्योराज सिंह यादव भी शामिल थे। ब्रजपाल अपने डेरे के साथ प्रयागराज में सेक्टर 19 में जूना अखाड़े में ठहरे थे। 28 जनवरी की शाम ब्रजपाल का बेटा जितेंद्र प्रयागराज के लिए रवाना हो गया। उसी रात महाकुंभ में संगम तट पर मौनी अमावस्या का शाही स्नान था। जिससे आधी रात में भीड़ अधिक होने पर संगम तट के पास हादसा हो गया। जिसमें पसली पर चोट आने के कारण ब्रजपाल गंभीर रूप से घायल हो गए। साथी ग्रामीण ब्रजपाल को महाकुंभ के सेक्टर 19 में झोसीवाला बाबा के आश्रम ले गए। बेटे जितेंद्र ने बताया कि अस्पताल, एंबुलेंस समेत अधिकारियों से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। जिससे निजी अस्पताल से इलाज कराया गया। सुधार न होने पर पिता को निजी वाहन से गांव लेकर आ रहे थे। शुक्रवार की सुबह करीब पांच बजे बदायूं के पास पिता ब्रजपाल ने दम तोड़ दिया। परिजन शव घर ले आए। परिजनों व ग्रामीणों ने एसडीएम को मामले की जानकारी देते हुए पोस्टमार्टम कराने की मांग की। एसडीएम निधि पटेल के हस्तक्षेप के बाद थाना कुढ़फतेहगढ़ पुलिस ने शव पोस्टमार्टम को भेजा। ग्रामीणों ने दुखी परिवार को सरकारी आर्थिक मदद दिलाने की मांग की है। परिजनों ने बताया कि पिता के नाम करीब 15 बीघा खेती भूमि है।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
शुक्रवार की सुबह जब ब्रजपाल का शव घर पहुंचा तो चीख पुकार मच गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ब्रजपाल की पहली पत्नी की मृत्यु हो गई। जिससे दो बेटे जितेंद्र व रवेंद्र और दो बेटियां हैं। जिनकी शादी हो चुकी है। जबकि दूसरी पत्नी उर्मिला देवी से तीन बेटियां सरस्वती, सोनम व मोना हैं। छोटी बेटी मोना 12 साल की है। बेटियां पिता की मौत का सदमा बर्दाश्त नहीं कर पा रही हैं।
आंखों देखी : हम घाट की ओर जा रहे थे, उधर से भीड़ दौड़ती हुई आ रही थी
चंदौसी। मृतक ब्रजपाल के गांव के ही उल्फत ने बताया कि 28 जनवरी की रात को वह ब्रजपाल व साथ आए अन्य लोगों के साथ संगम घाट की ओर जा रहे थे। रास्ते में पहुंचे ही थे कि सामने से लोग भागते हुए आ रहे थे। इससे पहले वह कुछ समझ पाते। भीड़ की धक्का मुक्की में ब्रजपाल जमीन पर गिर गए। उल्फत ने उनको बचाने का प्रयास किया, लेकिन भीड़ अधिक होने के कारण पलभर में ब्रजपाल भीड़ में नजर नहीं आए। अधिक भीड़ देख कर उन्होंने तत्काल वहां से दौड़ कर एक पंडाल पहुंचे और खुद को सुरक्षित किया। कुछ देर बाद जब मौके पर पहुंचे, जहां ब्रजपाल बेहोशी की हालत में पड़े थे। अन्य ग्रामीणों की मदद से उन्हें अपने पंडाल में ले गए।
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परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
शुक्रवार की सुबह जब ब्रजपाल का शव घर पहुंचा तो चीख पुकार मच गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ब्रजपाल की पहली पत्नी की मृत्यु हो गई। जिससे दो बेटे जितेंद्र व रवेंद्र और दो बेटियां हैं। जिनकी शादी हो चुकी है। जबकि दूसरी पत्नी उर्मिला देवी से तीन बेटियां सरस्वती, सोनम व मोना हैं। छोटी बेटी मोना 12 साल की है। बेटियां पिता की मौत का सदमा बर्दाश्त नहीं कर पा रही हैं।
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आंखों देखी : हम घाट की ओर जा रहे थे, उधर से भीड़ दौड़ती हुई आ रही थी
चंदौसी। मृतक ब्रजपाल के गांव के ही उल्फत ने बताया कि 28 जनवरी की रात को वह ब्रजपाल व साथ आए अन्य लोगों के साथ संगम घाट की ओर जा रहे थे। रास्ते में पहुंचे ही थे कि सामने से लोग भागते हुए आ रहे थे। इससे पहले वह कुछ समझ पाते। भीड़ की धक्का मुक्की में ब्रजपाल जमीन पर गिर गए। उल्फत ने उनको बचाने का प्रयास किया, लेकिन भीड़ अधिक होने के कारण पलभर में ब्रजपाल भीड़ में नजर नहीं आए। अधिक भीड़ देख कर उन्होंने तत्काल वहां से दौड़ कर एक पंडाल पहुंचे और खुद को सुरक्षित किया। कुछ देर बाद जब मौके पर पहुंचे, जहां ब्रजपाल बेहोशी की हालत में पड़े थे। अन्य ग्रामीणों की मदद से उन्हें अपने पंडाल में ले गए।
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