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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sambhal News ›   Allegation of illegal occupation of the circumambulation site of the ancient Shiva temple in Khaggu Sarai.

Sambhal : खग्गू सराय में प्राचीन शिव मंदिर के परिक्रमा स्थल पर भी अवैध कब्जे का आरोप, सड़क का अतिक्रमण

Thu, 19 Dec 2024 05:54 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, संभल
अमर उजाला नेटवर्क, संभल Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 19 Dec 2024 05:54 AM IST
सार

बुधवार को मंदिर में पूजा करने पहुंचे रस्तोगी परिवार के लोगों ने कहा कि पलायन के दौरान हमारे बुजुर्गों को डराकर जमीनें छीनी गई थीं। कहा कि मंदिर के चारों तरफ परिक्रमा स्थल पर लोगों ने कब्जा कर लिया है।

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Allegation of illegal occupation of the circumambulation site of the ancient Shiva temple in Khaggu Sarai.
संभल के खग्गू सराय मंदिर में पूजा करते श्रद्धालु। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नगर के मोहल्ला खग्गू सराय में 46 साल से बंद प्राचीन शिव मंदिर की नींव रखने वाले रस्तोगी परिवार के लोगों ने प्राचीन शिव मंदिर के परिक्रमा स्थल पर भी अवैध कब्जे का आरोप लगाया है। बुधवार को मंदिर में पूजा करने पहुंचे रस्तोगी परिवार के लोगों ने कहा कि पलायन के दौरान हमारे बुजुर्गों को डराकर जमीनें छीनी गई थीं। कहा कि मंदिर के चारों तरफ परिक्रमा स्थल पर लोगों ने कब्जा कर लिया है। साथ ही यहां की सड़क चौड़ी हुआ करती थीं लेकिन अब अतिक्रमण और अवैध कब्जे की वजह से संकरी हो गई हैं।

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1978 में दंगे के दौरान रस्तोगी समाज के लोग खग्गू सराय से पलायन कर गए। कोई परिवार संभल में ही हिंदू बहुल इलाके में बस गया तो कोई मुरादाबाद या फिर अन्य शहर में जाकर बस गया। 29 मार्च 1978 को जन्मे सुमित कुमार रस्तोगी बताते हैं कि उनके पिता दिवंगत सुभाष चंद रस्तोगी कारोबारी थे। उनका चीनी का प्लांट हुआ करता था। मंदिर के पीछे मकान है। एक मकान का आज तक बैनामा नहीं हुआ है, इस मकान का अधिकांश मटेरियल चोरी हो गया है। लेकिन 1978 के दंगे के बाद उन्हें खग्गू सराय छोड़कर जाना पड़ा।
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उन्होंने कहा कि जिस कुएं को पाटकर अवैध निर्माण किया गया था, यहां शादी के दौरान पूजा होती थी। बच्चों के नामकरण के दौरान कुआं पूजन होते थे। अब फिर मंदिर खुला है तो पूजा भी करेंगे। लेकिन डर भी है। आज पुलिस की सुरक्षा है, अगर पुलिस हटी तो पूजा कैसे होगी। दूसरे वर्ग के लोग पहले जैसा रवैया अपनाएंगे। आज भाजपा की सरकार है तो हम खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। किसी अन्य दल की सरकार बनती है तो हालात बिगड़ने की आशंका है। जिस रस्तोगी समाज के लोगों ने 46 साल पहले दंगा देखा वह कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। लेकिन, समाज के युवा सामने आए हैं। ।
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1978 से पहले मंदिर के आसपास कुछ नहीं था
सुमित रस्तोगी ने बताया कि आज खुशी का माहौल है, अब मंदिर का उद्धार करेंगे। परिक्रमा स्थल पर हुए अवैध निर्माण को हटवाया जाना चाहिए। मंदिर खुलने से बुजुर्गों की पुरानी यादें ताजा हो गई हैं। कहा कि बताया कि उनके भाई की शादी के दौरान पूजा खग्गू सराय के इसी मंदिर में हुई थी। इसी प्राचीन कुएं पर परंपरा निभाई गई। इसकी तस्वीरें आज भी हैं। बताया कि उनके बुजुर्गें बताते हैं कि 1978 में हुए दंगों से पहले मंदिर के आस-पास कुछ भी नहीं था। यहां केवल मैदान हुआ करता था, लेकिन अब माहौल बदल गया है।

दंगे से दहशत में आए इसलिए छोड़ा मोहल्ला और वीरान हो गया था मंदिर
नगर हिंदू महासभा के संरक्षक विष्णु शरण रस्तोगी का कहना है कि शहर दंगों की आग में कई बार जला है लेकिन जो दंगा 1978 में हुआ उसके जख्म अभी भी हरे हैं। क्योंकि जिसने वह दंगा आंखों से देखा है, वह कभी नहीं भूल सकता है। दंगे में हिंदू समाज के काफी लोग मारे गए थे। कारोबार भी हिंदू समाज के लोगों के ही खत्म हुए। दंगे के दौरान पहले लूट की गई और बाद में आग लगा दी। इसलिए खग्गू सराय में रहने वाले सभी हिंदू परिवारों में दहशत बैठ गई थी। जिसके चलते कई परिवारों ने तो संभल ही छोड़ दिया और दिल्ली व मुरादाबाद जाकर बस गए। उस दंगे ने पलायन करने के लिए मजबूर किया। इसके बाद से मंदिर वीरान हो गया था। अब भगवान शिव की कृपा हुई है।


दंगे में मेरी दुकान जलाई थी, तभी छोड़ दिया था शहर
दंगे के बाद शहर छोड़कर गए अनिल रस्तोगी ने बताया कि 1978 में जब दंगा शुरू हुआ तो वह अपनी दुकान पर बैठे थे। कई लोगों के मारे जाने की सूचना मिली तो दुकान बंद कर घर चले गए। शाम को जानकारी मिली कि दुकान को ही फूंक दिया है। अगले दिन पीएसी के साथ दुकान पर पहुंचे तो सारी दुकान जली हुई थी। पूरा कारोबार नष्ट हो गया था। असुरक्षित महसूस किया तो शहर ही छोड़ दिया। अब मंदिर के कपाट खुलने की जानकारी मिली तो मंदिर के दर्शन करने के लिए लौटे हैं। बताया कि उस समय जो शहर में हुआ उसको भुलाया नहीं जा सकता है।

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