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दिखावे के लिए किए गए काम से अल्लाह नहीं होता राजी : मौलाना
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सिरसी के इमाम बारगाह मोहल्ला शर्की सादात में मजलिस को संबोधित करते मौलाना एहतेशाम अली। संवाद
सिरसी। हमें वह काम करने चाहिए, जिससे अल्लाह राजी हो। क्योंकि दिखावे के लिए किए गए काम से अल्लाह राजी नहीं होता है। किसी ने मासूमीन से पूछा हमें कैसे पता चलेगा कि हमारी इबादत कबूल हुई या नहीं। इस पर उन्होंने बताया कि सुबह की नमाज से मगरिब की नमाज के बीच और मगरिब से सुबह की नमाज के वक्त तक अगर तुमसे कोई गुनाह नहीं हुआ है, तो समझ लेना तुम्हारी इबादत कबूल है। यह बातें मौलाना एहतेशाम अली नकवी ने मजलिस में कहीं।
मौलाना सिरसी के इमाम बारगाह मोहल्ला शर्की सादात में मजलिस को संबोधित कर रहे थे। मजलिस में मर्सिया हाजी वकार मेहंदी और उनके साथियों ने पढ़ा। मौलाना एहतेशाम अली नकवी ने कहा कि हमें अपने नफ्स पर काबू रखते हुए गुनाहों से बचना चाहिए और नेक काम इस तरह करने चाहिए कि एक हाथ को दें तो दूसरे को पता नहीं चलना चाहिए। क्योंकि अल्लाह को दिखावे वाली इबादत पसंद नहीं है। कहा कि बातचीत का अंदाज ऐसा होना चाहिए, जिससे किसी को ठेस नहीं पहुंचे। क्योंकि इस जबान से ही इंसान अपना और पराया हो जाता है। इंसान की बातचीत से ही उसके घर का माहौल पता चल जाता है। अगर किसी को आवाज देकर बुला रहे हों तो उसका पूरा नाम लेकर बुलाएं, इससे एक-दूसरे में मोहब्बत बढ़ती है।
मजलिस के आखिर में हजरत इमाम हुसैन की कुर्बानी बयान करते हुए नबी ए करीम की बेटी फात्मा जहरा के मसाइब बयान किए, जिसे सुनकर अजादारों की आंखों में आंसू आ गए। दूसरी मजलिस में मर्सिया महताब हुसैन जाफरी ने साथियों के साथ पढ़ा। मजलिस को लखनऊ से आए मौलाना अख्तर अब्बास जोन ने खिताब किया।
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मौलाना सिरसी के इमाम बारगाह मोहल्ला शर्की सादात में मजलिस को संबोधित कर रहे थे। मजलिस में मर्सिया हाजी वकार मेहंदी और उनके साथियों ने पढ़ा। मौलाना एहतेशाम अली नकवी ने कहा कि हमें अपने नफ्स पर काबू रखते हुए गुनाहों से बचना चाहिए और नेक काम इस तरह करने चाहिए कि एक हाथ को दें तो दूसरे को पता नहीं चलना चाहिए। क्योंकि अल्लाह को दिखावे वाली इबादत पसंद नहीं है। कहा कि बातचीत का अंदाज ऐसा होना चाहिए, जिससे किसी को ठेस नहीं पहुंचे। क्योंकि इस जबान से ही इंसान अपना और पराया हो जाता है। इंसान की बातचीत से ही उसके घर का माहौल पता चल जाता है। अगर किसी को आवाज देकर बुला रहे हों तो उसका पूरा नाम लेकर बुलाएं, इससे एक-दूसरे में मोहब्बत बढ़ती है।
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मजलिस के आखिर में हजरत इमाम हुसैन की कुर्बानी बयान करते हुए नबी ए करीम की बेटी फात्मा जहरा के मसाइब बयान किए, जिसे सुनकर अजादारों की आंखों में आंसू आ गए। दूसरी मजलिस में मर्सिया महताब हुसैन जाफरी ने साथियों के साथ पढ़ा। मजलिस को लखनऊ से आए मौलाना अख्तर अब्बास जोन ने खिताब किया।
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