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Sambhal News: कमरे में बंद ज्ञान का भंडार, पुरानी किताबों के सहारे नौनिहाल
Fri, 03 May 2024 04:50 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Fri, 03 May 2024 04:50 AM IST
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चंदौसी। परिषदीय विद्यालय में शैक्षणिक सत्र शुरू होने के एक महीने बाद भी बच्चों को पुस्तकें नहीं मिल पाई हैं। जबकि ब्लॉक संसाधन केंद्रों पर 20 दिन पहले पुस्तकें पहुंच चुकी है। बीआरसी केंद्र से वितरण की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से स्कूलों में पुस्तकें नहीं पहुंची हैं। लिहाजा स्कूलों में पुरानी पुस्तकों से पढ़ाई हो रही है। काफी बच्चों पर तो पुरानी किताबें भी नहीं हैं।
जिले में बेसिक शिक्षा विभाग के प्राइमरी व उच्च प्राइमरी 1299 विद्यालय हैं। जिनमें 10 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय भी शामिल हैं। सर्व शिक्षा अभियान के तहत इन स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को निशुल्क पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराई जाती हैं। यह पुस्तकें विभाग सीधे स्कूलों तक पहुंचाता है। इसके बाद स्कूलों में बच्चों के बीच पुस्तकें वितरण की जाती है। इस बार शैक्षणिक सत्र शुरू होने के एक महीने बाद भी स्कूलों तक पुस्तकें नहीं पहुंची हैं। ऐसा नहीं है कि जिले में पुस्तकें नहीं आयी है। करीब 20 दिन पहले जनपद में पुस्तकें पहुंच चुकी है। उन्हें बीआरसी केंद्रों तक पहुंचा दिया गया है। लेकिन अभी तक बीआरसी केंद्रों से स्कूलों में पुस्तकें नहीं पहुंचाई गई हैं। जिससे बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। कुछ बच्चे पुरानी पुस्तकें लेकर पढ़ने आ रहे हैं। उनकी पुस्तकें भी अच्छी स्थिति में नहीं हैं। कुछ बच्चों के पास पुरानी पुस्तकें भी नहीं है। बीते दिनों विभाग ने स्कूलों में पुस्तकें वितरण होने का दावा किया, लेकिन अभी भी बच्चों तक पुस्तकें नहीं पहुंची है। नई पुस्तकें बीआरसी केंद्रों की शोभा बढ़ा रही हैं।
परिषदीय विद्यालयाें में इस बार 1.90 लाख विद्यार्थी पंजीकृत हैं। इनके लिए नए सत्र में करीब नौ लाख पुस्तकों और चार लाख कार्य पुस्तिका की मांग की गई। विभाग ने 20 दिन पहले 53 फीसदी पुस्तकों का वितरण होने का दावा किया था, लेकिन एक महीने के बाद भी बच्चों को पुस्तकें वितरण नहीं की गई।
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जिले में बेसिक शिक्षा विभाग के प्राइमरी व उच्च प्राइमरी 1299 विद्यालय हैं। जिनमें 10 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय भी शामिल हैं। सर्व शिक्षा अभियान के तहत इन स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को निशुल्क पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराई जाती हैं। यह पुस्तकें विभाग सीधे स्कूलों तक पहुंचाता है। इसके बाद स्कूलों में बच्चों के बीच पुस्तकें वितरण की जाती है। इस बार शैक्षणिक सत्र शुरू होने के एक महीने बाद भी स्कूलों तक पुस्तकें नहीं पहुंची हैं। ऐसा नहीं है कि जिले में पुस्तकें नहीं आयी है। करीब 20 दिन पहले जनपद में पुस्तकें पहुंच चुकी है। उन्हें बीआरसी केंद्रों तक पहुंचा दिया गया है। लेकिन अभी तक बीआरसी केंद्रों से स्कूलों में पुस्तकें नहीं पहुंचाई गई हैं। जिससे बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। कुछ बच्चे पुरानी पुस्तकें लेकर पढ़ने आ रहे हैं। उनकी पुस्तकें भी अच्छी स्थिति में नहीं हैं। कुछ बच्चों के पास पुरानी पुस्तकें भी नहीं है। बीते दिनों विभाग ने स्कूलों में पुस्तकें वितरण होने का दावा किया, लेकिन अभी भी बच्चों तक पुस्तकें नहीं पहुंची है। नई पुस्तकें बीआरसी केंद्रों की शोभा बढ़ा रही हैं।
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परिषदीय विद्यालयाें में इस बार 1.90 लाख विद्यार्थी पंजीकृत हैं। इनके लिए नए सत्र में करीब नौ लाख पुस्तकों और चार लाख कार्य पुस्तिका की मांग की गई। विभाग ने 20 दिन पहले 53 फीसदी पुस्तकों का वितरण होने का दावा किया था, लेकिन एक महीने के बाद भी बच्चों को पुस्तकें वितरण नहीं की गई।
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