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महिला सांसत में: प्रशासन के पास सत्यापन की फुर्सत नहीं

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 31 Dec 2018 01:35 AM IST
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महिला सांसत में: प्रशासन के पास सत्यापन की फुर्सत नहीं
संभल। सऊदी अरब में पति की हत्या के बाद कर्ज लेकर कानूनी लड़ाई लड़ रही विधवा को अब प्रशासन से जूझना पड़ रहा है। हत्यारों से हुए समझौते के बाद उसे मिले 70 लाख के मुआवजे का चेक जिला प्रशासन ने जांच में अटका दिया है। जिससे कर्ज के तले दबी विधवा कुट्टी बेचकर परिवार का पालन पोषण कर रही है। वहीं कर्जदार उसे हर रोज परेशान कर रहे हैं। अगर जांच के नाम पर मुआवजे का चेक अटका रहा तो कर्जदारों का ब्याज भी बढ़ता जाएगा और विधवा की उम्मीदें भी धूमिल होंगी।
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असमोली थाना क्षेत्र के गांव नरैटा मोहम्मदपुर के नौशाद पुत्र फकीरा सऊदी अरब में मेहनत मजदूरी करने गया था जहां साढ़े तीन साल पहले उसकी हत्या कर दी गई थी। जिसकी मौत को संदिग्ध बताया गया था लेकिन शव के वापस लौटने के बाद मृतक की पत्नी सिरातुल ने हत्या का अंदेशा जताकर कानूनी दरवाजा खटखटाया और भारतीय दूतावास भी हरकत में आया। भारतीय दूतावास के हरकत में आने के बाद मामला सऊदी अरब के न्यायालय में पहुंचा।
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जिसमें आरोपी ने समझौता करने का आग्रह किया। विधवा के कुछ जिम्मेदार लोगों ने फैसले के सुझाव पर सहमति जताई। जिसके बाद कानूनी रूप में फैसला हुआ और आर्थिक मदद के रूप में 69,72,112 रुपये का चेक जिला प्रशासन को भेजा गया।
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चेक इसी साल जिलाधिकारी कार्यालय में 8 दिसंबर को पहुंचा लेकिन अभी तक पीड़िता को चेक नहीं मिल सका है। प्रशासन जांच-पड़ताल कर चेक देने की बात कह रहा है। लेकिन असहाय विधवा निराश हो चुकी है। अब वह वक्त को कोस रही है। परिवार के गुजारे के लिए कुट्टी बेचने को मजबूर है। जबकि प्रशासन द्वारा सत्यापन की बाद चेक दिए जाने की बात कही जा रही थी।

चार लाख रुपये खर्च करने के बाद शव गांव पहुंचा था
संभल। सिरातुल बताती हैं कि पति का शव गांव लाने के लिए चार महीने अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़े और चार लाख रुपये कर्ज लेकर खर्च किए थे। जबकि पति सऊदी अरब जाने से पहले भी दो लाख रुपये का कर्ज लेकर गए थे। उनकी मौत के बाद न्याय पाने के लिए पांच लाख रुपये वकील को देने की बात हुई। कागजी कार्रवाई और अन्य जरूरी कामों में लाखों रुपये खर्च हो गए। जिसमें उन पर 16 लाख रुपये का कर्ज हो चुका है। कर्जदार अब चक्कर लगा रहे हैं।


नहीं मिला सरकारी योजनाओं का लाभ, सर्दी में छप्पर में रह रही सिरातुल
संभल। गरीब और असहाय लोगों की मदद के लिए सरकारी योजनाएं सिरातुल के परिवार पर लागू नहीं हो रहीं हैं। जिसके चलते वह अपने बच्चों के साथ छप्परनुमा घर में रहने को मजबूर है। उसके लिए पीएम आवास योजना एक सपना है। गांव के प्रधान से विधवा पेंशन का आश्वासन दिया मगर नहीं मिली। सिरातुल का साथ ससुराल वाले भी छोड़ चुके हैं।
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इस चेक के संबंध में हमें कोई जानकारी नहीं है। दरअसल यह वित्तीय विभाग का मामला है। शायद बैंक में लंबित होगा। दीपेंद्र यादव, एसडीएम संभल।
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