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देवी भक्तों ने मां दुर्गा के चौथे स्वरुप कूष्मांडा की पूजा अर्चना
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चंदौसी। चैत्र नवरात्र के चौथे दिन श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की विशेष पूजा अर्चना की और व्रत जारी रखे। घरों के अलावा मंदिरों में पूजा-अर्चना की गई। मंदिरों में पूजन के लिए देवी भक्तों की लंबी लाइन लगी रही।
चैत्र नवरात्र के चौथे दिन मंगलवार को देवी भक्तों ने घर में मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की। इसके बाद मंदिर में गए। मंदिर में श्रद्धालुओं का सुबह छह बजे ही पहुंचना शुरू हो गया। पूजन के लिए लंबी लाइन में लगकर काफी देर तक इंतजार करना पड़ा।
श्रद्धालुओं ने मौलागढ़ स्थित देवी मंदिर, रामबाग धाम स्थित सिद्घिदात्री नवदुर्गा मंदिर के अलावा अन्य देवी मंदिरों में जाकर पूजा अर्चना कर मत्था टेका। घर में महिलाओं ने भजन-कीर्तन कर महामाई का गुणगान किया। कूष्मांडा देवी की मान्यता है कि उन्होंने शाकुंभरी रुप रखकर शाक से धरती को पल्लवित किया और शताक्षी बनकर असुरों का संहार किया। यह प्रकृति व पर्यावरण की अधिष्ठात्री हैं।
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इनकी आराधना बिना जप और ध्यान पूरा नहीं होता है। इस दिन शाक-सब्जी व अन्नदान फलदायी है। शाम को श्रद्धालु देवी मंदिर गए और महाआरती में भाग लेकर प्रसाद ग्रहण किया। देहात क्षेत्र में देवी मंदिरों में पूजा अर्चना के लिए लोगों की भीड़ लगी रही। श्रद्घालुओं ने पूजा अर्चना कर चौथे दिन व्रत जारी रखा।
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चैत्र नवरात्र के चौथे दिन मंगलवार को देवी भक्तों ने घर में मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की। इसके बाद मंदिर में गए। मंदिर में श्रद्धालुओं का सुबह छह बजे ही पहुंचना शुरू हो गया। पूजन के लिए लंबी लाइन में लगकर काफी देर तक इंतजार करना पड़ा।
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श्रद्धालुओं ने मौलागढ़ स्थित देवी मंदिर, रामबाग धाम स्थित सिद्घिदात्री नवदुर्गा मंदिर के अलावा अन्य देवी मंदिरों में जाकर पूजा अर्चना कर मत्था टेका। घर में महिलाओं ने भजन-कीर्तन कर महामाई का गुणगान किया। कूष्मांडा देवी की मान्यता है कि उन्होंने शाकुंभरी रुप रखकर शाक से धरती को पल्लवित किया और शताक्षी बनकर असुरों का संहार किया। यह प्रकृति व पर्यावरण की अधिष्ठात्री हैं।
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इनकी आराधना बिना जप और ध्यान पूरा नहीं होता है। इस दिन शाक-सब्जी व अन्नदान फलदायी है। शाम को श्रद्धालु देवी मंदिर गए और महाआरती में भाग लेकर प्रसाद ग्रहण किया। देहात क्षेत्र में देवी मंदिरों में पूजा अर्चना के लिए लोगों की भीड़ लगी रही। श्रद्घालुओं ने पूजा अर्चना कर चौथे दिन व्रत जारी रखा।