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सहकारी गन्ना विकास समितियों के किसानों को मिलेगी ब्याज में छूट
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संभल। सहकारी गन्ना समितियों के किसानों को अब तक सात प्रतिशत ब्याज भुगतान करना पड़ता था। समय पर भुगतान करने पर उन्हें ब्याज में चार प्रतिशत की छूट मिलेगी। इस संबंध में गन्ना आयुक्त के आदेश सहकारी गन्ना समितियों को प्राप्त हो गए हैं। साथ ही ब्याज में कटौती का सॉफ्टवेयर भी समितियों को मिल गया है। अब छूट का लाभ देने में कोई बाधा नहीं है। अब तक बाधाओं की वजह से बार-बार छूट अटक जाती थी।
ब्याज में छूट के लिए सहकारी गन्ना विकास समिति हसनपुर पैरवी कर रही थी। समिति के पूर्व संचालक सुरेंद्र सिंह और वर्तमान संचालक गौरव चाहल तीन वर्ष से इस मांग को लेकर लगातार पैरवी कर रहे थे। गन्ना आयुक्त के यहां लखनऊ में जब-जब गन्ना आरक्षण की बैठक हुई तब तब इन दोनों ने ब्याज में छूट न मिलने का मुद्दा उठाया था लेकिन सफलता अब मिली है।
संचालक गौरव चाहल ने बताया कि किसानों को 2011 से छूट मिलनी चाहिए थी लेकिन विभागीय प्रक्रिया न होने की वजह से सात वर्ष तक किसानों को अधिक ब्याज देना पड़ा। आमतौर पर किसान गन्ना समितियों से खाद लेते हैं और जब किसान गन्ना बेचते हैं तो उनके भुगतान जारी होते हैं।
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भुगतान की धनराशि जारी करते ही गन्ना समिति अपने ऋण की अदायगी कर लेती है। सवाल यह था कि जब समय पर भुगतान हो रहे हैं तो ब्याज की छूट क्यों नहीं। इस सवाल पर तीन वर्ष के संघर्ष में कामयाबी मिली है। उन्होंने बताया कि अब समितियों के किसान इस छूट का लाभ पाएंगे।
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ब्याज में छूट के लिए सहकारी गन्ना विकास समिति हसनपुर पैरवी कर रही थी। समिति के पूर्व संचालक सुरेंद्र सिंह और वर्तमान संचालक गौरव चाहल तीन वर्ष से इस मांग को लेकर लगातार पैरवी कर रहे थे। गन्ना आयुक्त के यहां लखनऊ में जब-जब गन्ना आरक्षण की बैठक हुई तब तब इन दोनों ने ब्याज में छूट न मिलने का मुद्दा उठाया था लेकिन सफलता अब मिली है।
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संचालक गौरव चाहल ने बताया कि किसानों को 2011 से छूट मिलनी चाहिए थी लेकिन विभागीय प्रक्रिया न होने की वजह से सात वर्ष तक किसानों को अधिक ब्याज देना पड़ा। आमतौर पर किसान गन्ना समितियों से खाद लेते हैं और जब किसान गन्ना बेचते हैं तो उनके भुगतान जारी होते हैं।
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भुगतान की धनराशि जारी करते ही गन्ना समिति अपने ऋण की अदायगी कर लेती है। सवाल यह था कि जब समय पर भुगतान हो रहे हैं तो ब्याज की छूट क्यों नहीं। इस सवाल पर तीन वर्ष के संघर्ष में कामयाबी मिली है। उन्होंने बताया कि अब समितियों के किसान इस छूट का लाभ पाएंगे।