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मनरेगा में मनमानी- हाथों से काम लिया पर मजदूरी का भुगतान नहीं किया

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 31 May 2019 02:11 AM IST
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मनरेगा में मनमानी- हाथों से काम लिया पर मजदूरी का भुगतान नहीं किया
संभल। गरीबों को रोजगार मुहैया कराने की महत्वाकांक्षी केंद्रीय योजना मनरेगा में मनमानी की जानकारियां मिल रही हैं। कई अधिकारी योजना को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। रामपुर में मनरेगा मानव दिवस सृजन का लक्ष्य पूरा न होने पर कुछ अधिकारियों को प्रतिकूल प्रविष्टि की चेतावनी दी गई है। संभल जिले के गुन्नौर में मजदूरों के हाथ खाली हैं। जबकि पवांसा ब्लाक में ऐसे तमाम मजदूर हैं जिनसे 2016 में काम लिया गया पर मजदूरी की धनराशि का भुगतान अभी तक नहीं किया गया। मजदूरों ने बताया कि रोजगार सेवक और प्रधान से वे संपर्क कर चुके हैं पर मजदूरी नहीं मिली।
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टोल फ्री नंबर पर शिकायत से भी समाधान नहीं निकल पाया। अब का सवाल यह है कि जब 24 घंटे में मजदूरी की धनराशि खाते में आने का नियम है तो उन्हें इतना इंतजार क्यों करना पड़ रहा है। मजदूरों ने कहा कि जब समय पर भुगतान नहीं मिलता तो काम क्यों करें। पिछले बकाया भुगतान के बारे में जब पूछते हैं तो संबंधित रोजगार सेवक और ग्राम प्रधान अपने हाथ खड़े कर हे हैं। परियोजना निदेशक रमेश चंद्र ने बताया कि इस वर्ष अब तक 1,11,559 मानव दिवस सृजित किए जा चुके हैं। चुनाव की वजह से काम ठप था। अब काम को रफ्तार दी जाएगी। उन्होंने बताया कि जब से आचार संहिता खत्म हुई तब से काम शुरू हो गए हैं। जहां तक 2016 की मजदूरी न मिलने का मसला है। इसकी जांच कराएंगे।
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बकाया मजदूरी नहीं मिली, हाथ खड़े कर रहे रोजगार सेवक और प्रधान
मनरेगा मजदूर महक सिंह ने बताया वर्ष 2016 मे उनके साथ लगभग 50 मजदूरों ने काम किया था जिन्हें अब तक भुगतान नहीं मिल सका। इसकी जिम्मेदारी न तो रोजगार सेवक ले रहे हैं और न ही ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव। टोल फ्री नंबर पर भी कई बार शिकायत दर्ज कराई। ब्लॉक स्तर पर जाकर शिकायत की पर कोई फायदा नहीं हुआ। बकाया मजदूरी को कौन दिलाएगा? उन्हें अभी तक पता नहीं चल सका।
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मनरेगा मजदूर सुखदेव ने बताया कि वर्ष 2016 में उन्होंने 14 मजदूरी की थी जिसका भुगतान नहीं मिल सका। इस बारे में अब तक कोई सुनवाई नहीं है जबकि रोजगार सेवक व ग्राम प्रधान से वह मिल चुके हैं। पुराना भुगतान न मिलने की वजह से किसी व्यक्ति के घर में काम करने का मन बनता है। मनरेगा में काम करने का मन नहीं होता है। उन्होंने कहा कि इतनी मेहनत करने के बाद भी पैसा न मिले तो काम करने से क्या फायदा।

मनरेगा मजदूर हीरालाल ने बताया कि 17 दिनों की मजदूरी बकाया है। इसे पाने के लिए रोजगार सेवक से शिकायत की थी। मगर रोजगार सेवक ने भरोसा दिया था पर हुआ कुछ नहीं। ग्राम प्रधान पति से कहा तो उन्होंने यह कहा कि आगे काम करोगे तो वह भी पिछला बकाया मिल जाएगा। प्रधान पति के कहने के बाद दो बार काम कर चुके हैं। दो बार का भुगतान मिला पर पिछला भुगतान नहीं मिल सका।


मनरेगा मजदूर लीलाधर ने बताया कि अपनी मजदूरी हासिल करने के लिए वह आज भी तरस रहे हैं। उनके 2100 रुपये नहीं मिले। रोजगार सेवक मनमानी कर रहे हैं। मजदूरों के जॉब कार्ड अपने पास दबा लिए हैं। इतनी मेहनत करने के बाद भी भुगतान नहीं मिल पा रहा है। इसे लेकर बहुत अफसोस होता है। इसके बाद भी योजना की सफलता के दावे किए जा रहे हैं। इससे आप खुद हकीकत समझ सकते हैं।
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