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25 वर्षों ने दूषित पानी पी रहे जियानगला के ग्रामीण, नलों ने निकलता लाल, काला पानी

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 23 Feb 2019 01:30 AM IST
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25 वर्षों ने दूषित पानी पी रहे जियानगला के ग्रामीण, नलों ने निकलता लाल, काला पानी
संभल। कहावत है कि बदनसीबी कभी-कभी कर्मों पर भारी पड़ती है, जिसमें लोग भगवान के साथ अपने नसीब को कोसते हुए सरकारी तंत्र पर सवाल करते हैं। जिन्हें दिन-रात अथक मेहनत करने के बाद फल नहीं मिलता। इस आधुनिक दौर में जब शहर के तकरीबन हर तीसरे घर में आरओ का फिल्टर पानी मिलता तो वहीं ग्रामीण इलाकों में ऐसे भी गांव है, जहां वर्षों से सरकारी तंत्र और उद्योगों की बदइंतजामी के चलते उन्हें दूषित पानी पीने को मिल रहा है। जहां सरकारों के सर्वांगीण विकास के दावे भी खोखले दिखते हैं।
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तहसील गुन्नौर में एक हजार की आबादी वाला एक ऐेसा गांव जियानगला की मढ़ईयां हैं। जहां सरकार की ओर से लगवाए गए इंडिया मार्का नलों से पीने के लिए लाल और काला पानी निकलता है। ग्रामीण धीरे-धीरे ही सही जहर पीने को मजबूर हैं। आलम यह है कि नलों से निकलने वाले इस पानी को पीकर ही ग्रामीण गुजारा करते हैं, जिन्हें साफ और शुद्ध पानी नसीब नहीं होता। ग्रामीणों की माने तो इस गांव के करीब से गुजरने वाली महावा नदी में 25 वर्ष पूर्व गजरौला के उद्योगों का काला पानी छोड़ा गया, जिससे नदी में सफेद पानी की जगह काला पानी प्रवाहित हुआ। इससे नदी किनारे का भूगर्भ जल भी काला और लाल बन गया, लेकिन कुछ वर्षों की अदालती जंग के बाद इन फै क्टरियों को पानी तो इस नदी में आना बंद हो गया, लेकिन लोगों की बदनसीबी के चलते यहां के भूगर्भ का जल हमेशा के लिए काला और लाल बन बया। तभी से ग्रामीण भी नलों से निकलने वाले पानी को पीने के लिए मजबूर है। ऐसा नहीं है कि इस गांव के ग्रामीण शुद्ध पानी पीना नहीं चाहते है। ग्रामीणों ने सरकारी सिस्टम से लेकर सरकार के जनप्रतिनिधियों को खत लिखे, शिकायत कर शुद्ध पानी की मांग की। जल निगम की ओर से गांव के पेयजल की जांच की गई तो 75 फीसदी अशुद्धि पाई गई। गांव के दर्जनों सरकारी नल भी लगवाए गए, लेकिन नतीजा शून्य निकला। आज भी सरकारी नलों ने लाल और काला पानी निकल रहा है, जिसे सभी ग्रामीण हमेशा की तरह 25 वर्षों से पी रहे हैं।
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