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12 दिन शेष सरकारी गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा होना मुश्किल
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चंदौसी। गेहूं खरीद के लिए 12 दिन शेष बचे हैं और अभी तक मात्र 442 मीट्रिक टन गेहूं की ही खरीद हुई है। विभाग के रिकॉर्ड में अभी भी सभी सरकारी गेहूं क्रय केंद्र संचालित हैं, पर वास्तव में मौके पर सभी बंद हो चुके हैं। निर्धारित अवधि में गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा हो पाना असंभव है। कम गेहूं खरीद का कारण सीजन की शुरुआत में निजी आढ़त पर गेहूं के दाम अधिक होना है। किसानों ने एमएसपी से अधिक दाम पर बाजार में अपना गेहूं बेच दिया और सरकारी केंद्र खाली रह गए।
संभल जिले में शासन ने 96 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य दिया था। एक अप्रैल से जिले में 64 सरकारी क्रय केंद्र संचालित किये गए थे। 15 अप्रैल के बाद से बाजार में गेहूं आना शुरू हो गया था। सरकारी केंद्रों पर गेहूं के दाम 2015 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि सीजन की शुरूआत में आढ़त (निजी बाजार) पर गेहूं का दाम 2100 रुपये से लेकर 2250 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका था। शुरुआत से गेहूं केंद्र खाली रहे। गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा करने के लिए शासन ने केंद्र प्रभारी व अन्य अधिकारियों को किसानों से संपर्क के निर्देश दिये थे। कुछ अधिकारी व कर्मचारियों ने किसानों से संपर्क किया। पर अधिकांश केंद्र प्रभारी ऐसे रहे, जो किसानों के पास तक नहीं गए। जबकि उन्हें जनसंपर्क कर रजिस्टर तैयार करना था। रजिस्टर में किसानों के नाम, फोन नंबर व पता भी दर्ज करने थे। निजी बाजार में गेहूं के दाम अधिक होने, अधिकारियों व कर्मचारियों की लापरवाही के चलते किसान सरकारी केंद्रों से दूर रहे। 64 दिन में सरकारी केंद्रों पर मात्र 442 मीट्रिक टन गेहूं की ही खरीद हो पाई। 11 दिन शेष है। अधिकांश किसान अपना गेहूं बेच चुके हैं और अब गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा हो पाना संभव नहीं है।
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कागजों में संचालित क्रय केंद्र, मौके पर बंद
जिले में गेहूं खरीद के लिए 64 सरकारी क्रय केंद्र बनाए गए थे। अभी गेहूं खरीद का समय शेष है। विभाग का दावा है कि सभी क्रय केंद्र संचालित हैं। पर मौके पर एक भी सरकारी क्रय केंद्र नहीं खुला है। सभी क्रय केंद्र बंद हो चुके हैं। केंद्रों से प्रभारी सामान समेट कर जा चुके हैं।
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केंद्र अभी संचालित हैं, पर गेहूं की बिक्री बंद हो गई है। इस बार जिले में मात्र 442 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई है। निजी बाजार में अधिक दाम, गेहूं के कम उत्पादन के कारण लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया है। इस बार गेहूं की खरीद बहुत ही कम हुई है।
विजेयता सिंह, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी संभल।
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संभल जिले में शासन ने 96 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य दिया था। एक अप्रैल से जिले में 64 सरकारी क्रय केंद्र संचालित किये गए थे। 15 अप्रैल के बाद से बाजार में गेहूं आना शुरू हो गया था। सरकारी केंद्रों पर गेहूं के दाम 2015 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि सीजन की शुरूआत में आढ़त (निजी बाजार) पर गेहूं का दाम 2100 रुपये से लेकर 2250 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका था। शुरुआत से गेहूं केंद्र खाली रहे। गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा करने के लिए शासन ने केंद्र प्रभारी व अन्य अधिकारियों को किसानों से संपर्क के निर्देश दिये थे। कुछ अधिकारी व कर्मचारियों ने किसानों से संपर्क किया। पर अधिकांश केंद्र प्रभारी ऐसे रहे, जो किसानों के पास तक नहीं गए। जबकि उन्हें जनसंपर्क कर रजिस्टर तैयार करना था। रजिस्टर में किसानों के नाम, फोन नंबर व पता भी दर्ज करने थे। निजी बाजार में गेहूं के दाम अधिक होने, अधिकारियों व कर्मचारियों की लापरवाही के चलते किसान सरकारी केंद्रों से दूर रहे। 64 दिन में सरकारी केंद्रों पर मात्र 442 मीट्रिक टन गेहूं की ही खरीद हो पाई। 11 दिन शेष है। अधिकांश किसान अपना गेहूं बेच चुके हैं और अब गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा हो पाना संभव नहीं है।
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कागजों में संचालित क्रय केंद्र, मौके पर बंद
जिले में गेहूं खरीद के लिए 64 सरकारी क्रय केंद्र बनाए गए थे। अभी गेहूं खरीद का समय शेष है। विभाग का दावा है कि सभी क्रय केंद्र संचालित हैं। पर मौके पर एक भी सरकारी क्रय केंद्र नहीं खुला है। सभी क्रय केंद्र बंद हो चुके हैं। केंद्रों से प्रभारी सामान समेट कर जा चुके हैं।
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केंद्र अभी संचालित हैं, पर गेहूं की बिक्री बंद हो गई है। इस बार जिले में मात्र 442 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई है। निजी बाजार में अधिक दाम, गेहूं के कम उत्पादन के कारण लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया है। इस बार गेहूं की खरीद बहुत ही कम हुई है।
विजेयता सिंह, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी संभल।