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जल संरक्षण को प्रभावी कार्ययोजना से करें कार्य: मंडलायुक्त
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सहारनपुर। जल संरक्षण एवं वर्षा जल संचयन के लिए 30 नवंबर तक जल शक्ति अभियान 2021 चलेगा। मंडलायुक्त एवी राजमौलि ने मंडल के तीनों जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि तालाबों और जल स्रोत के पुनर्जीवन के लिए प्रभावी कार्ययोजना से कार्य करें। जल संसाधन और वर्षा जल संग्रहण पारंपरिक व अन्य जल श्रोतों, तालाबों का पुनर्जीवन, बोरवेल्स का पुन प्रयोग व रिचार्ज के साथ जलग्रहण क्षेत्र के विकास एवं सघन वनीकरण का कार्य कराएं।
जल शक्ति अभियान को लेकर जिला स्तर पर मुख्य विकास अधिकारी, ब्लाक स्तर पर खंड विकास अधिकारी, नगर निगम स्तर पर नगरायुक्त, नगर पालिका और नगर पंचायत स्तर पर अधिशासी अधिकारियों को अभियान के समन्वय और अनुश्रवण के लिए नोडल अधिकारी नामित किया है। मंडलायुक्त ने कहा कि किसानों को कृषि विज्ञान केंद्रों के प्रशिक्षण के माध्यम से सिंचाई के लिए जल कुशल तकनीक, माइक्रो इरिगेशन के प्रयोग को लोकप्रिय बनाया जाए। जल के अधिक प्रयोग से फसलों को होने वाले नुकसान के प्रति भी जागरूक करें। तालाबों से अतिक्रमण हटवाकर जीर्णोद्धार एवं सुदृढ़ीकरण कराते हुए जल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। लघु एवं सहायक नदियों को समुदाय द्वारा संचालित नदी बेसिन प्रबंधन के माध्यम से पुनर्जीवित कराया जाए। जलाशयों की सूची तैयार कर जीआईएस मैपिंग कराई जाए। सभी ग्राम पंचायतों में जीआईएस आधारित जल संग्रहण विकास योजनाएं बनाई जाए। सरकारी और गैर सरकारी भवनों पर वर्षा जल संचयन व्यवस्था की जाए। जल शक्ति मंत्रालय के पोर्टल पर डाटा समय से अपडेट करें और अभियान की प्रगति से शासन को भी अवगत कराया जाए।
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जल शक्ति अभियान को लेकर जिला स्तर पर मुख्य विकास अधिकारी, ब्लाक स्तर पर खंड विकास अधिकारी, नगर निगम स्तर पर नगरायुक्त, नगर पालिका और नगर पंचायत स्तर पर अधिशासी अधिकारियों को अभियान के समन्वय और अनुश्रवण के लिए नोडल अधिकारी नामित किया है। मंडलायुक्त ने कहा कि किसानों को कृषि विज्ञान केंद्रों के प्रशिक्षण के माध्यम से सिंचाई के लिए जल कुशल तकनीक, माइक्रो इरिगेशन के प्रयोग को लोकप्रिय बनाया जाए। जल के अधिक प्रयोग से फसलों को होने वाले नुकसान के प्रति भी जागरूक करें। तालाबों से अतिक्रमण हटवाकर जीर्णोद्धार एवं सुदृढ़ीकरण कराते हुए जल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। लघु एवं सहायक नदियों को समुदाय द्वारा संचालित नदी बेसिन प्रबंधन के माध्यम से पुनर्जीवित कराया जाए। जलाशयों की सूची तैयार कर जीआईएस मैपिंग कराई जाए। सभी ग्राम पंचायतों में जीआईएस आधारित जल संग्रहण विकास योजनाएं बनाई जाए। सरकारी और गैर सरकारी भवनों पर वर्षा जल संचयन व्यवस्था की जाए। जल शक्ति मंत्रालय के पोर्टल पर डाटा समय से अपडेट करें और अभियान की प्रगति से शासन को भी अवगत कराया जाए।
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