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निर्भया के दोषियों को सजा पर महिलाओं ने खुशी जताई

Sat, 21 Mar 2020 12:18 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 21 Mar 2020 12:18 AM IST
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Women cheered Nirbhaya's conviction on punishment
निर्भया के गुनहगार को फांसी दिये जाने के बाद खुशी मैरीडेल स्कूल में खुशी मनाती महिलाएं - फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। निर्भया कांड के दोषियों को फांसी की सजा मिलने पर पंजाबी बाग स्थित मेरी डेल एकेडमी की शिक्षिकाओं के अलावा अन्य महिलाओं ने खुशी जताई। उन्होंने मिठाई बांटकर खुशी का इजहार किया। महिलाओं ने कहा कि लंबे इंतजार के बाद बिटिया और उसके परिजनों को इंसाफ मिला है। इसमें इतनी देर नहीं होनी चाहिए थी।
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प्रिंसिपल रश्मि टेरेंस, आकांक्षा कौशिक, दिव्या गुप्ता, मीनाक्षी, मीना रावत, सुषमा सहित अन्य ने कहा कि इस तरह की सजा से ही अन्य अपराधियों को सबक मिलेगा कि वे भविष्य में इस तरह किसी बेटी पर अत्याचार न करें। कविता सिंघल, रिंकी राना, काजल, मोनिका, सुमन सहित अन्य ने भी इस सजा पर खुशी जाहिर की, लेकिन उन्होंने कहा कि देश की न्याय व्यवस्था में ऐसे जघन्य अपराध में दोषियों को बचाने के ज्यादा विकल्प नहीं दिए जाने चाहिए। इससे इंसाफ में देरी और पीड़ितों को अधिक पीड़ा होती है।
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वकील बोले, अपराधियों को बचाने के विकल्प कम हों
- बार संघ के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह चौहान का कहना है कि लंबे समय से इस मामले में दोषियों को सजा दिलाने का इंतजार किया जा रहा था। काफी देर से यह सजा हुई है, लेकिन निर्भया कांड के पीड़ितों को अब न्याय मिला है। यह राहत की बात है। उनका मानना है कि जघन्य श्रेणी के अपराधियों को बचाने के ज्यादा विकल्प नहीं होने चाहिए।
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- वरिष्ठ अधिवक्ता अखिलेश अग्रवाल का कहना है कि निर्भया जैसी बेटियों को इंसाफ दिलाने के लिए यह सजा बेहद जरूरी थी। वह कहते हैं कि इस मामले में कुछ कानूनी विकल्प और प्रक्रिया का सहारा लेकर अपराधियों को सजा से बचने का काफी मौका दिया गया। भविष्य में ऐसे विकल्प खत्म करने जरूरी है।
- बार संघ के महासचिव राजीव गुप्ता ने कहा कि बहुत देर से सही, लेकिन निर्भया और उसके पीड़ित परिवार को न्याय मिला है। यह राहत की बात है। इस तरह के मामलों में भविष्य में जल्द न्याय और अपराधियों को जल्द सजा के प्रयास किए जाने चाहिए।
- सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता फरहा फैज का कहना है कि निर्भया कांड के दोषियों को तो सही सजा मिल गई है, लेकिन इस कांड के बाद न्यायिक व्यवस्था के साथ अधिवक्ताओं को भी इससे सबक लेना होगा। इस मामले में हुई गलतियों के कारण सजा में देरी की स्थिति आगे के ऐसे मामलों में नहीं होनी चाहिए।
- महिला अधिवक्ता प्रवीण कहती हैं कि बेटियों के साथ ऐसे जघन्य मामलों में इसी तरह की सजा की जरूरत है, लेकिन व्यवस्था की उन खामियों को दूर करना जरूरी है, जिसके कारण इंसाफ में देरी हो जाती है।

पवन जल्लाद की बेटी और दामाद बोले, पापा ने कर दिया सबसे बड़ा काम
सहारनपुर। निर्भया कांड के दोषियों को फांसी देने वाले पवन जल्लाद की बेटी प्रीति और उसके दामाद मनोज कुमार का कहना है कि लंबे समय से पापा को यह सजा देने का इंतजार था। वे बहुत खुश हैं कि पापा ने यह काम किया है। प्रीति का कहना है कि उनके पापा से पहले कल्लू दादा ने भी कई बड़े अपराधियों को फांसी दी है। लेकिन उनके पिता पवन चार दोषियों को एक साथ फांसी देने वाले पहले शख्स बन गए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की सबसे अधिक खुशी है कि बिटिया निर्भया के दोषियों की इतनी बड़ी सजा दिलाने में उनके पापा की भूमिका रही है। उनका नाम इतिहास में दर्ज हो गया है। इसे हमेशा याद रखा जाएगा।
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