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जिले में गेहूं खरीद ने तोड़ा बीस साल का रिकार्ड
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सहारनपुर। जनपद में गेहूं की सरकारी खरीद ने पिछले 20 साल का रिकार्ड तोड़ दिया है। अब तक 100633 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो चुकी है। अभी 15 जून तक गेहूं की खरीदारी होगी।
किसानों को उनकी फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाने के लिए सरकार विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से गेहूं की खरीद कराती हैं। जनपद में गेहूं खरीद करने के लिए 98 क्रय केंद्र बनाए हैं। जिन पर एक अप्रैल से गेहूूं की खरीद हो रही है।
जनपद में इस वर्ष 1.12 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं की खेती हुई है और उत्पादकता भी बढ़िया रही। साथ ही गेहूं की गुणवत्ता भी सरकारी मानकों पर खरी उतरी है। इसके चलते किसानों ने अधिकांश गेहूं निजी व्यापारियों की बजाए सरकारी क्रय केंद्रों पर बेचा है। इससे पहले सर्वाधिक खरीद वर्ष 2018-19 में हुई थी। इसकी मात्रा 72413 मीट्रिक टन थी और सबसे कम 357 मीट्रिक टन गेहूं वर्ष 2006 -07 वर्ष में खरीदा था।
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1.85 लाख मीट्रिक टन है मंडल में भंडारण क्षमता
जिला खाद्य विपणन अधिकारी ने बताया कि खरीदे गए गेहूं के भंडारण के लिए पर्याप्त क्षमता है। जिले के पिलखनी गोदाम की भंडारण क्षमता 45 हजार मीट्रिक टन, जनता रोड गोदाम की 10 हजार मीट्रिक टन और मुजफ्फरनगर के बामन हेड़ी स्थित गोदामों की 1.20 लाख मीट्रिक टन है। इन गोदामों से सार्वजनिक वितरण प्रणाली का खाद्यान्न महीने में दो बार उठ रहा है। इस कारण भंडारण की कोई समस्या नहीं है। अब तक खरीदा गया 98 प्रतिशत गेहूं गोदामों में पहुंचा दिया है।
अच्छी गुणवत्ता एवं बढ़िया उत्पादन
मौसम के अनुकूल रहने से गेहूं की फसल में कीट और रोगों का प्रकोप कम हुआ। इससे गेहूं की गुणवत्ता अच्छी रही और उत्पादकता में भी वृद्धि हुई। विगत वर्ष जनपद में गेहूं की औसत उत्पादकता 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की थी, जबकि इस बार 42 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से अधिक मानी जा रही है। - धीरज कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी।
मानकों के अनुकूल होने से बढ़ी खरीद
गेहूं की गुणवत्ता खरीद के सरकारी मानकों के अनुकूल है, इसलिए क्रय केंद्रों पर गेहूं की बंपर खरीदारी हो रही है। पिछले 20 साल में गेहूं खरीद का यह आंकड़ा सर्वाधिक है। अभी 15 जून तक खरीद होनी है। - प्रिंस चौधरी, जिला खाद्य विपणन अधिकारी।
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किसानों को उनकी फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाने के लिए सरकार विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से गेहूं की खरीद कराती हैं। जनपद में गेहूं खरीद करने के लिए 98 क्रय केंद्र बनाए हैं। जिन पर एक अप्रैल से गेहूूं की खरीद हो रही है।
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जनपद में इस वर्ष 1.12 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं की खेती हुई है और उत्पादकता भी बढ़िया रही। साथ ही गेहूं की गुणवत्ता भी सरकारी मानकों पर खरी उतरी है। इसके चलते किसानों ने अधिकांश गेहूं निजी व्यापारियों की बजाए सरकारी क्रय केंद्रों पर बेचा है। इससे पहले सर्वाधिक खरीद वर्ष 2018-19 में हुई थी। इसकी मात्रा 72413 मीट्रिक टन थी और सबसे कम 357 मीट्रिक टन गेहूं वर्ष 2006 -07 वर्ष में खरीदा था।
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1.85 लाख मीट्रिक टन है मंडल में भंडारण क्षमता
जिला खाद्य विपणन अधिकारी ने बताया कि खरीदे गए गेहूं के भंडारण के लिए पर्याप्त क्षमता है। जिले के पिलखनी गोदाम की भंडारण क्षमता 45 हजार मीट्रिक टन, जनता रोड गोदाम की 10 हजार मीट्रिक टन और मुजफ्फरनगर के बामन हेड़ी स्थित गोदामों की 1.20 लाख मीट्रिक टन है। इन गोदामों से सार्वजनिक वितरण प्रणाली का खाद्यान्न महीने में दो बार उठ रहा है। इस कारण भंडारण की कोई समस्या नहीं है। अब तक खरीदा गया 98 प्रतिशत गेहूं गोदामों में पहुंचा दिया है।
अच्छी गुणवत्ता एवं बढ़िया उत्पादन
मौसम के अनुकूल रहने से गेहूं की फसल में कीट और रोगों का प्रकोप कम हुआ। इससे गेहूं की गुणवत्ता अच्छी रही और उत्पादकता में भी वृद्धि हुई। विगत वर्ष जनपद में गेहूं की औसत उत्पादकता 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की थी, जबकि इस बार 42 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से अधिक मानी जा रही है। - धीरज कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी।
मानकों के अनुकूल होने से बढ़ी खरीद
गेहूं की गुणवत्ता खरीद के सरकारी मानकों के अनुकूल है, इसलिए क्रय केंद्रों पर गेहूं की बंपर खरीदारी हो रही है। पिछले 20 साल में गेहूं खरीद का यह आंकड़ा सर्वाधिक है। अभी 15 जून तक खरीद होनी है। - प्रिंस चौधरी, जिला खाद्य विपणन अधिकारी।